*अगर ज़कात बाकी है… तो सब कुछ बाक़ी है*
आज एक सीधा सवाल है। कड़वा है… मगर ज़रूरी है। क्या आपका बैंक बैलेंस बढ़ रहा है और आपका हिसाब भी? आप नमाज़ पढ़ते हैं। रोज़े रखते हैं। हज की तमन्ना भी रखते हैं। मगर अगर आपके माल में से ज़कात अदा नहीं हुई तो समझ लीजिए ईमान की इमारत में दरार है। ज़कात कोई ऑप्शन नहीं। यह इस्लाम का खंभा है। खंभा हटा दीजिए… छत गिर जाती है।
*ज़कात ढाई फ़ीसद, आपकी सोच की सर्जरी है*
ढाई फ़ीसद सुनकर लोग मुस्कुराते हैं। बस इतना ही तो देना है। लेकिन असल सवाल रक़म का नहीं, नीयत का है। क्या आप मानते हैं कि यह माल अल्लाह की अमानत है या दिल में अभी भी लिखा है, “मेरी कमाई, मेरा हक़”? ज़कात उस “मेरा” को तोड़ती है। ज़कात दिल से घमंड निकालती है। ज़कात माल को भी साफ़ करती है और नीयत को भी। जो ज़कात देता है वह ग़रीब पर एहसान नहीं करता। वह अपने ऊपर से बोझ उतारता है।
*जो रोका गया… वही जलेगा*
हदीसों में चेतावनी भी है। रहमत भी है। जो माल का हक़ अदा नहीं करता वही माल सवाल बन सकता है। आज जो तिजोरी में बंद है कल वही हिसाब की ज़ंजीर बन सकता है। सोचिए… अगर अल्लाह ने पूछा “मैंने दिया था… तूने रोका क्यों?” क्या जवाब होगा?
*बरकत क्यों नहीं है?*
लोग कहते हैं “कमाई तो है… मगर टिकती नहीं। सौदा होता है… मगर फ़ायदा नहीं। घर बड़ा है… मगर सुकून नहीं।
कभी आईना देखा? माल पाक है? याद रखें ज़कात सिर्फ ग़रीब का पेट नहीं भरती। यह आपके घर में बरकत की बारिश लाती है।
*क़यामत का दिन बिना वकील, बिना बहाना*
उस दिन न सीए काम आएगा, न टैक्स रिटर्न। पूछा जाएगा। निसाब था? साल गुज़रा? ज़कात दी?
अगर जवाब “नहीं” हुआ तो अफ़सोस भी काम नहीं आएगा।
*रमज़ान आख़िरी मौक़ा समझिए*
रमज़ान सिर्फ इफ्तार की दावतों का नाम नहीं। यह हिसाब साफ़ करने का महीना है। आज आप किसी ग़रीब के चेहरे पर मुस्कान ला सकते हैं। आज आप अपनी तिजोरी को हल्का और अपनी आख़िरत को भारी बना सकते हैं।
याद रखिए जो आपने अल्लाह की राह में दिया, वही असल में आपका है। बाक़ी सब… यहीं रह जाएगा।
*आख़िरी बात*
अगर आपकी ज़कात अदा हो चुकी है तो आपको मुबारक। अगर नहीं हुई तो यह लेख पढ़कर और शेयर करके आगे मत बढ़ जाइए बल्कि आज ही हिसाब बैठाइए। आज ही नीयत कीजिए। आज ही अदा कीजिए। क्योंकि… अगर ज़कात बाक़ी है, तो सब कुछ बाक़ी है।
✍️ *लेखक: सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी, चेयरमैन व चीफ़ क़ाज़ी - ग़ौसे आज़म फाउंडेशन*
*जनता भूखी और सत्ता के गलियारे में थाली झिलमिला रही है*
देश की जनता गैस, राशन, दाल-आटा आदि के दामों से त्रस्त है,
और कभी संसद भवन की कैंटीन में चाय ₹1, बिरयानी ₹8 में मिलती थी!
