आज कल ट्विटर पर कुछ लोग दहेज को लेकर ज्ञान दे रहे है कोई खुदकुशी को सही गलत साबित करने में लगा हुआ है तो कोई सारे मुस्लिम समाज को गाली दे रहा है कोई नबी की सुन्नतें गिना रहा है आखिरकार 4 से 5 महीने में सब ठंडा हो जाएगा आयशा आरिफ कौन थे सब भूल जाएंगे फिर अपनी शादी का दिन आएगा तब
इतना खौफ है कि अब NSUI के साथियों को ही उठाकर ले जाया जा रहा है।
इतना खौफ है कि हमारे साथियों को ही उठाकर ले जा रहे हैं।
खौफ है, क्योंकि दिख रहा है दम - NSUI जीत रही है! ✊🏻
सत्या निकेतन में बच्चों की मौत की घटना के बाद सामने आए एक बच्चे की मां के वीडियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन समारोहों को लेकर सवाल खड़े किए हैं...
वीडियो में मां भावुक होकर कहती हैं कि “हमारे बच्चों की चिता की राख ठंडी भी नहीं हुई और मोदी जी धूमधाम से जन्मदिन मना रहे हैं।” यह बयान परिवार के दुख और घटना के बाद उनकी पीड़ा को सामने रखता है....
#satyaniketan #delhinews #pmmodi #childdeath #latestnews
शामली पुलिस चुन-चुन कर उन पत्रकारों, सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ FIR दर्ज कर रही है, जिन्होंने इस मामले में ‘फटकार’ शब्द का इस्तेमाल किया है। क्या ये इत्तेफाक ही है कि वो सभी लोग ‘दूसरे’ हैं? अगर ऐसा नहीं है तो एक ‘हिंदी पत्रकार’ ने भी इसी शब्दावली का इस्तेमाल किया है, लेकिन उस ‘हिंदी पत्रकार’ का नाम FIR में नहीं है।
मैं यह नहीं चाहता कि उस ‘हिंदी पत्रकार’ के खिलाफ भी FIR दर्ज होनी चाहिए। लेकिन @PoliceShamli से यह सवाल ज़रूर है कि जब FIR का आधार ‘फटकार’ ही है तो वही ‘फटकार’ शब्द का इस्तेमाल तो ‘हिंदी पत्रकार’ ने भी किया है। जब मापदंड एक ही है, तो फिर उसमें भेदभाव कैसा? और किसलिए! सवाल यह भी है कि क्या पुलिस संविधान और कानून से ही चल रही है, या ‘ऊपरी आदेश’ से! किसी शायर ने भी क्या खूब कहा है।
मैं पत्थर हूँ मेरे सर पर यही इल्ज़ाम आता है,
कहीं भी आईना टूटे मेरा ही नाम आता है!
मुस्लिम टीचर नौशाद अहमद की गोली मारकर हत्या कर दी, ये न्यूज़ इंटरनेशनल मिडिया दिखा रहा है जबकि ये इंडिया के न्यूज़ चैनल का काम है
लेकिन गोदी मिडिया जलते दीपक दिखाने मे बिजी है
📍 दिल्ली | AIMPLB प्रेस कॉन्फ्रेंस
मुस्लिम महिला पत्रकार से कहा गया
“जाओ, अपना चेहरा दिखाने की इजाज़त अपनी शरिया से लेकर आओ।”
जवाब भी उतना ही साफ़ और बेबाक था
“हमें वैधता के लिए सिर्फ़ अल्लाह की मंज़ूरी चाहिए। अगर उन्हें अपनी पसंद की आज़ादी है, तो इस्लाम ने हमें भी चुनाव की आज़ादी दी है।”
सवाल चेहरे पर था, जवाब ने चुनाव की आज़ादी पर पूरी बात साफ़ कर दी।
🚨🇾🇪🇮🇷 हूती लड़ाकों का दावा:
ईरान के सहयोगी हूती लड़ाकों का कहना है कि वे यमन में इज़राइल समर्थक तत्वों के खिलाफ़ अपनी कार्रवाई को आगे बढ़ा रहे हैं और उन्हें पूरी तरह हटाने का लक्ष्य रखते हैं।
WB मे 252 मदरसो को बंद करने का और करीब 100 अन्य मदरसो को कारण बताओ नोटिस जारी हुआ है
क्या ये बच्चो के भविष्य से खिलवाड़ नही है?
अगर कही नियमो का उल्लंघन है तो कानून के मुताबिक जाँच और सुधार की प्रक्रिया होनी चाहिए,
मदरसो मे पढ़ने वाले बच्चे भी इसी देश के बच्चे है!
#SaveWBMadrasas
📍 उज्जैन, मध्य प्रदेश
खरसोड़खुर्द एक हिंदू महिला के साथ यात्रा कर रहे दो मुस्लिम युवकों को VHP-बजरंग दल से जुड़े लोगों ने रोककर “लव जिहाद” का आरोप लगाया।
आरोप है कि इसके बाद पुलिस ने दोनों युवकों के साथ सार्वजनिक रूप से मारपीट की और उन्हें सरेआम घुमाया गया।
किसी पर आरोप लगना अलग बात है, लेकिन कानून हाथ में लेकर अपमानित करना और सार्वजनिक रूप से हिंसा करना यही कानून का राज है?
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में जिस तथाकथित मीडियाकर्मी ने हंगामा किया है, वो @SureshChavhanke के चैनल में कार्यरत है। @Jour_Nadeem ने उस नफ़रती रिपोर्टर को मौके पर ही Expose कर दिया।
हिंदुत्ववादी कट्टरपंथी #SwatantraBhardwaj का भीम आर्मी प्रमुख और उनके समर्थकों को धमकी देने वाला एक वीडियो वायरल है. लेकिन 17 सितंबर को अंतरिम जमानत पर रिहाई के बाद इसे रिकॉर्ड नहीं किया गया है. देखिए #AltNewsVideoReport#AltNews#FactCheck https://t.co/FOXZpocSgC
वायरल वीडियो ओडिशा का बताया जा रहा है!
बजरंगदल के गुंडो ने एक मुस्लिम युवक पर चोरी का इल्ज़ाम लगाकर उसे बेहरहमी से पीटा।
मौके पर पुलिस मौजूद थी लेकिन आरोपी को बचाने के बजाए गुंडों के सामने पीटने के लिए छोड़ दिया।
फिर बाद में पुलिस वालों ने मुस्लिम युवक के हाथ बांध दिए और मरने के लिए छोड़ दिया।
📍उत्तर प्रदेश
ये कौन है और क्या है 50KG का अभिषेक ठाकुर?
पुलिस की मौजूदगी में मीडिया के सामने खुलेआम कहता नजर आया—
“हर घर में एक बच्चा पैदा करो और उसको बागी बनाओ।”
“तीन-पाँच निपटा दूँगा, बाद में हाहा-तौबा मचेगी।”
“बॉर्डर पर ऐसी तबाही मचाएंगे… तहस-नहस कर देंगे।”
“हम संविधान को मानते हैं, लेकिन तब तक ही मानेंगे जब तक हमारे ऊपर बात नहीं आएगी।”
सवाल सिर्फ अभिषेक ठाकुर के बयानों का नहीं, उन बयानों के सामने खड़ी पुलिस की खामोशी का भी है।
जब संविधान और कानून की बात हो रही हो, तब क्या कानून ऐसे बयानों पर भी अपना काम करेगा?