@gdagzb के द्वारा सील किया शेड, बिल्डरों ने सील तोड़कर फिर खड़ा कर दिया - प्राधिकरण को सीधा ठेंगा! सील लगी थी… फिर शेड तैयार कैसे हो गया?
#गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के जोन-1 में सील किए गए शेड की सील टूटने और उसके बाद निर्माण आगे बढ़ने का मामला गंभीर सवाल खड़े करता है। अगर प्राधिकरण ने #अवैध निर्माण पर सील लगाई थी, तो फिर उसी संपत्ति पर निर्माण कार्य दोबारा कैसे शुरू हुआ और शेड तैयार होने तक जिम्मेदार #अधिकारियों को भनक क्यों नहीं लगी
ये अधिकारी बिल्डर/भूमाफिया को खुला सहारा दे रहे हैं, सिर्फ हाजिरी और #सैलरी के लिए गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में बैठे है?
अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता, अवर अभियंता और संबंधित सुपरवाइजर की निगरानी वाले क्षेत्र में सील के बाद भी निर्माण होना महज लापरवाही है या किसी के संरक्षण का नतीजा—इसकी जांच जरूरी है।
ट्वीट और शिकायत के बाद शिकायत आईडी जारी कर देना आसान है, लेकिन जनता यह जानना चाहती है कि मौके पर वास्तविक कार्रवाई कब होगी? अगर अधिकारी समय रहते निरीक्षण करते और सील की निगरानी करते, तो क्या यह निर्माण इस स्थिति तक पहुंचता?
#बिल्डर निर्माण कर रहा है, सील टूट रही है और अधिकारी खामोश हैं—तो जवाबदेही आखिर किसकी है?
नंद किशोर कलाल जी से सीधा सवाल—जोन-1 में नियमों से बड़ा कौन है? बिल्डर या प्राधिकरण की व्यवस्था?
17-09-2026 के छाया चित्र मौके की स्थिति पर सवाल खड़े कर रहे हैं। पूरे प्रकरण की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की जरूरत है।
सील का आदेश बेअसर,निर्माण जारी!
@gdagzb को ठेंगा दिखा रहा बिल्डर धारा 14 यूपी नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम1973 भी बेअसर?JE #धनंजय मौर्य की निगरानी में सील के बाद भी काम कैसे जारी है?
अब सवाल आदेश कागज पर या कार्रवाई जमीन पर?
@dm_ghaziabad@CMOfficeUP@UPGovt@GovernorofUp#Zone3
@sonam111349@CMOfficeUP@ChiefSecyUP@UPGovt@dm_ghaziabad@gdagzb@CommissionerMe3 सीलिंग के बाद भी अगर निर्माण जारी है, तो कानून पर सवाल उठना स्वाभाविक है। क्या नियम सभी के लिए समान हैं या प्रभावशाली लोगों के लिए अलग व्यवस्था?
अब निगाहें GDA पर हैं—क्या जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी और अवैध निर्माण पर निष्पक्ष कार्रवाई होगी?
@ashu8088@vikasku43029057@ghaziabadpolice@Uppolice@dm_ghaziabad@dgpup@CMOfficeUP चौकी की ये तस्वीर सिर्फ लापरवाही नहीं,बल्कि पुलिस व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर बड़ा सवाल है।अगर चौकी पर तैनात पुलिसकर्मी ही नदारद हैं, तो आम जनता की सुरक्षा और त्वरित मदद के दावों का आधार क्या है?खाली पड़ी पुलिस चौकी बता रही है कि सिस्टम की जवाबदेही कागजों में है,जमीन पर नहीं।
@BharatUpdate_x ऐसे निर्माण भविष्य के लिए खतरा,जनता के लिए दुर्घटनाओं को न्योता देने जैसा है, आखिर किसकी मिली भगत से सीलिंग और बुलडोजर कार्यवाही के बाद भी नहीं रुकता काम