पर सच्चाई अब कुछ और है... 👇
*⚖️ सच्चाई क्या है?*
➡️ 2015 तक संसद कैंटीन को क़रीब 80% सब्सिडी मिलती थी।
➡️ सांसदों और कर्मचारियों को ₹1 की चाय और ₹8 की बिरयानी सच में मिलती थी।
➡️ लेकिन 2016 में ये सब्सिडी ख़त्म कर दी गई।
➡️ अब 2021 से वहां के दाम बाज़ार के बराबर हैं —
चपाती ₹3, वेज थाली ₹100, चिकन बिरयानी ₹120, नॉनवेज बुफे ₹700 तक।
(स्रोत: India Today, The Hindu, https://t.co/mnTqHBjqSH)
तो अब “₹1 की चाय” सिर्फ बीते वक़्त की कहानी है।
लेकिन सवाल यह नहीं कि दाम कितने हैं ?
सवाल यह है कि ऐसे मॉडल जनता के लिए क्यों नहीं?
💥 अगर संसद कैंटीन जैसी व्यवस्था
हर 5 - 10 किलोमीटर पर खोल दी जाए
तो न राशन की लाइनें, न गैस सिलेंडर की चिंता, न भूख का अपमान!
*₹29 में भरपेट खाना*
यही असली सबका साथ, सबका विकास होगा।
राजस्थान की “अन्नपूर्णा रसोई”,
तमिलनाडु की “अम्मा कैंटीन”,
कर्नाटक की “इंदिरा कैंटीन”,
और महाराष्ट्र की “शिव भोजन थाली”
पहले ही ये साबित कर चुकी हैं कि ये मॉडल चल सकता है
📢 माननीय प्रधानमंत्री @narendramodi
📢 @FinMinIndia@cmoindia
📢 @mygovindia@PIBIndiaMSME
जनता पूछ रही है
अगर संसद के गलियारे में कभी ₹1 की चाय और ₹8 की बिरयानी हो सकती थी,
तो आम नागरिक के लिए ₹29 की “जनता थाली” क्यों नहीं?
🔥 अब वक़्त है “सब्सिडी बंद” नहीं, “भूख बंद” करने का!
भोजन सबका हक़ है, न कि सुविधा का दर्जा।
अगर सत्ता चाह ले —
तो “लोक कैंटीन योजना” देश की अगली क्रांति बन सकती है 🇮🇳
*सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी*
चेयरमैन व चीफ़ क़ाज़ी: ग़ौसे आज़म फाउंडेशन
#लोककैंटीन_योजना #सबका_साथ_सबका_भोजन
#ParliamentCanteen #सत्ता_का_स्वाद #जनता_की_भूख
#FoodForAll #IndiaDeservesBetter
*मस्जिद और मदरसा की ज़िम्मेदारी “ग़ौसे आज़म फ़ाउंडेशन” को सौंपी गई*
बड़वानी (ठीकरी)।
रज़ा नगर स्थित “मस्जिदे आला हज़रत” और उससे सम्बद्ध मदरसा की ज़िम्मेदारी, स्थानीय मुसलमानों ने एक ऐतिहासिक और रूहानी जलसे “जश्ने ग़ौसुलवरा कांफ़्रेंस” के दौरान, सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त संस्था ग़ौसे आज़म फ़ाउंडेशन को औपचारिक रूप से सौंप दी। इस जलसे में बड़ी संख्या में आशिक़ाने रसूल और ग़ुलामाने औलिया ने शिरकत की।
जलसे के नाज़िमे आला और ख़तीबे अहले सुन्नत हज़रत मौलाना जुनैद रज़ा क़ादरी साहब ने अपनी तक़रीर में ग़ौसे आज़म फ़ाउंडेशन द्वारा समाज, तालीम और इंसानियत की भलाई के लिए किए जा रहे कार्यों की तफ़सील से जानकारी दी और यह घोषणा की कि मस्जिद व मदरसे की तमाम इंतज़ामी व प्रशासनिक ज़िम्मेदारियाँ अब ग़ौसे आज़म फ़ाउंडेशन को सौंपी जा रही हैं।
