डीएफसी कॉरिडोर पर मालगाड़ी के एक डिब्बे में आग लगने से हड़कंप।
डिब्बे में 4 पहिया गाड़ियां लदी थीं।
सूचना मिलते ही 4 दमकल गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया।
#DFCCorridor#TrainFire#BreakingNews
मोदी आपने कहा था, "मां गंगा ने मुझे बुलाया है" और आपने कहा गंगा की सेवा को अपना सौभाग्य समझता हूं
आपने यह भी कहा था गंगा की सफाई मेरी प्राथमिकताओं में होगी।
मोदी जी अब आपका सौभाग्य कहां गया और आपकी प्राथमिकताएं कहां गई?
“जय श्रीराम बोलेगा, तभी प्रसाद मिलेगा” — सिद्धार्थनगर की यह घटना बेहद चिंताजनक है।
आस्था किसी पर थोपी नहीं जा सकती।
धर्म के नाम पर इस तरह की जबरदस्ती समाज में नफरत और दूरी बढ़ाती है।
प्रशासन को निष्पक्ष जांच कर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि ऐसे मामलों पर रोक लग सके।
फैज़ल खान vs रौशन आनंद यादव विवाद खतरनाक दिशा लेता दिख रहा है।
सबसे चिंता की बात ये है कि अब इसमें हिंदू-मुस्लिम एंगल जोड़ने की कोशिश हो रही है।
दो लोगों की लड़ाई को बच्चों के बीच धर्म के नाम पर बाँटना बेहद खतरनाक है।
इनका कुछ नहीं बिगड़ेगा, लेकिन नुकसान मासूम छात्रों का होगा।
पत्रकार: सर, बेंती के तालाब में आज भी मगरमच्छ है क्या?
रघुराज प्रताप सिंह: वो आकर के हम आपको दिखाएंगे। अगर आप जीवित बचकर आ गए तो मगरमच्छ नहीं है, और अगर वहीं विलीन हो गए तो फिर मगरमच्छ हैं
जेल से बाहर आते ही रोशन आनंद ने खान सर और किसान कोल्ड स्टोर के मालिक आरएस प्रसाद पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि उन्होंने पहले से षड्यंत्र रचकर उनके भाई की हत्या करवाई।
यह मामला पहले भी चर्चा में रहा है और अब फिर से नए आरोपों के साथ सामने आया है।
जब जरूरत होती है तब सिस्टम गायब हो जाता है, और सबसे ज्यादा मार युवाओं पर ही पड़ती है।
परीक्षा देने जा रहे छात्रों के लिए ऐसी अव्यवस्था बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
राजनीति अपनी जगह है, लेकिन युवाओं के भविष्य के साथ लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होनी चाहिए। @RailMinIndia
@BhanuNand Imran Masood को समझना चाहिए कि उनकी जीत में Akhilesh Yadav की लहर का बड़ा योगदान था।
अपने साथियों को नीचा दिखाकर नहीं, साथ लेकर चलने से ही राजनीति मजबूत होती है।
एक दिन किसी ने मुझसे सवाल किया कि ब्राह्मणवाद क्या है
मैंने कहा दोगुनी उम्र का क्षत्रिय भी एक ऐसे व्यक्ति के चरणों में झुके जिसकी उम्र उससे आधी हो वही ब्राह्मणवाद है।
पहले तो ममता बनर्जी से असंतुष्ट फिर उसके बाद चुप्पी, जब ममता बनर्जी चुनाव लड़ रही थीं तब तो यह सयानी घोष ममता बनर्जी की खूब वफादार थीं
जैसे ही ममता बनर्जी चुनाव हारीं
पार्टी कमजोर हुई सियानी घोष ने अपना रंग दिखा दिया, आज सयानी घोष से मीडिया ने सवाल पूछा आप हमेशा TMC के साथ रहने की बात कर रहीं थीं... चड्ढा नहीं हूं यह कह रहीं थीं
इसपर सयानी घोष का कहना था, मैं आपको जवाब नहीं दूंगी अपने क्षेत्र की जनता को जवाब दूंगी
जो महिला मीडिया के सामने बेबाक बोलती हो वो मीडिया से नजर चुराते हुए कह रही है कि मैं आपको जवाब नहीं दूंगी ।
जब भविष्य का सवाल हो और परीक्षा के लिए समय पर पहुंचना जरूरी हो, तब ट्रेन लेट होना छात्रों के लिए बड़ी समस्या बन जाता है।
पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन पर छात्रों का हंगामा और प्रदर्शन बिहार पुलिस मध्य निषेध के एग्जाम में जाने के लिए ट्रेन लेट होने से छात्रों ने किया हंगामा
@azizkavish इतनी मुश्किलों के बाद भी न हार मानी—और इस सफर में पति का साथ सबसे बड़ी ताकत बना।
जब हर हाल में साथ निभाने वाला जीवनसाथी मिल जाए, तो बड़ी से बड़ी लड़ाई भी जीती जा सकती है।
आज दोनों मिलकर एक मिसाल हैं ❤️
बेटा या बेटी होना किसी के बस में नहीं, फिर भी महिलाएं सजा झेलती हैं — यह दुखद है।
किसी भी समाज में महिला पर हिंसा गलत है।
सोच बदलनी होगी, क्योंकि बेटी भी उतनी ही कीमती है।