एक बात समझ लीजिए, 70 फीसदी सवर्ण भाजपा की गुलामी से बाहर निकल चुका है 30 फीसदी सवर्ण वही भाजपा की गुलामी कर रहा है जिसके घर का चूल्हा भाजपा से जल रहा है।
और जानकारी के लिए बता दूं मेरा घर न भाजपा से चलता है न कांग्रेस से और हां न पेआउट से जो लोग यहां मुझसे व्यक्तिगत जीवन में जैसे @himanshumi29 और @TiwariRBL01 जैसे लोग जुड़े हैं वह जानते हैं, मैं सामान्य वर्ग की बात करता हूं समाज की आवाज इसीलिए उठाता हूं ताकि आने वाली पीढ़ियों के पूछने पर उन्हें बता सकूं कि मैंने तुम्हारे भविष्य के लिए क्या किया।
ओडिसा का CM हो या किसी अन्य राज्य का
अपने फायदे के लिए हिंदुओं की लाशो पर राजनीति करते है,
झूठे वादे और हिंदुत्व की बड़ी बड़ी बातें करके हिंदुओं से वोट लेते है
तथा मुल्ला, मार्क्सिस्ट और मिशनरी के आगे बिछे रहते है
इनकी कथनी और करनी में अंतर है,
दुष्टों को शर्म भी नहीं आती।
IIT Bombay Faculty stands in solidarity with Prof Suryanarayan Doolla.
Great, atleast they have spine.
They all should actually resign from IIT, if any action is taken against Prof Doolla.
Because then the campus is not a place for intellectuals like them anyways.
तहसीन पूनावाला ने टीम भारत के साथ IIT बॉम्बे मामले में प्रोफेसर का साथ दिया।
उन्होंने साफ कहा कि यह जातिगत भेदभाव का मामला नहीं है। छात्र को नकल करते पकड़ा गया था, इसलिए जातिगत भेदभाव का आरोप गलत है।
उन्होंने छात्र की मौत पर परिवार के प्रति सहानुभूति जताई, लेकिन निर्दोष प्रोफेसर को झूठे आरोपों पर सजा देने का विरोध किया।
कोई माने या न माने,
लेकिन 17 सितंबर प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर ‘दीया जलाने’ का आह्वान एक तरह से जनता की मौजूदा मनोदशा को परखने की कसौटी था।
और तस्वीर उम्मीद के मुताबिक नहीं रही...
सबसे बड़ा बदलाव शायद यही है कि मोदी जी की लोकप्रियता और भाजपा के प्रति लोगों की वैचारिक प्रतिबद्धता अब एक ही चीज नहीं रह गई है।
एक दौर था जब मोदी का नाम ही समर्थकों में ऊर्जा भर देता था। उनका हर आह्वान अभियान बन जाता था, हर नारा जनता का अपना नारा बन जाता था।
नोटबंदी से लेकर तमाम कठिन फैसलों तक...
लोगों ने असुविधाएं सहीं, आलोचनाएं झेलीं, रिश्तों तक में बहस की, लेकिन व्यक्तिगत निष्ठा कमजोर नहीं पड़ी।
आज वही तस्वीर बदलती दिखाई दे रही है।
भाजपा के साथ खड़े रहने वाले लोगों की संख्या और मोदी के प्रति पहले जैसी भावनात्मक निष्ठा, इन दोनों को अब एक ही तराजू में तौलना शायद सही नहीं होगा।
और इसे केवल किसी एक जाति या वर्ग की नाराजगी कहकर खारिज करना भी आसान रास्ता होगा। अगर मामला सिर्फ एक वर्ग तक सीमित होता, तो बाकी समाज में उस आह्वान का वैसा ही उत्साह दिखाई देता, जैसा पहले देखने को मिलता था।
सवाल सिर्फ एक दिन दीया जला या नहीं जला, इसका नहीं है। सवाल उस भावनात्मक जुड़ाव का है, जो कभी मोदी जी और जनता के बीच दिखाई देता था।
भाजपा नेतृत्व के लिए शायद अब समय आ गया है कि वह केवल संगठन की मजबूती नहीं, बल्कि जनता के बदलते मनोविज्ञान को भी गंभीरता से पढ़े और भविष्य के नेतृत्व को लेकर समय रहते व्यापक मंथन करे।
क्योंकि राजनीति में सबसे बड़ा खतरा विरोधी की आवाज नहीं होती, सबसे बड़ा संकेत तब मिलता है, जब अपने ही लोग चुप हो जाएं।
