मुहर्रम का यौम-ए-आशुरा हज़रत इमाम हुसैन और उनके साथियों का सच्चाई और इंसाफ़ के लिए शहादत का अज़ीम मिसाल है।
ज़ुल्म-ओ-सितम के सताए हुए लोगों के लिए इमाम साहब जद्दोजहद की नज़ीर पेश करते हैं। आज हम सभी को इनसे सबक़ लेते हुए मुल्क़ में फैले नफ़रत, ग़ैर बराबरी और तानाशाही के ख़िलाफ़ एकजुट होना चाहिए।
आज आशूरा का शोक दिन, हज़रत इमाम हुसैन की शहादत का दिन, हमें प्रतिकूल परिस्थितियों में भी उत्पीड़न, अत्याचार एवं भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट होना सिखाता है।समाज में करुणा, सहानुभूति एवं निस्वार्थता का सिद्धांत बनाए रखने व ज़माने की यज़ीद के आगे कभी सर ना झुकाने की प्रेरणा हमें कर्बला देती है।