मुख्य अतिथि पीरे तरीक़त, हुज़ूर सैफ़े मिल्लत, हज़रत मौलाना सूफ़ी सैफ़ुल्लाह क़ादरी साहब (राष्ट्रीय अध्यक्ष, ग़ौसे आज़म फ़ाउंडेशन) ने अपनी प्रेरणादायक तक़रीर में फ़रमाया: “इस्लाम की ताक़त तादाद में नहीं, बल्कि ईमान, यक़ीन और तलवारों की झंकार में है।” आपने जंगे बद्र, ओहद, हुनैन और ख़ैबर के वाक़ियात का ज़िक्र करते हुए बताया कि किस तरह सच्चा ईमान और अटल यक़ीन, बंदे को अल्लाह की मदद का हक़दार बना देता है।
आपने हज़रत ग़ौसे आज़म रहमतुल्लाह अलैह के रुहानी फ़ैज़ और हज़रत सुल्तान सलाहुद्दीन अय्यूबी रहमतुल्लाह अलैह की फ़तह-ए-बैतुलमक़्दिस का ज़िक्र करते हुए कहा: “सलाहुद्दीन अय्यूबी ने ईमान व यक़ीन से जंग जीती और उस वक़्त हुज़ूर ग़ौसे आज़म रहमतुल्लाह अलैह के मुरीद भी उनके साथ थे।”
तक़रीर के समापन पर सूफ़ी सैफ़ुल्लाह क़ादरी साहब ने फ़रमाया: “रज़ा नगर के मुसलमानों ने जो भरोसा, ग़ौसे आज़म फ़ाउंडेशन पर किया है, इं शा अल्लाह उस अमानत को पूरी ज़िम्मेदारी के साथ निभाया जाएगा। मस्जिद व मदरसे के तमाम अधूरे काम बहुत जल्द मुकम्मल कराए जाएंगे।”
जलसे में सुन्नी जामा मस्जिद के ख़तीब व इमाम, हज़रत मौलाना मुबश्शिर मिस्बाही साहब ने भी ख़िताब किया, जबकि हुज़ूर सैफ़े मिल्लत के मुरीद शैख़ मतीन क़ादरी ने बारगाहे ग़ौसे आज़म रहमतुल्लाह अलैह में दिलकश मनक़बत पेश की।
सलात व सलाम और फ़ातिहा के बाद जलसा दुआ-ए-ख़ैर के साथ संपन्न हुआ।
हज़रत मौलाना सूफ़ी सैफ़ुल्लाह क़ादरी साहब ने मुल्क में अमन, चैन, भाईचारा और इत्तेहाद की ख़ास दुआ की।
जलसे के मौक़े पर समीर कुरैशी (सदर), युसूफ़ पत्रकार (सदर), मोहम्मद शौएब (खजांची), मोहम्मद शरीफ़ (नायब सदर) समेत तमाम ज़िम्मेदारान डॉक्टर इक़बाल, मोहम्मद आशिक़, मोहम्मद जावेद, मोहम्मद वकील, मोहम्मद इरफान, मोहम्मद शहज़ाद ख़ान, मोहम्मद शाहरुख, मोहम्मद तालीब, मोहम्मद तौहीद और मासूम अली ने हज़रत मौलाना सूफ़ी सैफ़ुल्लाह क़ादरी साहब का फूल मालाओं से ज़ोरदार इस्तक़बाल किया। मदरसे के नन्हें छात्रों को इनाम व इकराम, हुज़ूर सैफ़े मिल्लत के मुबारक हाथों से अता किए गए।
बरेली: मुसलमानों पर हो रहे उत्पीड़न और अन्याय को रोका जाए
बरेली शरीफ़ के ख़ानदान ‑ आला हज़रत के ज़िम्मेदारों ने हाल ही में मीडिया के माध्यम से शासन‑प्रशासन से स्पष्ट अपील की है: यदि मुसलमानों पर हो रहे उत्पीड़न और अन्याय को रोका नहीं गया तो उन्हें मजबूरी में क़दम उठाने पड़ सकते हैं। मरकज़ ने आवाज़ उठाकर संवेदनशीलता जताई है — परन्तु यह लड़ाई केवल एक मरकज़ की नहीं होनी चाहिए।
हम समाज के सभी ठोस घटक से पूछते हैं:
1. कौन‑कौन‑सी ख़ानकाहें, दरगाहें और धार्मिक तथा सामाजिक संगठन इस आंदोलन के साथ प्रतिबद्ध हैं?
