माननीय शिक्षा मंत्री @madandilawar जी बाड़मेर जिले के शिक्षकों के शिक्षकों का वेतन नियमितीकरण और स्थायीकरण की मांग संगठन @RESMA_7 करता है ।
जल्द राहत प्रदान करवाए।
अध्यापक भर्ती 2022 में चयनित बाड़मेर जिले के समस्त तृतीय श्रेणी शिक्षक पिछले 2 वर्ष 4 माह से अधिक समय से राजकीय सेवा में कार्यरत हैं, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज तक उनका स्थायीकरण नहीं किया गया।
जबकि राज्य सरकार के नियमों के अनुसार 2 वर्ष की प्रोबेशन अवधि पूर्ण होते ही स्थायीकरण एवं वेतन नियमितीकरण किया जाना चाहिए, इसके बावजूद बाड़मेर जिले के शिक्षकों को आज भी फिक्स पे जैसे अल्प वेतन में सेवा देने को मजबूर किया जा रहा है। इस देरी का सीधा असर शिक्षकों के आर्थिक, मानसिक और पारिवारिक जीवन पर पड़ रहा है।
राज्य सरकार से मेरी स्पष्ट मांग है कि इस भर्ती में चयनित समस्त तृतीय श्रेणी शिक्षकों का तत्काल स्थायीकरण एवं वेतन नियमितीकरण किया जाए। साथ ही अनावश्यक विलंब को समाप्त करते हुए इस संबंध में स्पष्ट एवं समयबद्ध आदेश जारी किए जाएँ, ताकि चयनित शिक्षकों को शीघ्र राहत मिल सके। #Barmer
राजस्थान में शिक्षा की अलख जगाने वाले हजारों नवनियुक्त शिक्षकों के भविष्य पर आज अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। मामला बाड़मेर जिले का है, जहां करीब 2000 तृतीय श्रेणी शिक्षकों के साथ हो रहे प्रशासनिक भेदभाव ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर आकर्षित किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में निकाली गई 62,000 रीट भर्ती के तहत बाड़मेर में नियुक्त इन शिक्षकों का सितंबर 2025 में प्रोबेशन पीरियड सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। हैरानी की बात यह है कि जहां प्रदेश के अन्य सभी जिलों में स्थायीकरण की प्रक्रिया पूरी कर शिक्षकों को पूर्ण वेतन दिया जा रहा है, वहीं बाड़मेर के ये शिक्षक पिछले 4 महीनों से फाइलों के दफ्तरों में अटकने के कारण मानसिक तनाव झेल रहे हैं। प्रोबेशन पूरा होने के बावजूद इन शिक्षकों को आज भी 70% वेतन कटौती का सामना करना पड़ रहा है। महंगाई के इस दौर में आधे से भी कम वेतन पर परिवार का पालन-पोषण करना इन शिक्षकों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। जब भर्ती एक है, परीक्षा एक है और प्रोबेशन खत्म होने की अवधि भी एक है, तो फिर बाड़मेर जिले के साथ यह 'सौतेला व्यवहार' क्यों? यह संविधान के समानता के अधिकार का सीधा उल्लंघन है। जब शिक्षक खुद आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव में होगा, तो वह छात्रों के भविष्य के साथ न्याय कैसे कर पाएगा? प्रशासनिक देरी का खामियाजा अंततः बाड़मेर की शिक्षा व्यवस्था को भुगतना पड़ रहा है। अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से पुरजोर आग्रह किया है कि इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करें। बाड़मेर जिला प्रशासन को कड़े निर्देश दिए जाएं ताकि इन 2000 शिक्षकों का स्थायीकरण बिना किसी और देरी के सुनिश्चित हो सके और उन्हें उनका बकाया समेत पूरा वेतन मिल सके। यह केवल 2000 शिक्षकों का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह उन 2000 परिवारों के भविष्य का सवाल है। अब देखना यह होगा कि पूर्व मुख्यमंत्री के इस हस्तक्षेप के बाद भजनलाल सरकार कितनी सक्रियता दिखाती है और इन शिक्षकों को न्याय कब तक मिल पाता है।
तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थायीकरण को आज चार माह पूरे हो चुके हैं, मगर अब तक न तो स्थायीकरण के आदेश जारी हुए हैं और न ही वेतन का नियमितीकरण किया गया है। वेतन के लगभग 70% हिस्से से वांछित शिक्षक वर्ग मानसिक एवं आर्थिक रूप से गंभीर परेशानियों का सामना कर रहा है।
राज्य सरकार एवं शिक्षा मंत्री @madandilawar को इन समस्याओं के समाधान पर तत्काल ध्यान देना चाहिए। जब पूरा कार्य लिया जा रहा है तो वेतन भी पूरा मिलना चाहिए। अध्यापक ऐसा वर्ग है जो प्रत्येक आर्थिक निर्णय पूरी योजना के साथ करता है, ऐसे में समय पर बढ़ा हुआ वेतन नहीं मिलने से उनकी समस्त योजनाएं धराशायी हो जाती हैं।
@srdara29 सोच बड़ी हो, तो परिणाम भी बड़े होते हैं।
हर विभाग में सक्रियता, हर योजना में गति—
गुड़ामालानी और धोरीमन्ना के सर्वांगीण विकास का भरोसा।
नाम ही काफ़ी है—
के. के. विश्नोई जी।
#केके_विश्नोई
गुड़ामालानी का वर्तमान मजबूत है।
भविष्य और भी उज्ज्वल दिखता है।
इसके पीछे हमारे लाड़ले विधायक श्री के. के. विश्नोई जी (राज्यमंत्री, राजस्थान सरकार) का अथक प्रयास है।
#केके_विश्नोई
शिक्षक भर्ती 2023 में लगे थर्ड ग्रेड शिक्षकों का प्रोबेशन समय सितंबर में ही पूरा हो चूका है
बाड़मेर को छोड़कर पुरे राजस्थान में स्थाईकरण हो चूका है फिर बाड़मेर में रहने की इतनी बड़ी सजा क्यों?
#स्थाईकरण_आदेश_जारी_करो#शिक्षक_भर्ती_2023