प्रिय मित्रों आप सभी को राधे राधे शुभ प्रभात आज हमारे बेटे आदर्श का जन्मदिन है आप सभी से आशीर्वाद की कामना करता हूं। आदर्श बेटे को जन्मदिन कि बहुत बहुत बधाई एवं ढेर सारी शुभकामनाएं 💐💐🎂🎊
#happybarthday#mundialdefútbol2026
सवाल सिर्फ @Uppolice कांस्टेबल शुक्ला या हक के लिए संघर्ष कर रहे CAPF कैडर अधिकारियों का नहीं है..
मुद्दा है POWER यानी शक्ति पर एकछत्र राज का, खासकर उस देश में जहां तानाशाह मुगलों और अंग्रेजो से आजादी दिलाने के लिए लगभग हर घर से कोई न कोई बलिदान हुआ है.
अपने मां-बाप के सभी दुलारे है.. अपनी पत्नी और बच्चों की नजर में वो सभी HERO हैं..
और हां इतिहास गवाह है आक्रोश को कुचलना भारत की भूमि पर कभी भी समाधान नहीं दे पाया है..
जय हिंद
#capf #UPPInNews @gpsinghips
अहमदाबाद पुलिस को लू से बचने के लिए मिली "कूलिंग जैकेट"
क्या तपते राजस्थान में ट्रैफिक पुलिस को भी यह सुविधा मिलेगी ?
@RajCMO@PoliceRajasthan@1stIndiaNews
माननीय @CMOfficeUP एवं @HMOIndia,
भीषण गर्मी में दिन-रात कर्तव्य पर तैनात @Uppolice के जवानों के स्वास्थ्य हेतु मेरा विनम्र निवेदन है:
✅ विशेष गर्मी भत्ता घोषित हो।
✅ बीट/गश्ती दल को कूलबॉक्स, इलेक्ट्रॉल व मट्ठा मिले।
✅ हल्की सूती वर्दी व धूप के चश्मे उपलब्ध कराए जाएं।
✅ थानों पर साप्ताहिक निशुल्क मेडिकल जांच हो।
आशा है सरकार इन जनकल्याणकारी सुझावों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर तत्काल आदेश जारी करेगी।
प्रार्थी:
एडवोकेट विवेक कुमार पांडेय
#UPPolice #CMYogi #UPGovt #Humanity #PublicInterest #PoliceWelfare @Uppolice@yogi_adityanath@dgpup
उत्तर प्रदेश पुलिस @Uppolice के जवानों हेतु
"ग्रीष्मकालीन सुरक्षा कवच" की मांग !
माननीय मुख्यमंत्री एवं गृह विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार,
भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान के बीच हमारे पुलिस के जवान दिन-रात सड़कों पर मुस्तैद रहकर अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।
उनके स्वास्थ्य और कार्यक्षमता को ध्यान में रखते हुए,एडवोकेट विवेक कुमार पांडेय द्वारा सरकार से निम्नलिखित विशेष व्यवस्थाओं की तत्काल मांग की जाती है:
प्रमुख सुझाव एवं मांगें:
1.विशेष गर्मी भत्ता: फील्ड पर तैनात जवानों के लिए अतिरिक्त गर्मी भत्ता घोषित किया जाए।
2.बीट व गश्ती दल हेतु आवश्यक किट: हर बीट चौकी और गश्ती दल को 10 लीटर का कूलबॉक्स, इलेक्ट्रॉल (ORS), और मट्ठा/दही के पैकेट नियमित रूप से उपलब्ध कराए जाएं।
3.वर्दी में बदलाव: जवानों को गर्मी से राहत देने के लिए हल्की सूती वर्दी और उच्च गुणवत्ता वाले धूप के चश्मे प्रदान किए जाएं।
4.दोपहर का लंच: ड्यूटी पर मौजूद जवानों के लिए पौष्टिक दोपहर के भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित हो।
5.साप्ताहिक मेडिकल चेकअप: हर थाने पर जवानों के लिए निशुल्क साप्ताहिक स्वास्थ्य जांच शिविर लगाए जाएं ताकि डिहाइड्रेशन या हीट स्ट्रोक से उन्हें बचाया जा सके।
जब हमारे जवान सुरक्षित और स्वस्थ रहेंगे,
तभी हमारा प्रदेश सुरक्षित रहेगा।
प्रशासन से विनम्र निवेदन है कि इन मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर तत्काल आदेश जारी करें।
निवेदक:
एडवोकेट विवेक कुमार पांडेय
• @yogi_adityanath (मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश)
• @Uppolice (उत्तर प्रदेश पुलिस)
• @CMOfficeUP (मुख्यमंत्री कार्यालय)
• @DGPUP (डीजीपी उत्तर प्रदेश)
• @HMOIndia (गृह मंत्रालय)
#UPPolice
• #PoliceWelfare
• #UPGovt
• #CMYogi
• #HeatwaveSafety
• #गर्मी_भत्ता_घोषित_हो
• #जवानों_का_सम्मान
• #AdvocateVivekPandey
• #MissionSuraksha
हमें पूर्ण विश्वास है कि CM भजनलाल शर्मा व कानून मंत्री जोगाराम पटेल राजस्थान पुलिस की लंबित मांगों पर शीघ्र न्याय करेंगे।
मुख्य मांगें: ACP ग्रेड पे ₹3600, न्यूनतम योग्यता स्नातक+कंप्यूटर, व समयबद्ध पदोन्नति।
#पुलिस_डिमांड@RajCMO@BhajanlalBjp@Bhajanlalofc@JogarampatelMLA
सीधी माँग !
