कल राज्य सरकार द्वारा बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर बाहरी व्यक्तियों का राजकीय विद्यालयों में बिना संस्था प्रधान की अनुमति के प्रवेश पर रोक लगाने का महत्वपूर���ण आदेश जारी कर छात्र छात्राओं को राहत प्रदान की गई है। इसी संदर्भ में आज शाम को 6 बजे से 9 बजे तक ट्विटर पर
#सुरक्षित_विद्यालय_सशक्त_बच्चे
टैगलाइन के साथ ट्वीट्स किए जाएंगे। सभी शिक्षक बंधुओं से निवेदन है इसमें सहयोग कर इस अभियान को बल प्रदान कर अनुग्रहित करें।
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, राजकीय विद्यालयों में ‘मुख्यमंत्री शिक्षित राजस्थान अभियान’ (एमएसआरए) संचालित है। इस तरह का व्यापक अभियान प्रारंभ करने वाला राजस्थान देश में पहला राज्य है। मुख्यमंत्री ने 29 मार्च 2025 को राजस्थान दिवस साप्ताहिक कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित समारोह में, शिक्षा विभाग के इस महत्वाकांक्षी अभियान का शुभारंभ किया था।
#आपणो_अग्रणी_राजस्थान
अनुशासन :: हरिशंकर परसाई
एक अध्यापक था। वह सरकारी नौकरी में था। मास्टर की पत्नी बीमार थी। अस्पताल में थी। तभी उसके तबादले का ऑर्डर हो गया। शिक्षा विभाग के बड़े साहब उसी मुहल्ले में रहते थे। उसका बंगला मास्टर के घर से दिखता ��ा। वह उनके बंगले के सामने से निकलता तो उन्हें सादर 'नमस्ते' कर लेता। मास्टर ने सोचा, साहब से कहूँ तो वे फिलहाल मेरा तबादला रोक देंगे
वह साहब के घर गया। बरामदे में बड़े साहब ने पूछा - क्यों? क्या बात है?
- साहब एक प्रार्थना है।
- बोलो
- मेरी पत्नी अस्पताल में भर्ती है। वह बहुत बीमार है।
- तो?
- मेरा तबादले का ऑर्डर हो गया है।
- तो?
- सर, कृपा कर फिलहाल मेरा तबादला कैंसिल कर दें।
साहब नाराज हो गए। बोले - तुम्हें अनुशासन के नियम मालूम हैं? तुम सीधे मुझसे मिलने क्यों आ गए? तुम्हे आवेदन करना चाहिए थ्रू प्रॉपर चैनल। तुम्हे अपने हैडमास्टर की लिखित अनुमति के साथ मुझसे मिलना चाहिए। जाओ, तबादला कैंसिल नहीं होगा। तुम्हें अनुशासन भंग करने के लिये डाँट भी पड़ेगी।
मास्टर को डाँट पड़ी। आइंदा साहब से सीधे नहीं मिलने की चेतावनी मिली। मास्टर ने दो महीने की छुट्टी ले ली।
एक शाम साहब के घर में आग लग गयी। आसपा�� के ल���ग आग बुझा रहे थे।
मास्टर बरामदे में खड़े हुए देख रहे थे। आग बुझ गयी। अधिक नुकसान नहीं हुआ।
दूसरे दिन मास्टर साहब निकले तो साहब फाटक पर खड़े थे। साहब में कहा - मास्टर साहब, कल शाम को मेरे घर में आग लगी थी तो तुम खड़े-खड़े देखते रहे। बुझाने नहीं आये।
मास्टर ने नम्रता से कहा - सर, मैं मजबूर था। हेडमास्टर साहब बाहर गए हैं। उनकी लिखित अनुमति के बिना कैसे आता? आपकी आग बुझाने के लिये थ्रू प्रॉपर चैनल आना चाहिए!
हरिशंकर परसाई
@RajCMO माननीय @BhajanlalBjp जी माध्यमिक शिक्षा विभाग में स्टाफ़िंग पैटर्न 2015 से लागू नहीं हुआ है अतः इस सत्र में इसे लागू कर पदों का सृजन करवावें ।
@RajCMO
आइंस्टीन के ड्राइवर ने एक बार आइंस्टीन से कहा- सर, मैंने हर बैठक में आपके द्वारा दिए गए हर भाषण को याद किया है।
आइंस्टीन हैरान!
उन्होंने कहा- ठीक है, अगले आयोजक मुझे नहीं ��ानते। आप मेरे स्थान पर वहां बोलिए और मैं ड्राइवर बनूंगा।
ऐसा ही हुआ, बैठक में अगले दिन ड्राइवर मंच पर चढ़ गया और भाषण देने लगा..
उपस्थित विद्वानों ने जोर-शोर से तालियां बजाईं।
उस समय एक प्रोफेसर ने ड्राइवर से पूछा- सर, क्या आप उस सापेक्षता की परिभाषा को फिर से समझा सकते हैं?
असली आइंस्टीन ने देखा बड़ा खतरा!
इस बार वाहन चालक पकड़ा जाएगा। लेकिन ड्राइवर का जवाब सुनकर वे हैरान रह गए।
ड्राइवर न��� जवाब दिया - क्या यह आसान बात आपके दिमाग में नहीं आई?
मेरे ड्राइवर से पूछिए,--वह आपको समझाएगा।
नोट : यदि आप बुद्धिमान लोगों के साथ चलते हैं, तो आप भी बुद्धिमान बनेंगे और मूर्खों के साथ ही बैठेंगे तो आपका मानसिक तथा बुद्धिमता का स्तर और सोच भी उन्हीं की भांति हो जाएगी
कर्मचारी साथियों से बातचीत व ट्विटर पर उनकी प्रतिक्रियाओं द्वारा कर्मचारियों के महत्वपूर्ण मुद्दे जो हल होने चाहिए।
1. अनुसूची 5 के तहत पूर्ववर्ती सरकार द्वारा की गई वेतन कटौती निरस्त हो।
2. लंबित समस्त बकाया डीपीसी हो।
(अ) प्राचार्य डीपीसी के लिए शिथिलन पत्रावली शीघ्र पारित होकर डीपीसी की जाए।
(ब) उप प्राचार्य डीपीसी पश्चात कोर्ट स्थगन के संबंध में विभाग पैरवी करें जिससे शीघ्र डीपीसी हो। तत्पश्चात खाली पदों पर व्याख्याता से उप प्राचार्य डीपीसी हो।
(स) वरिष्ठ अध्यापक से व्याख्याता पद पर तीन साल से लंबित डीपीसी हो।
3. विभागों में लंबित समस्त कार्मिकों के स्थायीकर��� शीघ्रता से हो।
4. तृतीय श्रेणी अध्यापकों के तबादले से रोक हटाकर उन्हें स्थानांतरण का मौका मिले।
5. कार्मिकों के 9-18-27 वर्ष ACP व प्रमोशन में नेक्स्ट प्रमोशनल पद की बजट घोषणा का आदेश शीघ्र जारी किया जाये।
6. प्रोबेशन अवधि में कर्मचारियों को पूरा वेतन दिया जाए।
7. कर्मचारियों के लिए Employees Protection Act (EPA) (कर्मचारी सुरक्षा अधिनियम) लागू किया जाए।
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