📢Trend Alert📢Tomorrow🤝
20 Oct. Tuesday 4PM
#SaveRaceCourseMasjid
अस्सलामु अलैकुम नाजरीन आप सभी से गुज़ारिश है कि प्रशासन दिल्ली PM हाउस के पास रेस कोर्स मस्जिद को तोड़ने के मंसूबे बना रहा है।
मस्जिद 150 साल पुरानी बताई जा रही है, मस्जिद कमेटी के पास 1933 के सरकार कागज़ात है, 1977 के दिल्ली गैजेट नोटिफिकेशन में भी दर्ज है।
कल शाम 4 बजे हम सब मिलकर #SaveRaceCourseMasjid के साथ मस्जिद के हक मे ट्रेंड ट्वीट करेंगे।
उम्मीद है आप सभी साथ देंगे और इस मुहिम को कामयाब बनाएंगे।
Hashtage:- #SaveRaceCourseMasjid
Team:- @VoiceOfMuslim72
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प्रेमानंद आश्रम से कहाँ गायब हो रहे हैं बच्चे? क्या है पूरा सच?
वृंदावन के केलि कुंज आश्रम से कई बच्चों के गायब होने का रहस्य गहराता जा रहा है। आश्रम के बाहर परेशान माता-पिता अपने बच्चों की तस्वीरें और पोस्टर लेकर रोते-बिलखते नज़र आ रहे हैं। उनका कहना है कि उनके बच्चे आश्रम में आने के बाद कभी घर वापस नहीं लौटे। ये बच्चे आखिर कहाँ जा रहे हैं, किसी को कुछ नहीं पता। हाल ही में आश्रम के एक शिष्य की आत्महत्या ने इन रहस्यों को और भी संदिग्ध बना दिया है।
अब इसकी जांच की मांग तेज हो गई है। एक संत ने बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने को कहा है। उन्होंने सख्त मांग की है कि आश्रम में मौजूद सभी नाबालिग बच्चों की एक लिस्ट बनाई जाए और उन्हें तुरंत उनके माता-पिता के हवाले किया जाए।
मुंबई
राकेश को ब्लड कैंसर है और परिवार में कोई कमाने वाला नहीं मुस्लिम भाई मस्जिद के बाहर चंदा इकट्ठा कर रहे हैं।
जी हम मुसलमान हैं हमे धर्म पूछकर मारा जाता है लेकिन हम मुसलमान हैं हम धर्म पूछकर मदद नहीं करते सलाम इन भाइयों को।
इस्लाम औरतों को कैद रखने का हुक्म नहीं देता, औरत हिजाब करके हर शोभे में जा सकती है।
इस्लाम ने औरतों की इज्जत को तर्ज़ी दी है इसलिए हिजाब का हुक्म दिया।
ऑस्ट्रेलिया में मुस्लिमों से नफरत का मामला कब्रिस्तान में कब्रों की बेअदबी की गई।
ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में मुस्लिम कब्रिस्तान में कई कब्रों के पत्थरों को तोड़ा गया। यह सिर्फ पत्थरों पर हमला नहीं, बल्कि इंसानियत पर हमला है।
मुसलमानों से इतनी नफरत की उनके बुजर्गो की कब्रों के साथ भी इनकी नफरत पहुंच गई।
2025 में इसी कब्रिस्तान में सूअर के सिर और पोर्क फेंकने की घटना भी हुई थी।
पूरी दुनिया में मुस्लिमों से नफरत के अलग अलग मामले आते और मुसलमानों की इबादतगाह, मदरसों मस्जिदों और कब्रिस्तान पर हमले होते हैं और दुनिया सिर्फ तमाशा देख रही है।
इस ऐतिहासिक दिन—2 अक्टूबर, 1187—को सुल्तान सलाहुद्दीन अय्यूबी ने वह कर दिखाया जो नामुमकिन लग रहा था। उन्होंने यरूशलेम में प्रवेश किया और 88 साल के क्रूसेडर शासन के बाद मस्जिद अल-अक्सा को आज़ाद कराया।
लेकिन सिर्फ़ जीत ने ही इतिहास को नहीं बदला; बल्कि यह जीत हासिल करने का तरीका था
मुसलमानों को जनाजा ले जाने से भी रोक दिया गया।
हिंदूवादी संगठन ने कहा इस रास्ते मंदिर बनेगा तो हम जनाजा नहीं निकालने देंगे।
इन लोगों की मानसिकता क्या हो गई है? इस देश का मुसलमान जब कोई वारिस न हो इनका तो इनके अंतिम संस्कार तक कर देता है।
और ये मुसलमानों को जनाजा तक नहीं निकालने देते।