असली दिक्कत YouTube Teachers से नहीं, बल्कि उनकी आवाज़ से है। आज किसी भी परीक्षा में गड़बड़ी हो, पेपर लीक हो, रिज़ल्ट में अन्याय हो या छात्रों के साथ गलत हो, तो यही YouTube Teachers सबसे पहले छात्रों के हक़ की लड़ाई में कूद पड़ते हैं। लाखों छात्रों की आवाज़ बन जाते हैं। सरकार पर दबाव बनता है, सवाल पूछे जाते हैं और जवाब माँगे जाते हैं।
शायद यही कारण है कि कुछ लोगों को शिक्षक नहीं, उनकी सक्रियता खटकती है।लोगों की आँखों की किरकिरी बन जाता है।
इसलिए जो बातें सत्ता सीधे नहीं कह सकती, वही बातें कुछ चेहरे अपने मुख से कह देते हैं।
ध्यान रहे कि "सरकार कहना चाहती थी, अंजना ने कह दिया"