जीवन के 27 साल की यात्रा जैसे कुछ नहीं थी पर वो साल जब तुमसे बिछड़ गया मैं अनंत काल के लिए उसके बाद मैंने भय को जाना, मेरी युवावस्था समाप्त हो गई, मेरे बाल सफेद, हाथों में थरथराहट होने लगी, आवाज़ धीमी हो गई और स्वप्न शून्य.. तुम्हारे जाते ही मैं बूढ़ा हो गया...!!!
कुछ स्त्रीयां पुरुष को विकल्प बनाती है, प्रेम के छलावे से, स्त्री के प्रति आकर्षण को पुरुष प्रेम समझता है, जिसका लाभ उठाती है वो स्त्री अपने स्वार्थ पूर्ति के लिए, पर आकर्षण का मोह का समय होता है और उसके टूटते ही पुरुष बिखर जाता है पर स्त्री दूसरे विकल्प को चुन लेती है...!!!
मैं खोजता आया हूं, "एक कंधा, रोने को, खोजता रहा मन, मुझे समझने को, एक खाली पड़ा हृदय मेरा प्रेम समेटने को और एक ऐसा साथी जो मेरे दुःख को सोख ले पर मैं भूल गया था कि दुःख, आंसू, विचार आपके निजी होते हैं...!!!