2. किसने मरकज़ को भरोसा दिलाया है कि वे क़ानूनी, शांतिपूर्ण और संगठित प्रयासों में साथ चलेंगे?
हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि हमारा इरादा किसी भी तरह की हिंसा या सार्वजनिक अशांति का आह्वान करना नहीं है। मांग यह है कि:
सम्बंधित प्रशासन त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करे;
समुदाय के सभी संगठनों द्वारा एक साझा रणनीति और समर्थन जारी किया जाए;
किसी भी क़दम में केवल क़ानूनी तथा शांतिपूर्ण उपाय अपनाएं जाएँ।
हम सभी संबंधित पक्षों से आवाहन करते हैं कि वे जल्द से जल्द सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट करें और मरकज़ को भरोसा दें — ताकि समस्या का स्थायी और शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सके।
(मेरे इस लेख का उद्देश्य, समुदाय में एकता, क़ानूनी कार्रवाई और ज़िम्मेदार संवाद को बढ़ावा देना है।)
#सुरक्षा_और_न्याय
#बरेली_शरीफ
#एकता_के_लिए
सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी,
चेयरमैन: ग़ौसे आज़म फाउंडेशन
Bareilly Sharif has raised its voice —
Now the question is: which other Khanqahs, Dargahs and Muslim organizations are standing with them?
We call for unity, legal action and peaceful support for justice and protection.
कायनात में अगर कोई मुहब्बत_प्यार_इश्क़ करने के लायक कोई है तो वो हमारे नबी:
पैग़म्बर, जिनका काम खुदा का पैग़ाम पहुँचाना होता है।
रसूल अल्लाह:
अल्लाह का संदेशवाहक।
अल-मुस्तफा
'चुने हुए' या 'चुन लिए गए'।
अमीन:
'भरोसेमंद' या 'ईमानदार'।
सादिक़:
'सच्चे ﷺ की मुक़द्दस जात ए पाक है
धर्म के नाम पर ज़हर फैलाना बर्दाश्त नहीं
प्रतापगढ़ (उत्तर प्रदेश) का आदित्य रोज़ाना मुसलमानों और अल्लाह तआला के ख़िलाफ़ घटिया और आपत्तिजनक वीडियो बना रहा है।
यह सिर्फ़ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने की हरकत नहीं, बल्कि सोची-समझी साज़िश है ताकि नफ़रत और दंगे फैलें।
👉 यूपी पुलिस से गुज़ारिश है कि ऐसे ज़हरीले तत्व पर फ़ौरन FIR दर्ज कर सख़्त कार्रवाई की जाए। वरना इसका अंजाम सामाजिक अशांति और क़ानून-व्यवस्था पर सीधा वार होगा।
@Uppolice@pratapgarhpol @igrangeprayagraj @dgpup@CMOfficeUP@myogiadityanath@AshwiniUpadhyay
#HateSpeech
#UPPolice
#Pratapgarh
#ActionNow
@NigarNawab@Razvi1278@CMOfficeUP@dgpup@Uppolice
Hello sir ji aapse apeel hai ki is #sada#wardi wale inspector ki khabar li jaye kya eik police wale ki bhasha aesi hona chahiye jisko saaf saaf saamne eik insan nazar aa raha hai or apmaan Allah ka kiya ja raha hai 🙏🙏🙏
#hello@RajsthanPolice5@AlwarPolice@RajCMO
Ye link hai fb ka is ladke ne bahut hi galat or gandi zaban me Quran or paigambar e islam ki toheen ki aapse apeel hai ki isko jald se jald arrest kiya jaye
https://t.co/FLmG6C3N3u
@myogiadityanath LO JI KARLO BAAT YE @myogiadityanath hain jo india ke sabse bade wegyanic hain kyun bholi bhali janta ko bewakuf banate ja rahe ho khud ko kabhi aaine ke saamne jakar gor se dekhna.......