बचपन में देर रात तक जागने पर माँ डाँटती थी,मगर वो सख्ती अब कहीं गुम सी है।आँखों के नीचे गड्ढे उसे भी स्पष्ट दिखते हैं मगर वो जानती है कि यह गड्ढे नहीं मंज़िल तक पहुँचने का रास्ता हैं।
सच मानिए दुनिया बोल कर जो नहीं कर पाती वो काम उसका मौन कर देता है।
यह पीड़ादायक है किंतु अत्यावश्यक था कि, दान में मिली वस्तुओं का ऐसे सार्वजनिक प्रदर्शन करना पड़ा। दान में मिली सभी 2800 वस्तुओं का रजिस्टर भी गोविंद देव जी ने दिखाया। वैसे एक बात मैं बताऊँ, दान का हिसाब मांगने वाला हिन्दू होने को समझ ही नहीं पा रहा। यह किसी व्यवसाय में लाभ-हानि के तहत धन या सामग्री नहीं दी जाती। मंदिर में दान करने वाला उसे ईश्वर को समर्पित करता है। उसमें उसे संदेह नहीं होता। फिर भी न्यास ने संदेह दूर किया, यह अच्छा है।
स्वतंत्र पत्रकार @atsshow7 जी का आंखों देखा वर्णन। करोड़ों हिन्दू राममन्दिर जा चुके हैं, किसी ने देखे ऐसे 400 गार्ड्स? यह गार्ड्स मंदिर के कार्यों के लिए हैं जो 67 एकड़ से अधिक के परिसर में हर जगह तैनात रहते हैं जनता की सेवा में, जैसे हर मंदिर में सेवादार होते हैं व्यवस्था बनाने वाले। पर सूत्र के नाम पर कुछ भी परोसकर देश की आस्था पर ही प्रहार किया जा रहा है।
ब्रो ने संस्कृत की शिक्षा ली होगी
ब्रो ने दीक्षा भी ली होगी
ब्रो ईश्वर के मार्ग पर चल पड़ा है
ब्रो ने मांस मदिरा को हाथ नहीं लगाया होगा
ब्रो ने बीड़ी सिगरेट नहीं फूंकी होगी
ब्रो ने तंबाकू भी नहीं खाया होगा
ब्रो को LSD या चरस का भी ज्ञान नहीं है
ब्रो समलैंगिक भी नहीं है
ब्रो जुआरी भी नहीं है
ब्रो राजनीति भी नहीं कर रहा है
ब्रो लड़कीबाजी भी नहीं कर रहा है
ब्रो धर्म के मार्ग पर चल रहा है
ब्रो सुबह जल्दी उठ कर पूजा पाठ कर रहा है
ब्रो अपने पिता को पथ प्रदर्शक के रूप में देख रहा है
ब्रो बड़ा ही सुशील है
ब्रो दूसरों को ज्ञान की अच्छी बातें बताएगा
ब्रो सेवाभाव रखता है
ब्रो पर मुझे गर्व है
ब्रो सनातन का ध्वजवाहक है
ब्रो ज़िंदाबाद
ब्रो की जय हो
ब्रो के साथ हम सभी का आशीर्वाद है
ब्रो से चिढ़ने वाले अपनी नशेड़ी गंजेडी जुआरी औलादों की चिंता पहले करें ।
जनहित में जारी..!
@DN_Thakur_Ji
Talking this way about a child is totally unacceptable and shameful. . Madam Shukla has been heavily altering her own pics, and I absolutely think it’s her choice
But speaking of a toddler in this manner shows a whole different level of shamelessness.
. Honestly, I don’t like to comment on people’s looks,but people need to refrain from commenting on other people’s kids too!
Kids are always off limits- especially if they are not on social media.
Criticize the grand father (Suniel Shetty) for bringing the toddler into his political discourses- never the child!’
Somehow, feminists think no rules of ethics apply to them.
And we are here to teach them right from wrong! Even if it requires us to go against our own principles of not mocking your need for validation.
Their sense of entitlement to say or do anything ends right here!