आप मेरी बातों से सहमत हैं या असहमत कमेंट में बताइए 🙏
मुझे एक डिजिटल बैठक की चर्चा याद आ गई जिसमे इस बात पर बहस हो रही थी कि वी पी सिंह देश के सबसे बेकार प्रधान मंत्री थे। उन्होंने कुर्सी के लिए मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू किया और देश में राजनीतिक जातिवाद को हवा दी। यदि ऐसा है तो क्या आज मोदी अपनी कुर्सी बचाने, अपनी राजनीति को चमकाने की खातिर जातिवाद को हवा नहीं दे रहे? 240 का भूत सिर पे ऐसा सवार हुआ कि असली चेहरा सामने आ गया।
नड्डा जी एक विचार हैं। यहाँ जो हैं, वो नड्डा जी नहीं उनकी मोम की प्रतिमा है। नड्डा जी के घर पर बिस्कुट और चाय अच्छी मिलती है, अतः लोग खिंचे चले आते हैं।
नड्डा जी लोगों को डेट देते हैं, और फिर (यदि आप तिलचट्टे नहीं) मुकर जाते हैं। नड्डा जी को लगता है कि ऐसी योजना से वो सवर्णों का आंदोलन छिन्न-भिन्न कर देंगे। सत्य यह है कि जो आंदोलन @RHAreforms कर रहा है, उसमें ऐसी सरकारी बकलोली के लिए कंटिंजेन्सी पहले से तैयार है।
नड्डा जी आप लगे रहो, हम आपको विरोध में हैं। आपको हवा नहीं लगेगी कि आगे क्या होने वाला है।
भाजपा की नीतियाँ और मोदी एक्ट का बवासीर अब 91% आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट में डिफेंड करने से ले कर IIT के प्रोफ़ेसरों को एक विषाक्त माहौल में जीने को विवश कर रहा है।
@janardanspeaks The good thing about gay men is that they not only take themselves out of the competition, but they also take other men with them. win win for straight men.
सागर की पुलिस ने ओकेन्द्र राणा को गिरफ्तार कर लिया, पर सागर की पुलिस और मध्य प्रदेश की पुलिस की औकात नहीं है कि दामोदर यादव को गिरफ्तार कर सके।
आए दिन दामोदर यादव ब्राह्मणों को, क्षत्रियों को और सनातन धर्म के देवी-देवताओं को गाली देता रहता है, पर मुख्यमंत्री मोहन यादव की शहजादी होने के कारण दामोदर यादव को खुली छूट है।
देख लो ब्राह्मणों, सवर्णों! भाजपा की तानाशाही और करो, गुलाम बनो, खाओ गाली और खूब करो गुलामी।
#OkendraRana #DamodarYadav #Brahmin #Kshatriya #SavarnSamaj #SanatanDharma #MadhyaPradesh #Sagar #Trending
नेता को नेता ही रखा होता तो ठीक था, साहब को तो भगवान ही बना दिया! अब साहब बोलें वही वेदवाक्य, साहब करें वही लीला और भक्त उनकी आरती उतारें।
भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम मानने वाली संस्कृति में किसी नेता को भगवान का दर्जा देना कैसी विडंबना है।
भगवान राम ने कभी अपनी पूजा नहीं माँगी, मर्यादा और धर्म का रास्ता दिखाया। यहाँ तो हाल ये है कि नेता की हर बात पर सिर झुकाओ, हर गलती में गुण खोजो और हर सवाल को भक्ति के नाम पर दबा दो।
भगवान राम के नाम पर राजनीति करने से कोई भगवान राम नहीं बन जाता, और किसी नेता की अंधभक्ति रामभक्ति नहीं होती।
और इसे भक्ति नहीं कहते… ये तो अपनी अक़्ल गिरवी रखकर की गई मानसिक गुलामी है।
@ajeetbharti
@scribe9104 आज हिन्दुओं को जाती में बांटने वाला एक ही नीलमानव हैं और जिसका मकसद हिन्दुओं की रक्षा करने वाले एक मात्र नेता को up चुनाव हराना हैं , ताकि उसका खुद का सिंहासन बचा रहे