संवेदना है, भावना है, एहसास है माँ,
जीवन के फूलों में खुशबू का आभास है माँ.
पूजा की थाली है माँ मंत्रों का जाप है माँ,
मरुस्थल में बहता मीठा सा झरना है माँ,
धरती से अंबर तक, युगों से लोग कहते आए,
सच्चा है कुछ जग में, तो सच्चा प्यार है माँ !!
मातृ दिवस की शुभकामनाएं 💐
@aajtak इनकी मानसिकता समाज में सुधार लाने के लिए नहीं, बल्कि अपने व्यक्तिगत या पार्टी के लाभ के लिए काम करती है। एक जागरूक नागरिक के तौर पर, किसी भी बयान पर भरोसा करने से पहले ग्रंथ के पूरे संदर्भ और उसके दोनों पक्षों को जानना बहुत जरूरी है।
@aajtak ये लोग ग्रंथों में महिलाओं के सम्मान में लिखी गई अच्छी बातों को कभी मंच से नहीं बोलते।सकारात्मक बातें समाज को जोड़ती हैं और शांति लाती हैं।शांति और एकता से राजनीतिक रोटियां नहीं सेकी जा सकतीं, इसलिए वे अच्छे उदाहरणों को छोड़ देते हैं।
@aajtak किसी भी प्राचीन ग्रंथ को समझने के लिए उस समय की सामाजिक स्थिति को समझना जरूरी होता है।ऐसे लोग जानबूझकर श्लोक के आगे-पीछे की बातें या उसके असली अर्थ को छिपा लेते हैं।वे केवल उतनी ही बात जनता के सामने रखते हैं जिससे उनका राजनीतिक एजेंडा सिद्ध हो सके।
@aajtak कुछ राजनेताओं का मुख्य उद्देश्य समाज को दो हिस्सों में बांटना होता है।वे ग्रंथों की केवल नकारात्मक या विवादित बातों को उजागर करते हैं।इससे एक वर्ग में गुस्सा और दूसरे वर्ग में असुरक्षा की भावना पैदा होती है।यह गुस्सा अंततः वोटों के रूप में उनके काम आता है।
@aajtak धार्मिक ग्रंथों के चुनिंदा हिस्सों का इस्तेमाल करना इनकी पुरानी रणनीति रही है। किसी ग्रंथ की केवल एक या दो पंक्तियों को बिना संदर्भ के उठाना और उस पर राजनीति करना समाज में विभाजन पैदा करता है।
@aajtak "शोचन्ति जामयो यत्र विनश्यत्याशु तत्कुलम्।न शोचन्ति तु यत्रैता वर्धते तद्घि सर्वदा।।" (३/५७)
जिस कुल (परिवार) में बहुएँ, बेटियाँ या स्त्रियाँ कष्ट पाकर शोक करती हैं, वह परिवार नष्ट हो जाता है। जहाँ स्त्रियाँ प्रसन्न रहती हैं, वह परिवार हमेशा उन्नति करता है।
@aajtak जहाँ नारियों का आदर-सत्कार होता है, वहाँ देवता निवास करते हैं (अर्थात सुख-समृद्धि रहती है)। जहाँ उनका सम्मान नहीं होता, वहाँ किए गए सभी अच्छे काम और धार्मिक अनुष्ठान बेकार हो जाते हैं।
@aajtak मनुस्मृति के तीसरे अध्याय का 56वां श्लोक महिलाओं के सम्मान के लिए
"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः।।" (३/५६)
@aajtak इस ग्रंथ में एक तरफ जहाँ सुरक्षा के दृष्टिकोण से महिलाओं को पुरुषों के संरक्षण में रहने की बात कही गई है, वहीं दूसरी तरफ परिवार और समाज में उन्हें सर्वोच्च स्थान भी दिया गया है।
आराधना, भक्ति एवं आस्था के पावन पर्व हरियाली तीज की समस्त मातृशक्ति को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
यह मंगल पर्व प्रेम, समर्पण, सौभाग्य और सुख-समृद्धि का प्रतीक है। माँ गौरी और भगवान शिव से प्रार्थना है कि आप सभी के दांपत्य जीवन में सुख, शांति, समृद्धि एवं खुशहाली बनी रहे।
लोकपर्व हरेला की आप सभी को मंगलमय शुभकामनाएँ💐
प्रकृति, हरियाली और समृद्धि का यह पावन उत्सव हम सभी के जीवन में सुख, शांति, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली लेकर आए।
#लोकपर्व#उत्तराखंड
समस्त प्रदेशवासियों को लोकपर्व हरेला की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
हरेला केवल एक लोकपर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी आस्था, पर्यावरण संरक्षण के संकल्प और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित भविष्य के निर्माण का प्रतीक है। यह पर्व हमें जल, जंगल, जमीन के संरक्षण तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित और समृद्ध भविष्य के निर्माण का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है।
यह पावन पर्व आप सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, खुशहाली और नई ऊर्जा का संचार करें, मेरी यही कामना है।