I think she should delete her post. And I will delete mine ✌️☮️
बस इतना पूछा था के राम मंदिर की तरह सबरीमाला मंदिर चोरी में कितनी SIT जांच और FIR हुई
एंकर महोदया तू, तुम, बेवक़ूफ़ पर उतर आईं और डिबेट के बाद भी गुंडई और बदतमीज़ी ना जाने क्या क्या कहा मैं हंस कर चुप इसलिए रहा क्यूँकि महिला हैं
मेरी भाषा अगर एक महिला के प्रति ऐसी हो जाती तो देश में मेरे प्रति क्या होता ??
डिबेट में पिच सबकी हाई होती है तो क्या ऑन कैमरा और ऑफ़ कैमरा दोनों में गाली गलौज पर उतर आयेगा कोई ??
और ये मैडम Serial Offender हैं
राम मंदिर में चंदा चोरी को लेकर हर रामभक्त आहत है.
राम के नाम पर लूट मचाने वालों को जेल होनी चाहिये और बेहद कड़ी सजा भी.
लेकिन सच ये भी है कि राम मंदिर को लेकर ज़मीन से अदालत तक की लड़ाई VHP/RSS/BJP ने ही लड़ी है.
VHP के अध्यक्ष रहे अशोक सिंघल जी ने तो अपनी संपत्ति इसके लिये दान कर दी. आजीवन राम मंदिर की लड़ाई लड़ते रहे. आडवाणी जी की रथ यात्रा नहीं होती तो राम को लेकर इतना बड़ा आंदोलन ना होता.
हम सब ये भूल जाते हैं कि राम के नाम पर BJP की तीन सरकारें बिना किसी गलती के काँग्रेस ने बर्खास्त की थीं.
सच ये है कि ये तीनों संगठन नहीं होते तो आज राम का इतना भव्य मंदिर भी नहीं होता. मोदी सरकार नहीं होती तो भगवान राम “ उसी फटे हुए टेंट में रह रहे होते जहां पर बरसों से रामलला को रहना पड़ा था’’ बचपन में कई बार अयोध्या जब जाना होता था तो देख कर मन दुखी होता कि हिंदू धर्म को मानने वाले करोड़ों में हैं और उनके आराध्य टपकते हुए टेंट में रहते हैं. आज ये देखकर हिंदू धर्म के लोग गर्व कर सकते हैं कि उनके आराध्य का बेहद भव्य मंदिर बना है और ये VHP/RSS/BJP के बग़ैर असंभव था.
नीचे वसुंधरा थी ऊपर था अम्बर
शुचिता का मोटा थे ओढ़े अडम्बर
अपनी मिनिस्ट्री है अपनी सब्सिडी
हम भी उगा लेते थे कुछ क्यूकंबर
अपनी कलम से ही होना था निर्णय
कॉन्फलिक्ट ऑफ इंट्रेस्ट भाया भयंकर
खाने ना देना था ना खाना था खीरा
बम्पर फसल लेकिन, मौका था बम्पर
अपने ही लोगों ने लीक कर दी भाया
लगता है अपना भी लग गया नम्बर
सचिन टाइप बैटिंग चल रही थी बढ़िया,
निन्यानवे का चक्कर निन्यानबे का चक्कर
🚨 DEBUNKED! Silver bricks donated to the Ram Mandir have been found SAFE in Bank Lockers 🤡
— All claims about missing bricks & no receipts proven FALSE. (India Today)
Trust should return these bricks to donaters peddling agenda🙏🏽
.@vijaitrivedi जी - पूर्णता असत्य
- सोमनाथ ट्रस्ट और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र—दोनों का मूल नेचर पब्लिक रिलिजियस ट्रस्ट का है।
- दोनों कोई प्राइवेट फैमिली ट्रस्ट नहीं हैं। दोनों के डोनेशन पर 80G के तहत deduction उपलब्ध है—राम जन्मभूमि ट्रस्ट के लिए CBDT Notification No. 24/2020 और सोमनाथ मंदिर के लिए Notification No. 29/2022 है।
- इसलिए यह कहना कि सोमनाथ का नेचर अलग है और राम मंदिर ट्रस्ट कोई अलग, अपारदर्शी व्यवस्था है—यह तथ्यात्मक रूप से गलत है।”
- Income Tax law में charitable या religious trust, अगर 80G exemption claim करता है और threshold cross करता है, तो उसे External Independent Chartered Accountant से audit report—Form 10B/10BB—file करनी होती है। इसलिए ‘external audit नहीं होता’ कहना भी गलत है।”