यूपी की प्रशासनिक व्यवस्था में ग्रेड 1 के अधिकारियों को गृहजनपद के 500 किमी तक पोस्टिंग नहीं मिलनी चाहिए !
वैसे भी इतनी सुविधाएं हैं की घर की क्या ही ज़िम्मदारी उठानी होगी ?
#Transfer#Posting
सिपाही को भी चैन की नींद चाहिए –
बॉर्डर स्कीम हटाओ, परिवार से मिलाओ!
काम 24 घंटे, सुविधा शून्य?
अब नहीं चलेगा "अराजपत्रित एसोसिएशन" का गठन हो!
वेतन विसंगति दूर करो
पुलिस का मनोबल ऊंचा करो!
पुलिस सुधार और पुलिसकर्मियों के कल्याण हेतु प्रमुख बिंदु:
बॉर्डर स्कीम का खात्मा:
पुलिसकर्मियों को उनके गृह जनपद के निकटवर्ती जिलों में तैनाती दी जाए ताकि वे अपने परिवार की सामाजिक दायित्वों की जिम्मेदारी निभा सकें।
अराजपत्रित पुलिस एसोसिएशन का गठन: अपनी जायज मांगों को शासन तक पहुंचाने के लिए कांस्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर रैंक तक के लिए एक लोकतांत्रिक मंच (Association) अनिवार्य हो।
8 घंटे की शिफ्ट (Duty Hours):
'24 घंटे ऑन ड्यूटी' के मानसिक बोझ को खत्म कर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार 8 या अधिकतम 12 घंटे की शिफ्ट लागू हो।
वेतन विसंगति एवं भत्ते:
2000 ग्रेड पे की विसंगतियों को दूर कर पुलिसकर्मियों के रिस्क अलाउंस और आवास भत्ते (HRA) में सम्मानजनक वृद्धि हो।
रैंकर एग्जाम की बहाली:
समयबद्ध पदोन्नति के लिए पारदर्शी 'रैंकर एग्जाम' की व्यवस्था फिर से शुरू की जाए ताकि योग्य सिपाहियों को आगे बढ़ने का मौका मिले।
साप्ताहिक अवकाश:
प्रत्येक पुलिसकर्मी के लिए सप्ताह में एक दिन का अनिवार्य अवकाश (Weekly Off) सुनिश्चित किया जाए।
पुलिसकर्मियों को सजा जल्दी व सुविधाऐं देर से क्यों मिलती है,जानने के लिए पूरी वीडियो गौर से देखें !
@Uppolice के भाइयों को मिले उनका अधिकार और सम्मान !
