सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक युवक सरसों के तेल जैसी दिखने वाली चीज से भरे टैंक में डुबकी लगाता नजर आ रहा है।
#ViralVideo#MustardOil
किसानों के हित में बड़ा निर्णय
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✅भूमि अधिग्रहण पर किसानों को मिलेगा 𝟒 गुना मुआवजा
✅किसानों के हितों और अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
@DrMohanYadav51@Aidalsinghkbjp#MadhyaPradesh
दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान के तृतीय चरण के अंतर्गत #नरसिंहपुर जिले के ग्राम माचामऊ में सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी श्री प्रिंस मुड़िया ने पशुपालक श्री नीलेश पटेल से संपर्क कर पशु स्वास्थ्य, पशु पोषण, टीकाकरण और गोरस ऐप के बारे मे जानकारी दी।
@JansamparkMP
1950 के दशक में भारत खाद्यान्न संकट से जूझ रहा था। इसी दौरान अमेरिका ने PL-480 (Food for Peace) कार्यक्रम के अंतर्गत भारत को बड़ी मात्रा में गेहूँ भेजा।
वनस्पति वैज्ञानिकों का मानना है कि उसी आयातित गेहूँ की कुछ खेपों में Parthenium hysterophorus के अत्यंत छोटे बीज USA ने मिला दिए।
Parthenium hysterophorus, जिसे भारत में झाड़ी, कांग्रेस घास, गाजर घास या कई स्थानों पर सफेद टॉप के नाम से जाना जाता है, दुनिया की सबसे खतरनाक आक्रामक खरपतवारों में गिनी जाती है। यह केवल एक साधारण जंगली पौधा नहीं है, बल्कि कृषि, पर्यावरण, पशुपालन और मानव स्वास्थ्य चारों के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है।
इस पौधे का जन्म भारत में नहीं हुआ। इसका मूल निवास मेक्सिको, मध्य अमेरिका और दक्षिणी अमेरिका के कुछ भाग हैं। वहाँ यह प्राकृतिक रूप से उगने वाला पौधा है और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा है।
यह इतनी तेजी से कैसे फैलती है?
यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता और सबसे बड़ा खतरा है।
एक पौधा लगभग 15,000-25,000 बीज पैदा कर सकता है। इसके बीज कई वर्षों तक मिट्टी में जीवित रह सकते हैं। हवा, पानी, वाहन, जानवर और मनुष्यों के जूतों तक से ये बीज दूर-दूर तक पहुँच जाते हैं। यह कम पानी और खराब मिट्टी में भी आसानी से उग जाती है। इसी कारण यह कुछ वर्षों में हजारों हेक्टेयर भूमि पर फैल सकती है।
खेती पर इसका प्रभाव?
यह केवल जगह घेरने वाला पौधा नहीं है। यह मिट्टी से पानी और पोषक तत्व तेजी से खींच लेता है, जिससे फसलों की वृद्धि प्रभावित होती है। इतना ही नहीं, यह ऐसे रसायन (Allelochemicals) छोड़ता है जो आसपास के अन्य पौधों के बीजों को अंकुरित होने से रोक सकते हैं। इस प्रक्रिया को Allelopathy कहा जाता है। फलस्वरूप गेहूँ, धान, मक्का, दालें और कई अन्य फसलों की उपज घट सकती है।
पर्यावरण पर प्रभाव?
जहाँ यह फैलती है, वहाँ धीरे-धीरे स्थानीय वनस्पतियाँ समाप्त होने लगती हैं। इससे जैव विविधता घटती है। चरागाह नष्ट होते हैं। कई स्थानीय पौधों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाता है। पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन प्रभावित होता है।
मनुष्यों के स्वास्थ्य पर प्रभाव?
इसके फूलों से निकलने वाला पराग अत्यधिक एलर्जी उत्पन्न करने वाला होता है।
इसके कारण: लगातार छींक आना, नाक बहना, आँखों में जलन, त्वचा पर लाल चकत्ते, खुजली, अस्थमा, और Parthenium Dermatitis जैसी गंभीर एलर्जी हो सकती है। जो लोग रोज़ इसके संपर्क में रहते हैं जैसे किसान, मजदूर या सफाई कर्मचारी उनमें इसका खतरा अधिक होता है।
पशुओं पर प्रभाव?
पशु सामान्यतः इसे नहीं खाते, लेकिन यदि मजबूरी में खा लें तो उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। चरागाहों में इसके फैलने से पशुओं के लिए उपलब्ध चारा भी कम हो जाता है।
भारत को कितना नुकसान होता है?
कृषि उत्पादन में कमी, स्वास्थ्य संबंधी खर्च, पर्यावरणीय क्षति और इसे नियंत्रित करने की लागत इन सबको मिलाकर भारत को हर वर्ष हजारों करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होने का अनुमान लगाया जाता है।
इससे बचाव कैसे करें?
- फूल आने से पहले इसे जड़ सहित उखाड़ें।
- दस्ताने, मास्क और पूरे कपड़े पहनकर ही हटाएँ।
- इसे छूने के बाद हाथ अच्छी तरह धोएँ।
- इसे जलाने से बचें, क्योंकि धुएँ के साथ एलर्जी पैदा करने वाले कण हवा में फैल सकते हैं।
- जहाँ संभव हो, वहाँ स्थानीय घास और पौधे लगाकर इसे दोबारा फैलने से रोका जा सकता है।
एसएस राजामौली लंबे वक्त से अपनी अगली फिल्म 'वाराणसी' में बिजी चल रहे हैं. इस बीच फ्रांस में एक इवेंट के दौरान उन्होंने साफ कर दिया कि 'वाराणसी' एक ही फिल्म होगी. इसे मेकर्स फ्रेंचाइजी में नहीं बना रहे हैं. फिल्म में प्रियंका चोपड़ा, महेश बाबू और पृथ्वीराज सुकुमारन लीड रोल में नजर आने वाले हैं.