- दोनों public worship/religious institutions हैं, दोनों 80G notified हैं, और religious/charitable trusts के लिए Income Tax compliance में audit और filing की व्यवस्था है।
- जो लोग भी राम मंदिर मूवमेंट से और राम मंदिर बनने से नाखुश थे, वो सत्य-असत्य परोसकर चैनलों पर बढ़िया कन्फ्यूजन क्रिएट कर रहे हैं और इस भ्रम की अग्नि में अपनी आहुति दे रहे हैं।
@manakgupta@news24tvchannel
कल्पना कीजिए कि, देश में भ्रष्टाचार या फिर किसी भी तरह की गड़बड़ी पर कैसे बात होती है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार के रियल एस्टेट के सौदों पर इंडियन एक्सप्रेस ने तथ्यात्मक रिपोर्ट की। इस पर सच सामने आए, यही सामान्य प्रतिक्रिया होगी और विपक्षी भाजपा के ऊपर हमलावर होकर मोहन यादव का त्यागपत्र माँगेंगे, लेकिन अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया है कि, मोहन यादव को हटाने की साजिश रची जा रही है। इसी से अनुमान लगाइए कि, भारत में किसी भी तरह की अनियमितता या भ्रष्टाचार का मामला गंभीर राजनीतिक मुद्दा क्यों नहीं बनता।
शराब माफिया, इन्फ्रास्ट्रक्चर किंग पिन, घोटालेबाज मुख्यमंत्री और सिंडिकेटर पूर्व मुख्यमंत्री..
यह सब कुछ एक 'पॉलीटिकल थ्रिलर' जैसा है. राजनीति, व्यापार, पुरानी दोस्ती, आयकर विभाग की रेड और अखबार के पन्नों पर छपी एक #मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री #मोहन_यादव के घोटालों की सनसनीखेज खबर...
इस तीखे अखबार-धमाके के पीछे की जो कहानी सियासी सिंडिकेट्स में तैर रही है, उसके किरदार बेहद रसूखदार हैं.
सियासी गलियारों में चर्चा है कि मोहन यादव के घोटालों के खुलासे के पीछे मध्यप्रदेश के एक पूर्व मुख्यमंत्री #S हैं.
जिन्होंने अपने एक इंफ्रास्ट्रक्चर किंगपिन उद्योगपति दोस्त #D , #JA और #AA का #कर्ज़ चुकाने के लिए वर्तमान मुख्यमंत्री पर हमला किया है क्योंकि ये मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री के बिल्डर उद्योगपति दोस्त और मध्यप्रदेश स्थित एक बहुत बड़ी डिस्टिलरी के मालिक दो भाई #JA और #AA को चौतरफा परेशान कर रहे थे.
राजनीति में कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता, लेकिन जब दोस्ती पुरानी हो, तो वह सत्ता के गलियारों में बड़े समीकरण बनाती है...
राज्य के नए नेतृत्व द्वारा, वर्ष 2025 में उद्योगपति "D " के ठिकानों पर हुई बड़ी रेड भी पुराने सिंडिकेट के समीकरण को तोड़ने की कवायद थी.
मध्य प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में यह जगजाहिर है कि पूर्व मुख्यमंत्री "S" और इंफ्रास्ट्रक्चर किंगपिन "D " के बीच छात्र जीवन से गहरा दोस्ताना रहा है.
जब S मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने, तो D का ग्राफ स्थानीय ठेकेदार से उठकर देश की सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों में शामिल हो गया. मध्य प्रदेश के अधिकांश बड़े हाईवे, भोपाल-इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट के हिस्से, फ्लाईओवर और टेंडर इसी कंपनी के खाते में गए.जिसे विपक्ष द्वारा 'क्रॉनी कैपिटलिज्म' का नाम दिया गया था.
