कुरावली, मैनपुरी उत्तर प्रदेश में वारिश अली की हत्या को वक्त बीत रहा है, लेकिन आरोपी अभिषेक भदौरिया और बिल्ला अब भी फरार हैं। न बुल्डोजर चला, न कोई सख्त कार्रवाई दिखी। ऊपर से आरोपी पक्ष का अमन प्रधान खुलेआम धमकियां दे रहा है।
क्या कानून का डर सिर्फ चुनिंदा लोगों के लिए है?
📍 कुरावली, मैनपुरी, उत्तर प्रदेश
19 मई 2026 को 90 वर्षीय वारिस अली की मौत के मामले में कुरावली पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच की। 20 मई को उनका शव फतेहजंगपुर अंडरपास की सर्विस रोड पर मिला था।
पुलिस के अनुसार मामले में अरुण कुमार (सरकारी शिक्षक), रविंद्र, अभिषेक सिंह, ऋषिबाबू और विमलेश सिंह उर्फ बिल्ला को गैंगस्टर एक्ट के तहत चिन्हित किया गया है।
पुलिस का आरोप है कि मामला करीब 12.5 बीघा जमीन से जुड़े विवाद और कथित धोखाधड़ी से जुड़ा था।
3 अक्टूबर 2026 को गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) के तहत कुरावली-मैनपुरी रोड स्थित करीब 12.5 बीघा जमीन कुर्क की गई। पुलिस के मुताबिक इसका सर्किल रेट ₹8 करोड़ 3 लाख 20 हजार और अनुमानित बाजार मूल्य ₹15 करोड़ से अधिक है।
अधिकारियों के मुताबिक आरोपियों की अन्य संपत्तियों को भी चिन्हित कर नियमानुसार आगे की कार्रवाई जारी रहेगी।
देश बहरूपियों के हाथ में है केवल अपने प्रचार सरकारी ₹12811 करोड़ रु0 उड़ा दिया।
उसी मोटे लागत-मानक पर:
परियोजनाप्रति इकाई अनुमान₹12,811 करोड़ में
प्राथमिक स्कूल₹1 करोड़12,811 स्कूल
प्राथमिक स्कूल₹2 करोड़6,405 स्कूल
100-बेड अस्पताल₹100 करोड़128 अस्पताल
100-बेड अस्पताल₹150 करोड़लगभग 85 अस्पताल
यानी ₹12,811 करोड़ में करीब 6,400–12,800 प्राथमिक स्कूल या 85–128 बड़े 100-बेड अस्पताल बनाए जा सकते हैं।
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर किलोमीटर 79.6 (थाना हलियापुर क्षेत्र) के पास रविवार सुबह लगभग 8:15 बजे एक भीषण सड़क हादसा हुआ। चंडीगढ़ में तैनात दिवंगत सूबेदार मेजर सत्यवान (निवासी: गैला दुधिला, देवरिया) का पार्थिव शरीर लेकर पैतृक गांव जा रही एंबुलेंस (T0626HR7553BJ) को एक अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी।
इस दर्दनाक दुर्घटना में सूबेदार मेजर के पुत्र गौरव सिंह और चालक जसपाल की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल भाई राजन चौधरी और भतीजे राम समुझ सिंह ने कुमारगंज (पिठला) स्थित अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
#WATCH | Gonda, Uttar Pradesh | On the ECI controversy, BJP leader Brij Bhushan Sharan Singh says, "There was a Hitler-like dictatorship in this country regarding the Election Commission when there was no law at all. Around 2023, a case went to the Supreme Court, and at that time, the Supreme Court asked what the procedure was for appointing the Election Commissioner. Until then, there was no procedure at all in our country. That was when there was a Hitler-like dictatorship. On the instructions of the Supreme Court, a law was made by the Parliament elected in a constitutional manner. In that law, it was decided that (within the committee) one member would be the country's Prime Minister, the second member would be the Leader of the Opposition, and the third member would be a person nominated by the Prime Minister. This law has also been challenged in the Supreme Court, but until now, no one has annulled this law... I want to ask these people: how was Naveen Chawla's appointment done?... How was MS Gill's appointment done?... They started having problems after 2014 because their fortresses started crumbling one by one... Elections were held even before EVMs, but back then the EVM was right; India's election process was right, but now these things are coming to light as one by one their fortresses crumble..."
असम में जासूसी के आरोप में आज 2 लोग पकड़े गए हैं। इसमें एक सेना का पूर्व जवान भी है, जो अब कॉन्ट्रेक्ट पर दोबारा नौकरी में रखा गया था। हालांकि प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीएम हेमंत बिसवा सरमा ने आरोपियों के नाम उजागर नहीं किए हैं।
कमीशन या रिश्वत में कितनी ताकत होती है; यह देखिए। इतनी तेज, चाहे बाइक सवार मर जाए, लोग दब जाए, स्पीड कम नहीं होनी चाहिए।
लेकिन, RTO चुप रहेगा। पुलिस भी आम आदमी को ही पकड़ेगी।