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जिस बात का डर था वही हुआ. आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में टीम इंडिया की 2-0 से शर्मनाक हार हुई है. बेलफास्ट के मैदान पर हुए दोनों मैचों में टीम इंडिया के बल्लेबाज पूरी तरह फ्लॉप रहे. पहले मुकाबले में भारत 183 रन चेज नहीं कर सका था और दूसरे मुकाबले में 155 रन बनाने में पसीने छूट गए. दूसरे टी20 आई में 155 रनों का पीछा करते हुए भारत 9 विकेट खोकर 153 रन बना सका और 1 रनों से मैच गंवा दिया. भारत को आखिरी ओवर में जीत के लिए 20 रन चाहिए थे, लेकिन सिर्फ 18 ही बने.
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इंडिया और आयरलैंड के बीच 2 मैचों की टी20 इंटरनेशनल सीरीज की शुरुआत शुक्रवार 26 जून से होने वाली है, लेकिन इससे पहले इन मैचों की टाइमिंग में बदलाव हो गया है। बुधवार की देर रात क्रिकेट आयरलैंड ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि मैच अब अपने निर्धारित समय से एक घंटे पहले शुरू होंगे। पहले इंडिया वर्सेस आयरलैंड टी20 मैचों की शुरुआत लोकल समय के अनुसार दोपहर को ढाई बजे होनी थी, जबकि उस समय भारत में शाम के 7 बज रहे होते, लेकिन अब मैच दोपहर को डेढ़ बजे से शुरू होंगे, उस समय भारत में शाम के 6 बज रहे होंगे।
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आज ज्येष्ठ माह की सबसे पुण्यदायी निर्जला एकादशी है. यह व्रत समस्त एकादशियों का फल देता है, जिसे पांडव पुत्र भीम ने भी रखा था. इस दिन निर्जला उपवास रखकर भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है
पढ़ें पूरी खबर: https://t.co/iGPYid6R4V
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On World Environment Day, President Droupadi Murmu planted Dupahariya (Pentapetes phoenicea), an indigenous flowering plant species in Amrit Udyan, Rashtrapati Bhavan for the Summer Annual edition 2026. About 27 flowering species, such as Aparajita (Clitoria ternatea), Gul-mehndi (Impatiens balsamina), and Rukmini (Ixora acuminata), which are grown in different parts of the country and known by their distinct local names, are being planted.
The initiative aims to promote seasonal biodiversity, preserve Indian ornamental plant wealth, and further enhance the aesthetic and ecological value of the gardens. It will also provide visitors an opportunity to appreciate the diversity of flowering plants traditionally cultivated across different regions of India.
Sun, sand… and a little surprise!
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नीम की तरह दिखने वाला 'बकायन' जिसे चाइनाबेरी के नाम से भी कहा जाता है, प्रकृति का एक अनमोल उपहार है। त्वचा की बीमारियों के इलाज में इसकी पत्तियां, छाल और फल बेहद असरदार माने जाते हैं। बंजर और पथरीली जमीन पर भी आसानी से उगने वाले इस पेड़ की लकड़ी फर्नीचर बनाने के लिए बहुत मजबूत और टिकाऊ होती है।
@mla_hayaghat@IPRDBihar@moefcc
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24 घंटे में रूसी रिफाइनरी का डबल झटका, 35 दिनों के शटडाउन के बाद पेट्रोल ₹5.30, डीजल ₹3 किया महंगा, कहां-कितने बढ़े दाम, आप पर कितना असर?
ईरान युद्ध संकट की वजह से भारत के तेल आयात में मुश्किल आ रही है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने की वजह ने तेल और गैस के कार्गों आसानी से भारत नहीं पहुंच पा रहा है. ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमत बढ़कर 106 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुकी है. सप्लाई में कमी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमत के बावजूद भारतीय तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के दामों स्थिर रखा है. जहां सरकारी तेल कंपनियों ने मई 2022 के बाद से पेट्रोल-डीजल के दाम को स्थिर रखा है, वहीं निजी सेक्टर की तेल रिफाइनरी ने नायरा एनर्जी ने आज, 26 मार्च को पेट्रोल-डीजल के दाम में बढ़ा दिए. पेट्रोल के दाम में 5.30 रुपये प्रति लीटर और डीजल के दाम में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है. नायरा एनर्जी (Nayara Energy) भारत में निजी सेक्टर की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी है. रूस की दिग्गज कंपनी रोसनेफ्ट (Rosneft) के स्वामित्व वाली तेल कंपनी नायरा एनर्जी ने 26 मार्च से पेट्रोल-डीजल के दाम में बढ़ोतरी कर दी है. मिडिल ईस्ट वॉर के बीच रिटेल पेट्रोल-डीजल के दाम में इस बढ़ोतरी का असर अब आम जनता पर पड़ेगा. भारत के करीब 1 लाख से ज्यादा पेट्रोल पंपों में से 6967 पेट्रोल पंप नायरा एनर्जी चलाती है. यानी आज से इन 6967 पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ गए हैं.
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