दूसरी तरफ शराब माफिया वाले बंधु द्वय "J" और "A " पर भी यादव सरकार ने शिकंजा कस दिया. जून 2024 में इस डिस्टिलरीज के रायसेन स्थित प्लांट पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के छापे के बाद यह ग्रुप भारी विवादों में आ गया, जहां बड़ी संख्या में बाल मजदूर पाए गए थे.
भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के समय इस डिस्टिलरी अपने पैर पसारे, बाद में कांग्रेस के दिग्विजय सिंह शासनकाल में भी उनका दबदबा रहा,और शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में यह बिजनेस खूब फला- फूला. मध्य प्रदेश के आबकारी क्षेत्र में इनका एकाधिकार सा रहा है.
दिसंबर 2023 में जब जब मोहन यादव को मध्य प्रदेश की कमान सौंपी गई, तो केवल चेहरा नहीं बदला, बल्कि सत्ता का 'पावर सेंटर' भी बदल गया.
मोहन यादव ने आते ही राज्य के पुराने ठेकेदारों और कॉरपोरेट दिग्गजों के एकाधिकार को तोड़ना शुरू किया. टेंडर्स के नियम बदले गए और अपने नए चेहरों को तरजीह देने लगे. पुराने रसूखदार उद्योगपतियों और उनसे जुड़े नेटवर्क्स पर आयकर विभाग के छापे पड़ने लगे.
राजनीति में जब सीधे मोर्चे पर लड़ना मुमकिन नहीं होता, तो 'दस्तावेजों' को हथियार बनाया जाता है.
वर्तमान मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार के उज्जैन लैंड डील्स के बेहद गोपनीय सरकारी और खसरा रिकॉर्ड्स जिस बारीकी से मीडिया तक पहुंचे हैं, वह बिना किसी 'इनसाइडर' के मुमकिन ही नहीं था.
अखबार के पन्नों पर छपी यह रिपोर्ट महज जमीनों का ब्योरा नहीं है, बल्कि सत्ता, कॉरपोरेट और पुरानी वफादारियों के बीच छिड़ी एक 'अघोषित जंग' का नतीजा है. यह मध्य प्रदेश की सियासत के दो बड़े गुटों के बीच का 'ओपन वॉरफेयर' है.
यह इशारा है कि पुराना सिंडिकेट आसानी से मैदान छोड़ने को तैयार नहीं है.....
@CMMadhyaPradesh
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवारजनों द्वारा सैकड़ों एकड़ ज़मीनें खरीदी गई हैं। मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद तथा उससे पहले मंत्री पद पर रहते हुए इन ज़मीनों में वृद्धि हुई है।
अब कहा जा रहा है कि उनका तो पुराना ज़मीनों के ख़रीद-फ़रोख़्त का धंधा है, तो क्या मुख्यमंत्री के परिवार वालों द्वारा ज़मीनें खरीदना अपराध है?
जी, बिल्कुल अपराध नहीं है। किंतु दिक्कत तब खड़ी होती है, जब मालूम होता है कि शहर की किन चयनित ज़मीनों को खरीदा गया, जिनकी कीमतें भविष्य में आसमान छूने वाली हैं। भविष्य में किन जगहों पर विकास कार्य होंगे और कहाँ से राजमार्ग अथवा हाइवे होकर गुज़रेंगे? इन योजनाओं की गोपनीय जानकारियाँ केवल सरकारों और उनसे जुड़े नीति-निर्माताओं को ही होती हैं। यह विचित्र संयोग है कि ठीक इसी प्रकार की अति-महत्त्वपूर्ण ज़मीनें खरीदी गई हैं, जिनके आसपास आगे चलकर बड़े विकास कार्य होने हैं।
इस कारण यह मामला वाजिब तौर पर प्रश्नों के घेरे में है।
🚨 253 acres.
