अलविदा वर्दी 🫡
तुम्हें पाना ,अशोक स्तंभ को कंधों पर सजाना और उसे ठनक में पहनना निश्चित ही गौरवशाली इतिहास रहेगा …लेकिन क्या करें, ये ज़िंदगी बहुत छोटी है और जीने के लिए बहुत सारे लम्हे हैं अब और कुछ करने का जी चाहता है खुली हवा में साँस लेने का जी चाहता है दुनिया को और क़रीब से देखने का जी चाहता है …इसीलिए आज शारदीय नवरात्री के प्रथम दिन अपनी राजकीय सेवा से त्यागपत्र दे दिया है ..राजस्थान प्रशासनिक सेवाओं में सफ़र यादगार रहा …अब कुछ और पारियाँ खेलने का मन है …आप सभी का प्यार यूँ ही बना रहे ..दुआओं में याद रखना🙏