स्वामी दीपांकर जी प्रत्येक हिन्दू से मिलते हैँ तों उसे जगाते हैँ
संत समाज ही धार्मिक सुधार आंदोलन के प्रेरणा बने हैँ
उनके द्वारा ही धर्म सुधार आंदोलन हुए हैँ
@swamidipankar
प्राची जी, घमंड चाहे ज्ञान का हो, धर्म का हो या सत्ता का एक दिन उतरता जर��र है।
जब कोई फर्क ही नहीं पड़ेगा तो काहे दिक्कत हो रही आपको?
यह कुछ कम वोट सत्ताधीशो के सत्ता को दफन कर देंगे।बस इंतजार किजीए कुछ लोगो की राजनीति की कब्र खुद जायेगी।
परिणाम चाहे जो भी हो, बदला तय है
Big:- A complaint file by Adv. @VineetJindal_ against Sanjay Azad and his minor doughter with @CPDelhi and Cyber Cell, Delhi Police for making derogatory remarks against Hindu God and Goddess. Seeking FIR Under section 196,299 of BNS read with IT act.
#DelhiPolice#cjp #Vineetjindal
मेरे गुरुजी ने एक बात कही थी
किसी व्यक्ति की असली औकात और चरित्र जानना हो, तो उसे असीमित शक्ति दे दो। फिर उसका वास्तविक चेहरा खुद-ब-खुद सामने आ जाएगा।
क्योंकि आज का धृतराष्ट्र भी कुछ ऐसा ही प्रतीत होता है। लोगों ने उसे ��सीमित शक्ति दे दी, और अब उसका असली चरित्र सामने आ रहा है।
भाजपा का सच क्या है, इसके बारे में भाजपा की गुलामी करने वालों को सोचना चाहिए।
> जब नूपुर शर्मा ने धर्म के लिए आवाज उठाई, तो आपने उन्हें पार्टी से निकाल दिया।
> जब टी राजा सिंह जेल में बैठे थे, तो आपने उनसे पल्ला झाड़ लिया।
अब आज जब स्वतंत्र भारद्वाज जैसे लोग दिन-रात आपकी विचारधारा के लिए लड़ रहे थे, तो मुश्किल वक्त आने पर आपने उन्हें बिल्कुल अकेला छोड़ दिया।
भाजपा ने इन देशभक्���ों का सिर्फ इस्तेमाल किया।
जब भाजपा को जरूरत थी, तो भाजपा ने उन्हें हथियार बनाकर आगे कर दिया, और जब मुसीबत आई, तो आपने ऐसा बर्ताव किया जैसे आप उन्हें जानते तक नहीं।
भाजपा से सभी कार्यकर्ताओं तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दें।
नये भारत के भीड़तंत्र में आपका स्वागत है।
सवर्णों ने आदि कल से लेकर आज तक राष्ट्र प्रथम, सनातन धर्म के लिए आपने शीश काटयें है। वर्तमान भारत मे सवर्णों पर चौतरफा हमले, सामूहिक नरसंहार, बेटियां के दुर्दशा तक बात आ गई है।
अब बात सम्मान, अधिकार और अस्तित्व की है
वीर भोग्य वसुन्धरा।
ये देश गृहयुद्ध की तरफ़ जा रहा है। जो दिशा राजनीति ने समाज को पकड़ा दी है, उसमें रक्तपात के बिना शांति संभव नहीं है। ये होकर रहेगा, ऐसा प्रतीत हो रहा है।
जो लोग भी इस सामाजिक विभेद को चंद वोटों के लिए आगे बढ़ा रहे हैं, इसका पहला शिकार वही लोग बनेंगे। बचेंगे नहीं। कहीं किसी एक जगह भी जातीय दंगा हो गया तो फिर आगे कोई समाधान नहीं है। इसकी श्रृंखला शुरू हो जाएगा। ये नब्बे के दशक में आए दिन होने वाले हिन्दू-मुस्लिम दंगों से भी बदतर होगी। सोशल मीडिया का युग है, अपुष्ट सूचन��एँ भी आग भड़का सकती हैं।
आप देखिए, जबसे जातीय कार्ड शुरू हुआ है दोनों तरफ़ से, 'लव जिहाद' से लेकर इस्लामी आतंकवाद तक पर उतनी बात नहीं हो रही। कारण - इन सबपर बात करने वालों में अधिकतर सामान्य वर्ग के ही लोग थे। अपने चौखट पर आसन्न ख़तरे को देखकर उनकी सिट्टी-पिट्टी गुम हैं, वो इस अल्ट्रा-आंबेडकरवाद से निपटें या फिर मुग़लों का शासन फिर आ जाने से डरें?
