मुरादनगर क्षेत्र के सैंतली मे हनुमान मंदिर के बराबर में प्रमोद त्यागी द्वारा #अवैध_प्लॉटिंग पर @myogiadityanath जी जवाब दें!
बिना RERA, बिना 143, बिना GDA अप्रूवल धारा 26,27,28 का उल्लंघन कर कॉलोनी काटी गई। @PVVNLHQ ने किस आदेश पर खंभे-तार-कनेक्शन दे दिए?
सबसे बड़ा सवाल: कृषि भूमि पर अवैध प्लॉटों की #रजिस्ट्री किसके आदेश पर हो रही है? स्टाम्प विभाग के पास कौन सा शासनादेश है? @UPGovt @Comm_Meerut @dm_ghaziabad
जनता खून-पसीने की कमाई लगाकर रजिस्ट्री करा लेती है, फिर @gdagzb का बुलडोजर चलता है। गरीब बेघर, बिल्डर मालामाल! ये धोखाधड़ी नहीं तो क्या है?
मांग: बिल्डर पर FIR, मिलीभगत वाले JE/AE, बिजली व रजिस्ट्री अधिकारियों पर कार्रवाई हो। @CMOfficeUP@UPRERAofficial@UPPCLLKO @IgRangeMeerut #Ghaziabad
@gdagzb के द्वारा सील किया शेड, बिल्डरों ने सील तोड़कर फिर खड़ा कर दिया - प्राधिकरण को सीधा ठेंगा! सील लगी थी… फिर शेड तैयार कैसे हो गया?
#गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के जोन-1 में सील किए गए शेड की सील टूटने और उसके बाद निर्माण आगे बढ़ने का मामला गंभीर सवाल खड़े करता है। अगर प्राधिकरण ने #अवैध निर्माण पर सील लगाई थी, तो फिर उसी संपत्ति पर निर्माण कार्य दोबारा कैसे शुरू हुआ और शेड तैयार होने तक जिम्मेदार #अधिकारियों को भनक क्यों नहीं लगी
ये अधिकारी बिल्डर/भूमाफिया को खुला सहारा दे रहे हैं, सिर्फ हाजिरी और #सैलरी के लिए गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में बैठे है?
अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता, अवर अभियंता और संबंधित सुपरवाइजर की निगरानी वाले क्षेत्र में सील के बाद भी निर्माण होना महज लापरवाही है या किसी के संरक्षण का नतीजा—इसकी जांच जरूरी है।
ट्वीट और शिकायत के बाद शिकायत आईडी जारी कर देना आसान है, लेकिन जनता यह जानना चाहती है कि मौके पर वास्तविक कार्रवाई कब होगी? अगर अधिकारी समय रहते निरीक्षण करते और सील की निगरानी करते, तो क्या यह निर्माण इस स्थिति तक पहुंचता?
#बिल्डर निर्माण कर रहा है, सील टूट रही है और अधिकारी खामोश हैं—तो जवाबदेही आखिर किसकी है?
नंद किशोर कलाल जी से सीधा सवाल—जोन-1 में नियमों से बड़ा कौन है? बिल्डर या प्राधिकरण की व्यवस्था?
17-09-2026 के छाया चित्र मौके की स्थिति पर सवाल खड़े कर रहे हैं। पूरे प्रकरण की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की जरूरत है।
#जोन -8 में प्लॉट के नाम पर #पीड़ितों की जिंदगी भर की कमाई पर संकट, शिकायतों के बाद भी GDA की चुप्पी क्यों?
कॉलोनी शिवा गार्डन, बंथला नहर (शनि मंदिर के पास) में कॉलोनाइजर दिनेश मावी पर आसान किश्तों का झांसा देकर प्लॉट बेचने, गलत खसरा-खाता दर्शाने और सरकारी जमीन बेचने के गंभीर आरोप। पीड़ित परिवार GDA VC नन्द किशोर कलाल, DM, तहसील दिवस और मुख्यमंत्री पोर्टल तक शिकायत कर थक चुका है, लेकिन आरोप है कि कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति और गलत रिपोर्ट लगाई जा रही है।
जोन-8 के #जेई व संबंधित अधिकारियों के निरीक्षण पर भी सवाल क्या बिल्डरों के साथ मिलीभगत के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी? खून-पसीने की कमाई से प्लॉट खरीदने वाले परिवार का नुकसान कौन भरवाएगा? पीड़ितों ने अब अधिकारियों के खिलाफ शिकायत अभियान छेड़ दिया है। #न्याय चाहिए, #खानापूर्ति नहीं!
#GDA #Zone8 #Ghaziabad #IllegalColony #GDAAction #जनता_को_न्याय #अधिकारी_जवाब_दो
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@gdagzb जबकि प्रवर्तन जोन-5 में सुपरवाइजर की ड्यूटी भी है।
रात बंगले पर, दिन GDA में—एक कर्मचारी इतनी ड्यूटी कैसे? किस नियम के तहत? क्या यह किसी बड़े घपले की ओर इशारा नहीं? जांच जरूरी है।
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सील का आदेश बेअसर,निर्माण जारी!
@gdagzb को ठेंगा दिखा रहा बिल्डर धारा 14 यूपी नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम1973 भी बेअसर?JE #धनंजय मौर्य की निगरानी में सील के बाद भी काम कैसे जारी है?
अब सवाल आदेश कागज पर या कार्रवाई जमीन पर?
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#सील लगी इमारत, फिर भी निर्माण बेखौफ!
