हर #महिला तक पहुंचे सुरक्षा का संदेश, #पुलिस के साथ मजबूत हो विश्वास
महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण को लेकर गाजियाबाद पुलिस की सराहनीय पहल। #MVF सम्मेलन के जरिए महिलाओं को अपनी बात रखने, #समस्याएं साझा करने और समाधान से जुड़ने का मंच मिला। महिलाओं की आवाज को सम्मान और सुरक्षा देने की दिशा में मजबूत कदम।
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मुरादनगर क्षेत्र के सैंतली मे हनुमान मंदिर के बराबर में प्रमोद त्यागी द्वारा #अवैध_प्लॉटिंग पर @myogiadityanath जी जवाब दें!
बिना RERA, बिना 143, बिना GDA अप्रूवल धारा 26,27,28 का उल्लंघन कर कॉलोनी काटी गई। @PVVNLHQ ने किस आदेश पर खंभे-तार-कनेक्शन दे दिए?
सबसे बड़ा सवाल: कृषि भूमि पर अवैध प्लॉटों की #रजिस्ट्री किसके आदेश पर हो रही है? स्टाम्प विभाग के पास कौन सा शासनादेश है? @UPGovt @Comm_Meerut @dm_ghaziabad
जनता खून-पसीने की कमाई लगाकर रजिस्ट्री करा लेती है, फिर @gdagzb का बुलडोजर चलता है। गरीब बेघर, बिल्डर मालामाल! ये धोखाधड़ी नहीं तो क्या है?
मांग: बिल्डर पर FIR, मिलीभगत वाले JE/AE, बिजली व रजिस्ट्री अधिकारियों पर कार्रवाई हो। @CMOfficeUP@UPRERAofficial@UPPCLLKO @IgRangeMeerut #Ghaziabad
Greater Noida news🚨
ग्रेटर नोएडा के थाना बादलपुर क्षेत्र से पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है।
मामला कल रात 11:00 बजे ग्राम खेड़ा धर्मपुरा का है, जहां दो पक्षों - धर्मेंद्र शर्मा पुत्र रमेश शर्मा और हिमांशु शर्मा पुत्र देव पाल शर्मा के बीच विवाद हो गया। मौके पर डायल 112 पहुंची और दोनों पक्षों को पकड़कर थाना बादलपुर ले आई। लेकिन यहां से कहानी बदल गई। पीड़ित पक्ष के परिजनों का गंभीर आरोप है कि SHO थाना बादलपुर ने दूसरे पक्ष से रुपया लेकर हिमांशु शर्मा को छोड़ दिया और धर्मेंद्र शर्मा को जेल भेज दिया। जब धर्मेंद्र के माता-पिता SHO से मिलने थाने पहुंचे, तो वहां दूसरे पक्ष के लोग पहले से बैठे थे। परिजनों का आरोप है कि SHO ने उनकी एक नहीं सुनी, उल्टा उन्हें डरा-धमकाकर जेल भेजने की धमकी देकर थान��� से भगा दिया।
अब सवाल उठता है कि क्या बादलपुर थाने में न्याय पैसे से बिक रहा है?
पीड़ित परिवार ने माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
अब देखना होगा कि इस मामले में पुलिस के आला अधिकारी क्या एक्शन लेते हैं।
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@sonam111349@gdagzb Officers are involved for illegal construction. Issuing grievance ticket number, sealing property and allowing construction is a regular practice in GDA.
@ashu8088 डॉक्टर पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए आम जनता को धोखे में रखना और पीड़िता को इतनी बड़ी बीमारी होने के बावजूद भी नजरअंदाज करना यह बहुत बड़ी लापरवाही है
त्योहारों से पहले नंदग्राम में पुलिस की पैदल गश्त, अतिक्रमण हटवाया
गाजियाबाद। आगामी त्योहारों को लेकर एसीपी जियाउद्दीन अहमद के नेतृत्व में नंदग्राम ��ुलिस ने बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में पैदल गश्त की। इस दौरान सड़क किनारे अतिक्रमण हटवाने के साथ दुकानदारों और लोगों को जागरूक किया गया। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेकर शांति बनाए रखने का संदेश दिया।
#गाजियाबाद में इलाज पर #गंभीर सवाल!
सीने की गांठ का बिना पर्याप्त जांच इलाज, ₹50 हजार खर्च के बाद दूसरे अस्पताल में थर्ड स्टेज #कैंसर की प���ष्टि का दावा! #विजयनगर निवासी रिचा शर्मा ने डॉक्टर पर लापरवाही और थाने में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। क्या निष्पक्ष जांच होगी, पीड़िता को न्याय मिलेगा?
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@gdagzb के द्वारा सील किया शेड, बिल्डरों ने सील तोड़कर फिर खड़ा कर दिया - प्राधिकरण को सीधा ठेंगा! सील लगी थी… फिर शेड तैयार कैसे हो गया?
#गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के जोन-1 में सील किए गए शेड की सील टूटने और उसके बाद निर्माण आगे बढ़ने का मामला गंभीर सवाल खड़े करता है। अगर प्राधिकरण ने #अवैध निर्माण पर सील लगाई थी, तो फिर उसी संपत्ति पर निर्माण कार्य दोबारा कैसे शुरू हुआ और शेड तैयार होने तक जिम्मेदार #अधिकारियों को भनक क्यों नहीं लगी
ये अधिकारी बिल्डर/भूमाफिया को खुला सहारा दे रहे हैं, सिर्फ हाजिरी और #सैलरी के लिए गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में बैठे है?
अधिशा��ी अभियंता, सहायक अभियंता, अवर अभियंता और संबंधित सुपरवाइजर की निगरानी वाले क्षेत्र में सील के बाद भी निर्माण होना महज लापरवाही है या किसी के संरक्षण का नतीजा—इसकी जांच जरूरी है।
ट्वीट और शिकायत के बाद शिकायत आईडी जारी कर देना आसान है, लेकिन जनता यह जानना चाहती है कि मौके पर वास्तविक कार्रवाई कब होगी? अगर अधिकारी समय रहते निरीक्षण करते और सील की निगरानी करते, तो क्या यह निर्माण इस ��्थिति तक पहुंचता?
#बिल्डर निर्माण कर रहा है, सील टूट रही है और अधिकारी खामोश हैं—तो जवाबदेही आखिर किसकी है?
नंद किशोर कलाल जी से सीधा सवाल—जोन-1 में नियमों से बड़ा कौन है? बिल्डर या प्राधिकरण की व्यवस्था?
17-09-2026 के छाया चित्र मौके की स्थिति पर सवाल खड़े कर रहे हैं। पूरे प्रकरण की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की जरूरत है।
मान्यवर पिछले 2साल से शिकायतकर्ता शिकायत करके परेशान हो चुका हैं लेकिन गाजियाबाद विकास प्राधिकरण GDA पर पर कोई फर्क नही पड़ रहा ना आज तक जमीनी अस्तर पर कोई कार्यवाही की गई बस कागजों में कार्यवाही होती रही जिस बीच अवैध कॉलोनाइजर के द्वारा कॉलोनी में मकान निर्माण एवं बिजली ट्रांसफार्मर भी लगवा लिया गया बिजली विभाग को गुमराह करके एवं अवैध कमर्शियल 3 भवन का निर्माण भी पूर्ण हो गया लेकिन जीडीए को कुछ पता ही नहीं चला क्या ये संभव ह�� सकता हैं क्या या फिर मसला कुछ और....?है।
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