वनस्पति मारे मति!
अपने मन के रंग का चश्मा लगाकर नहीं आए होते तो शायद अपने चिराग़ तले का काला अंधेरा देख पाते। लोग पूछ रहे हैं इतनी बार जाते क्यों थे क्या इनको भी लगता है कि ये स्पष्टीकरण ‘उल्लेखनीय’ नहीं है। बात न भटकाएं, मुद्दे पर रहें। हिसाब तो देना ही पड़ेगा, यहाँ का भी और अपने वहाँ का भी। बात निकली है तो दूर तलक जाएगी… अभी तो इसमें दीये, तेल, बाती के हिसाब-किताब की बात भी आएगी।
संदीप चौधरी ने गोदी मीडिया पर सर्जिकल स्ट्राइक कर दी 🔥
“पिछले कुछ दिनों से मीडिया ये झूठ फैला रही है कि महिला आरक्षण बिल संसद में गिर गया
जबकि सच्चाई ये है कि ये बिल 2023 में पास हो चुका है और अब कानून बन चुका है”
ऐसा पत्रकार बहुत कम देखने को मिलता है…
देश में ऐसा कानून बनना चाहिए कि चुनाव जीतने के बाद अगर कोई नेता अपने वादे पूरे ना करे ,
तो उसे पांच साल की सजा , 50 लाख का जुर्माना और जीवन भर चुनाव ना लड़ने पर प्रतिबंध लगे ,
अगर आप सहमत हैं तो एक रीट्वीट करके कमेंट में अपनी राय दें।