RDC #राजनगर के बी-23, #जोन -3 (SZ304) में @gdagzb ने पूर्व में #सील का आदेश #चस्पा कर क्रॉस का निशान लगाया था। अब आदेश पत्र और क्रॉस दोनों गायब, जबकि बेसमेंट से 5वीं मंजिल तक निर्माण तेजी से आगे बढ़ चुका है। न पर्याप्त साइड सेटबैक, न पार्किंग—फिर किसकी निगरानी में यह निर्माण फल-फूल रहा है?
❓ अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता, अवर अभियंता की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। क्या सील के बाद हुए निर्माण की जिम्मेदारी तय होगी या फिर मामला कागजों में ही दबा रहेगा?
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#GDA #Ghaziabad #RDC #Zone3 #IllegalConstruction #SealedBuilding
गौकशी-गौ तस्करी पर ग्रामीण पुलिस का बड़ा प्रहार!
गौकशी और गौ-तस्करी जैसे गंभीर अपराधों पर लगाम कसने के लिए पुलिस उपायुक्त ग्रामीण के निर्देश पर ग्रामीण जोन के समस्त थानों में विशेष सत्यापन एवं चेकिंग अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान पूर्व में ऐसे अपराधों में संलिप्त रहे अपराधियों की गतिविधियों की जानकारी जुटाने के साथ संदिग्ध व्यक्तियों और स्थानों की भी सघन जांच की गई।
पुलिस की इस कार्रवाई से साफ संदेश है कि गौकशी और गौ-तस्करी करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों पर लगातार नजर और सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
ग्रामीण पुलिस का स्पष्ट संदेश—अपराध करें या अपराधियों को संरक्षण दें, कानून की नजर से कोई बच नहीं पाएगा। 👮♂️🚔
#GhaziabadPolice #RuralZone #गौकशी #गौतस्करी #PoliceAction #ZeroTolerance #Ghaziabad
@Uppolice@myogiadityanath@myogioffice
#सील के बाद भी धड़ल्ले से निर्माण! GDA की सील का खौफ या मिलीभगत का खेल?
#भोपुरा , पंचशील कॉलोनी में तस्वीरें खुद सवाल पूछ रही हैं—जिस निर्माणाधीन इमारत/#होटल पर GDA की सील लगने की बात सामने आई है, वहां सील के बावजूद निर्माण कार्य कैसे जारी है?
आसपास के लोगों का कहना है कि सील लगे लगभग 15 दिन हो चुके हैं, इसके बावजूद निर्माण कार्य लगातार जारी है। जब सील लगने के 15 दिन के भीतर भी निर्माण कार्य नहीं रुका, तो अब तक इस इमारत/होटल का #ध्वस्तीकरण क्यों नहीं किया गया? यह संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
नोटिस, कार्रवाई और सील के बाद भी अगर बिल्डर बेखौफ निर्माण कर रहे है तो GDA के JE , AE, सुपरवाइजर और संबंधित अधिकारियों की निगरानी आखिर कहां है?
क्या सील सिर्फ दिखावे के लिए है? अगर मिलीभगत नहीं है तो सील के बाद निर्माण कराने वाले पर तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं?
#उपाध्यक्ष नन्द किशोर कलाल जी, यह सीधे आपके विभाग की साख का सवाल है।
जांच कराइए—सील के बाद किसकी शह पर काम चला और जिम्मेदार कौन है? साथ ही, नियमों के #उल्लंघन पर अब तक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई क्यों नहीं हुई? जवाब जनता को मिलना चाहिए।
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#Ghaziabad #GDA #Bhopura #PanchsheelColony #IllegalConstruction #सील_के_बाद_निर्माण #GDAAction #GhaziabadNews
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फुंके ट्रांसफॉर्मरों को अलग-अलग जगह रखने का फैसला किसके कहने पर?
कमला नेहरू नगर बिजलीघर में 5 फुंके ट्रांसफॉर्मर पड़े होने की जानकारी है। पी-ब्लॉक समेत अन्य स्थानों पर भी फुंके ट्रांसफॉर्मर रखे होने की बात सामने आई है। मौके की फोटो और वीडियोग्राफी उपलब्ध है।
सवाल यह है कि खराब ट्रांसफॉर्मरों को समय पर बदलने के बजाय अलग-अलग जगह रखने और चालू ट्रांसफॉर्मरों पर अतिरिक्त लोड डालकर सप्लाई चलाने का इतना बड़ा कदम किस अधिकारी के कहने पर उठाया गया? क्या यह किसी अधिकारी की जानकारी में हुआ या स्थानीय स्तर पर मिलीभगत से?
यदि ट्रांसफॉर्मर खराब होने के बाद भी समय पर नहीं बदले गए, जिससे दूसरे ट्रांसफॉर्मरों पर अतिरिक्त लोड पड़ा, बार-बार फॉल्ट हुए और विभाग को आर्थिक नुकसान हुआ, तो इस नुकसान की भरपाई और जिम्मेदारी किसकी होगी?
JE, SDO, अधिशासी अभियंता, SE और चीफ इंजीनियर से लेकर MD PVVNL तक पूरे मामले की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। साथ ही गाजियाबाद से लेकर लखनऊ स्तर तक स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराई जाए कि कितने ट्रांसफॉर्मर फुंके, कब फुंके, कहां रखे गए और उन्हें समय पर बदला क्यों नहीं गया।
ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा जी से मांग है कि मामले का संज्ञान लेकर जांच के निर्देश दें। जनता के पैसे और विभागीय संपत्ति के नुकसान पर पर्दा नहीं, जवाबदेही चाहिए।
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