यही संख्या सबसे ज़्यादा चर्चा में है।
लेकिन इस पूरे विवाद में शायद सबसे महत्वपूर्ण संख्या 253 नहीं है।
May 2023 है।
क्योंकि Ujjain Master Plan 2035 का notification उस महीने जारी हुआ था।
Dr Mohan Yadav 7 महीने बाद, 13 December 2023 को Chief Minister बने।
यहीं से यह पूरी बहस शुरू होती है।
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📅 पहले Timeline समझिए
📍 2019–2020
Major Infrastructure Corridors, DPRs और Planning Documents public domain में आने लगते हैं।
📍 May 2023
Ujjain Master Plan 2035 और Land-Use Framework officially notify होता है।
📍 13 December 2023
Dr Mohan Yadav Chief Minister बनते हैं।
यानी जिस Planning Framework को लेकर सबसे अधिक चर्चा हो रही है, उसका notification मुख्यमंत्री पद संभालने से पहले ही हो चुका था।
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1️⃣ Immediate Family Assets का सच
Reports में CM, उनकी wife और immediate family की Land Holdings का उल्लेख है।
लेकिन ये कोई hidden assets नहीं हैं।
ये Properties Election Commission को दिए गए Official Election Affidavits में पहले से declared हैं।
इसलिए पहला तथ्य यह है कि यह मामला undisclosed assets का नहीं, बल्कि declared assets का है।
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2️⃣ 2021 के बाद acquisitions क्यों बढ़े?
2021 से 2025 के बीच Land Acquisitions में तेज़ी दिखाई देती है।
लेकिन इसी अवधि में पूरे Indore–Ujjain Corridor में बड़ा Real Estate Boom भी आया।
कई Developers ने अपने Land Banks का विस्तार किया।
Siddhivinayak Devcons जैसी Family-linked Ventures Chief Minister बनने से पहले से operational थीं और इसी Market Cycle के दौरान expand हुईं।
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3️⃣ Infrastructure Corridor वाला सवाल
आलोचकों का कहना है कि कुछ भूमि proposed Infrastructure Corridors के पास खरीदी गई।
लेकिन Ujjain क्षेत्र के प्रमुख road projects के DPRs, Notifications और Planning Documents वर्ष 2019–2020 से Public Domain में उपलब्ध थे।
यह एक तथ्य है कि Infrastructure Projects की Planning और Notifications पहले से सार्वजनिक थीं।
यदि किसी ने Non-Public Information का उपयोग किया हो, तो उसके लिए evidence आवश्यक है, केवल assumption नहीं।
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4️⃣ Land Hoarding या Active Development?
उपलब्ध Records संकेत देते हैं कि कई parcels को केवल hold नहीं किया गया।
Joint Development Agreements (JDA) के माध्यम से Township Development और marketable projects भी विकसित किए गए।
कुछ मामलों में external builders के साथ partnerships के माध्यम से projects आगे बढ़ाए गए।
अर्थात मॉडल केवल Land Hoarding का नहीं, बल्कि Active Development का भी था।
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🎯 Bottom Line
इस पूरे मामले में तीन अलग-अलग प्रश्नों को एक साथ नहीं मिलाना चाहिए:
• Asset Ownership
• Conflict of Interest
• Illegality
Public Records ownership स्थापित कर सकते हैं।
Conflict of Interest के allegations के लिए evidence of influence चाहिए।
Illegality के allegations के लिए evidence of wrongdoing चाहिए।
सार्वजनिक बहस में आरोप महत्वपूर्ण होते हैं।
लेकिन निष्कर्ष हमेशा Documents, Timelines और Records से निकलते हैं।
यही किसी भी Fact-Check की पहली शर्त है।
#MohanYadav #MadhyaPradesh #Ujjain #FactCheck #PublicRecords
एमपी के मुख्यमंत्री मोहन यादव के बारे में ये बातें कई बार कही गईं. पर इस रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि मोहन यादव और उनके परिवार ने कैसे उज्जैन में जमीन में इन्वेस्टमेंट किया है
24 घंटे बिजली चाहिए, लेकिन सोलर, डैम और न्यूक्लियर सब बंद।
रेयर-अर्थ सप्लाई चेन चाहिए, लेकिन खनन का नाम सुनते ही धरना शुरू।
इनकी सोच है—
“आम खाने हैं, मगर पेड़ लगाने नहीं।”
ये जमात ऐसी है।🤣