@samajwadiparty@yadavakhilesh
Zee राजस्थान के कार्यक्रम "सम्मान साहस का" में राजस्थान के माननीय कानून मंत्री श्री @JogarampatelMLA जी ने पुलिस के लिए बहुत ही अच्छी बात कही और पुलिस का दर्द भी साझा किया, जो सुनने में बहुत मार्मिक और भावुक कर देने वाला है और भारत में सबसे बेस्ट पुलिस राजस्थान की हो ऐसा सपना भी देखा जो अच्छा भी है और गर्व का विषय भी है।
अब मैं माननीय कानून मंत्री जी से कहना चाहूंगा कि माननीय कोरे सपने और कोरी कल्पनाओं से राजस्थान पुलिस भारत की बेस्ट पुलिस नहीं बन सकती है, उसके लिए पुलिस और पुलिस कर्मचारियों को मजबूत करने की जरूरत होगी क्योंकि मजबूत नींव पर ही आलीशान महल खड़ा हो सकता है कमजोर नींव पर नहीं।
बेस्ट पुलिस के लिए राजस्थान पुलिस में:-
जनसंख्या के अनुपात में पुलिस कर्मचारियों की नफरी होनी चाहिए।
राजस्थान पुलिस में थानों में नए आधुनिक तकनीकी से लैस उच्च क्वालिटी के वाहन होने चाहिए
पुलिस कांस्टेबल का उसकी ड्यूटी के अनुसार वेतन होना चाहिए।
पटवारी VDO कृषि पर्यवेक्षक की तरह कांस्टेबल को भी प्रथम एसीपी ग्रेड पे 3600 मिलनी चाहिए
पुलिस कांस्टेबल का समय पर प्रमोशन होना चाहिए।
एक समय था जब पटवारी, VDO, कृषि पर्यवेक्षक और कांस्टेबल एक ही ग्रेड पे पर भर्ती होते थे और समान वेतन पाते थे लेकिन आज इन चारों पदों में से 9 साल बाद कांस्टेबल पिछड़ जाता है क्योंकि 9 साल बाद पटवारी VDO कृषि पर्यवेक्षक प्रथम एसीपी ग्रेड पे 3600 लेते हैं और कांस्टेबल ग्रेड पे 2800 पर ही रह जाता है। यह कांस्टेबल के साथ घोर अन्याय हो रहा है और वो चुपचाप सह रहा है क्योंकि सबके पास अपनी बात कहने और रखने के लिए कोई न कोई संघ, महासंघ या संगठन है लेकिन कांस्टेबल के पास ऐसा कोई विकल्प नहीं है जिसके माध्यम से वो अपना दर्द बयान कर सकता है। सच कहूं तो पुलिस कांस्टेबल अपनी बात, अपना दर्द कहते हुए भी डरता है कि यदि मैंने किसी को अपना दुःख दर्द बता दिया तो न जाने मेरे साथ क्या होगा?
जिस तरह आपने कहा कि यदि पुलिस गांव में जाए तो वहां के बच्चे पुलिस से डरे नहीं ऐसा ही यहां भी होना चाहिए कि कांस्टेबल अपनी बात कहते हुए डरे नहीं।
माननीय कानून मंत्री श्री जोगाराम जी पटेल साहब आपसे विनम्र मार्मिक निवेदन है कि आप माननीय मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp जी और गृह राज्य मंत्री श्री @jawaharbedam जी इस विषय पर चर्चा कर पुलिस कर्मचारियों के साथ हो रहे अन्याय को साझा कर इन वेतन विसंगतियों को दूर करवाने की कृपा करना।
लाखों कार्मिकों की दुआएं मिलेंगी और युगों युगों तक याद किए जाओगे।
खाकी की पीड़ा को कोई समझने वाला नहीं है। सबको केवल ड्यूटी से मतलब है। हमारा जवान खाना खाया है या नहीं 14 घंटे लगातार ड्यूटी पर मुस्तैद है कोई पूछने वाला नहीं है पूछता है भारत
राजस्थान पुलिस: दो पाटों के बीच पिसता खाकी का वजूद
आज राजस्थान में पुलिस के सामने सबसे बड़ा संकट यह है कि वह 'वर्दी का इकबाल' कायम रखे या 'सियासी दबाव' के आगे घुटने टेके। स्थिति कुछ ऐसी बन गई है:
1. राजनीतिक हस्तक्षेप: जब डंडा 'हुक्म' का गुलाम हो जाए
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि पुलिस की लाठी अब अपराध पर कम और सियासी इशारों पर ज्यादा नाचती है। जब तबादले और पोस्टिंग मेरिट के बजाय 'नेताओं की सिफारिश' पर होने लगें, तो फील्ड में तैनात अधिकारी का मनोबल गिरना स्वाभाविक है। अपराधी को सलाखों के पीछे भेजने से पहले जब ऊपर से फोन आ जाए, तो कानून का खौफ अपराधी के मन से खत्म होकर खाकी के मन में घर कर जाता है।
