#मीराबाई_को_मोक्ष_दिया
कृष्ण भक्त मीरा बाई के गुरु क्यों कहलाये रविदास जी
जब मीराबाई जी ने परमात्मा कबीर जी का सत्संग सुना और समझा तो नाम दीक्षा लेने की सोची तो परमात्मा कबीर जी ने उनकी परीक्षा लेने के लिए उन्हें रविदास जी से दीक्षा लेने को कहा। कबीर जी के आदेशानुसार रविदास जी
सतगुरु सतकबीर ने #मीराबाई_को_मोक्ष_दिया
मीराबाई की ज़हर से रक्षा की कबीर परमात्मा ने।
मीराबाई को मारण चाले, ज़हर का प्याला प्या रे।
पीवत ही अमृत हो लाग्या, हो गया सर्द दिया रे।।
मन तू पावैगा अपना किया रे, भोगेगा अपना किया रे।।
कबीर परमात्मा ने मीराबाई को संत रविदास से
सतगुरु सतकबीर ने #मीराबाई_को_मोक्ष_दिया
God protects the true devotee and one such person was Mirabai who benefited from God through her true devotion.
#मीराबाई_को_मोक्ष_दिया
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जब मीराबाई के देवर ने देखा कि मीराबाई तो ज़हर से भी नहीं मरी तो उसने मीराबाई की मां को बोला कि आप समझाओ कि सत्संग में नहीं जाए। मीराबाई की मां ने समझाया कि बेटी हम ठाकुर और वो चमार जाति (कबीर परमात्मा जुलाहा थे, रविदास जी चमार जाति से थे) के हैं।