हाँ, जातीय दंगों से पहले कहीं इस्लामी भीड़ ने आतंक का प्रदर्शन कर दिया तो कुछ महीनों के लिए मामला फिर थम जाएगा। हिन्दू एकजुट होंगे। वरना, स्थिति हम देख ही रहे हैं।
अगर स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के बजाय अपमानजनक सज़ा दी जा रही हो और शिकायत पर जाति का ���ुकदमा हथियार बन जाए, तो सवाल व्यवस्था से होगा, चाहे मामला SC/ST का हो या किसी और का।
अपडेट 🚨
कानपुर में शहर की सड़कों पर गर्दन ही गर्दन दिख रहीं हैं, लोगों की हांथो में मशालें और जुलूस में काले कानून वापस लो के नारों की गूंज ने साबित कर दिया कि भाजपा का अब अंतिम समय निक�� है।
लोगों में सरकार के खिलाफ रोष है, अब लोगों को बदलाव चाहिए।
साथियों यह आग अब बुझनी नहीं चाहिए, यह आग तब तक चलनी चाहिए जब तक देश से काले कानून खत्म नहीं हो जाते हैं।
पूरे देश में आरक्षण सुधार आंदोलन का सैलाब चल रहा है इसमें कौन कौन बह जाएगा ये कह कह नहीं सकता और भविष्य में कौन सत्ता में बैठेगा ये भी नहीं कह सकता , इस लिए सभी राजनीतिक दलों को एक बार इस आरक्षण पीड़ित लोगो के बारे में जरूर विचार कर जल्द निर्णय लेना चाहिए।
माननीय @narendramodi जी का कोर वोटर! वीडियो में सुनिए इनको। @BJP4India ने एक काम तो किया है कि चाहे दिल्ली पुलिस हो या बिहार पुलिस,'नपुंसक' बना कर ऐसे गुंडों के सामने लाचार कर दिया है। सोचिए, एक अनपढ़, गँवार गुंडा पुलिस को ऐसे धमका रहा है। @vikasvaibhavips जी, इसका संज्ञान लीजिए।
सवर्णों की यह रैली नहीं रैला है।
मोदी सरकार ने अगर UGC रेगुलेशन, SCST एक्ट और जातिगत आरक्षण का सुधार नहीं किया। सवर्णों को समानता का अधिकार नहीं दिया। शायद लोकतंत्र का सबसे बड़ा बदला��� होगा।
गाँवों की अर्थव्यवस्था में हर जाति की अपनी भूमिका और हिस्सेदारी थी; किसी एक का पूरा सिस्टम पर कब्ज़ा नहीं था।
आज जब वही सामाजिक ढाँचा असमानता की बहस में खड़ा है, तो सवाल है कि व्यवस्था किसने बनाई और उसका लाभ किसे मिला?
आज दिनांक 03 सितंबर 2026 को सवर्ण आर्मी जनपद बहराइच इकाई के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर बहराइच में जोरदार प्रदर्शन कर जिलाधिकारी महोदय के माध्यम से माननीय राष���ट्रपति महोदय को ज्ञापन सौंपा।
इस जोरदार प्रदर्शन में संगठन के समस्त पदाधिकारीगण एवं सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे और एक स्वर में अपने हक की आवाज बुलंद की।
सवर्ण आर्मी की मुख्य मांगें:-
1. आरक्षण जाति के आधार पर नहीं, आर्थिक आधार पर लागू हो।
2. UGC के नए नियमों को तत्काल वापस (RollBack) लिया जाए।
3. SC/ST एक्ट को समाप्त किया जाए।
4. सवर्ण समाज के हितों के लिए सवर्ण आयोग का गठन किया जाए।
सवर्ण आर्मी स्पष्ट करती है कि यदि हमारी जायज मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया तो आने वाले समय में संगठन द्वारा और बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
#UGC_RollBack #SC_ST_Act_समाप्त_करो
यूपी, कानपुर 📍
‘मैं ब्राह्मण हूं' महासभा के अध्यक्ष दुर्गेश मणि त्रिपाठी के नेतृत्व में UGC रोलबैक और आरक्षण आर्थिक आधार हो, मांग को लेकर विशाल मशाल यात्रा निकाली गई।
कानपुर का इतिहास आंदोलन और क्रांतिकारियों का रहा है यहां आज भी 7 दिन तक क्रान्तिकारियों के लिए होली खेली जाती है UGC Rollback aur Reservation Reform को लेकर आंदोलन शुरू ho चुका है थमेगा नहीं ये किसी के खिलाफ नहीं असल अधिकारों के लिए है @narendramodi@ajeetbharti@NijiSachiv
लोग @VidyutJammwal और @adah_sharma को उनकी फिल्मों की सफलता और असफलता के लिए पसंद नापसंद करते होंगे... लेकिन मेरे लिए ये दोनों पहले दिन से ही न जाने क्यों बहुत स्पेशल और घनिष्ठ से महसूस होते हैं। दोनों की वाइब्स पवित्र हैं।
गजब बात ये है कि इन दोनों की ओन कैमरा केमिस्ट्री भी बहुत गजब की है। अच्छे लोग नेचुरली ब��ना जाने दूर से भी अच्छे लगने लगते हैं।
ज���सा कि हमने कहा है, हर आंदोलन के लिए जंतर मंतर नहीं चाहिए। वहा भी जाकर सवर्ण समाज ने दिखा दिया, पर कई आंदोलन घर बैठे, गांव-देहात के करने से भी होते हैं। आंदोलनों में गर्मी केवल जलती बस की आग से नहीं आती, गर्मी हम दूसरे तरह से भी उत्पन्न कर सकते हैं।
यह आंदोलन सवर्ण समाज का है।
अच्छा लग रहा है य�� देखकर कि सवर्ण समाज भी अब अपने अधिकारों को लेकर एकजुट हो रहा है और गलत का विरोध कर रहा है।
अब आगे से कोई भी पार्टी ऐसा भेदभाव वाला कानून लाने से पहले 1000 बार सोचेगी।