2. नफरी का टोटा: एक कंधा और सौ जिम्मेदारियां
राजस्थान पुलिस में पुलिस फोर्स की भारी कमी एक कड़वा सच है। जहाँ एक सिपाही को 8 घंटे ड्यूटी करनी चाहिए, वह 16-18 घंटे काम कर रहा है। तनाव और थकान से जूझता जवान अपनी सुरक्षा करेगा या आमजन की? जब थानों में पद खाली पड़े हों और आबादी बढ़ती जा रही हो, तो रिस्पांस टाइम कम होना और अपराधियों का बेखौफ होना लाजिमी है।
⚠️ द ट्विस्ट: असली दर्द जो कोई नहीं देखता
हम अक्सर कहते हैं कि "कानून का खौफ नजर क्यों नहीं आ रहा?" लेकिन इस सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि आज का अपराधी हाई-टेक है और पुलिस की फाइलें आज भी पुराने ढर्रे पर धूल फांक रही हैं।
ट्विस्ट यह है कि: जनता पुलिस से सुरक्षा तो चाहती है, लेकिन जब वही पुलिस सख्ती करती है, तो 'मानवाधिकार' और 'राजनीतिक रसूख' के नाम पर उसी पुलिस को कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है। यानी पुलिस अगर सख्त हो तो विलेन और नरम हो तो निकम्मी।
निचोड़: जब तक पुलिस को 'पॉलिटिकल टूल' के बजाय एक 'स्वतंत्र प्रोफेशनल फोर्स' नहीं बनाया जाएगा और खाली पदों को भरकर जवानों को मानसिक सुकून नहीं दिया जाएगा, तब तक सड़कों पर कानून का नहीं, बल्कि रसूखदारों का ही खौफ दिखेगा।
#arvindchotia
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@raj_indianews
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बात सही लगे तो फॉलो करे
@Vpsingh1234511
राजस्थान पुलिस: दो पाटों के बीच पिसता खाकी का वजूद
आज राजस्थान में पुलिस के सामने सबसे बड़ा संकट यह है कि वह 'वर्दी का इकबाल' कायम रखे या 'सियासी दबाव' के आगे घुटने टेके। स्थिति कुछ ऐसी बन गई है:
1. राजनीतिक हस्तक्षेप: जब डंडा 'हुक्म' का गुलाम हो जाए
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि पुलिस की लाठी अब अपराध पर कम और सियासी इशारों पर ज्यादा नाचती है। जब तबादले और पोस्टिंग मेरिट के बजाय 'नेताओं की सिफारिश' पर होने लगें, तो फील्ड में तैनात अधिकारी का मनोबल गिरना स्वाभाविक है। अपराधी को सलाखों के पीछे भेजने से पहले जब ऊपर से फोन आ जाए, तो कानून का खौफ अपराधी के मन से खत्म होकर खाकी के मन में घर कर जाता है।
2. नफरी का टोटा: एक कंधा और सौ जिम्मेदारियां
राजस्थान पुलिस में पुलिस फोर्स की भारी कमी एक कड़वा सच है। जहाँ एक सिपाही को 8 घंटे ड्यूटी करनी चाहिए, वह 16-18 घंटे काम कर रहा है। तनाव और थकान से जूझता जवान अपनी सुरक्षा करेगा या आमजन की? जब थानों में पद खाली पड़े हों और आबादी बढ़ती जा रही हो, तो रिस्पांस टाइम कम होना और अपराधियों का बेखौफ होना लाजिमी है।
⚠️ द ट्विस्ट: असली दर्द जो कोई नहीं देखता
हम अक्सर कहते हैं कि "कानून का खौफ नजर क्यों नहीं आ रहा?" लेकिन इस सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि आज का अपराधी हाई-टेक है और पुलिस की फाइलें आज भी पुराने ढर्रे पर धूल फांक रही हैं।
ट्विस्ट यह है कि: जनता पुलिस से सुरक्षा तो चाहती है, लेकिन जब वही पुलिस सख्ती करती है, तो 'मानवाधिकार' और 'राजनीतिक रसूख' के नाम पर उसी पुलिस को कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है। यानी पुलिस अगर सख्त हो तो विलेन और नरम हो तो निकम्मी।
निचोड़: जब तक पुलिस को 'पॉलिटिकल टूल' के बजाय एक 'स्वतंत्र प्रोफेशनल फोर्स' नहीं बनाया जाएगा और खाली पदों को भरकर जवानों को मानसिक सुकून नहीं दिया जाएगा, तब तक सड़कों पर कानून का नहीं, बल्कि रसूखदारों का ही खौफ दिखेगा।
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