डॉ. सहदेव चौधरी फाउंडेशन के संस्थापक श्री वीरेंद्र चौधरी जी द्वारा संचालित जनपक्ष लेकर आया है एक नई पॉडकास्ट श्रृंखला जनपक्ष सिटिंग्स।
इस मंच पर हम अलग-अलग उम्र, सोच और अनुभव रखने वाले लोगों के साथ खुलकर बातचीत करेंगे, ताकि समाज में मौजूद विविध विचारों को एक साझा संवाद का अवसर मिल सके।
जनपक्ष सिटिंग्स के पहले एपिसोड में हम समझने की कोशिश करेंगे कि भारत की युवा पीढ़ी, यानी Gen-Z, आज के भारत, राजनीति, करियर, सोशल मीडिया, रिश्तों और भविष्य को किस नज़र से देखती है।
इस एपिसोड में जनपक्ष के संस्थापक श्री वीरेंद्र चौधरी बातचीत कर रहे हैं: विनम्र कुलवाल, आर्यन शर्मा और यति नंदवाना से!
क्या Gen-Z राजनीति में रुचि रखती है?
क्या सोशल मीडिया ने सोच बदल दी है?
क्या युवाओं के सपने और चुनौतियाँ पहले से अलग हैं?
जानिए इन सभी सवालों के जवाब इस दिलचस्प और बेबाक बातचीत में।
https://t.co/umy5FhWuaG via @YouTube
जनपक्ष सिटिंग के पहले एपिसोड में राजस्थान की जनरेशन जेड से बातचीत के कुछ अंश…
Some glimpses from our conversation with Rajasthan’s Generation Z in the very first episode of Janpaksh Sitting.
@TheJanpaksh_
वर्तमान युग अभूतपूर्व वैज्ञानिक प्रगति, तकनीकी नवाचार और आर्थिक प्रतिस्पर्धा का युग है। किंतु इस चमक-दमक के मध्य यदि कोई तत्व सबसे अधिक संकटग्रस्त दिखाई देता है, तो वह है—मानवीय मूल्य। ऐसे समय में फर्स्ट इंडिया न्यूज़ के डायरेक्टर एवं सहदेव फाउंडेशन के वर्तमान चेयरमैन श्री @virender_RJ21 जी द्वारा मूल्यपरक शिक्षा की अनिवार्यता पर दिया गया बल केवल एक शैक्षिक विमर्श नहीं, बल्कि समय की सबसे बड़ी आवश्यकता का सार्थक उद्घोष है।
उनका यह विचार उस गहन सत्य को उद्घाटित करता है कि शिक्षा का उद्देश्य मात्र जीविका अर्जित करने की योग्यता प्रदान करना नहीं है, बल्कि जीवन को गरिमा, संवेदना और उत्तरदायित्व से परिपूर्ण बनाना है। यदि शिक्षा केवल बुद्धि को विकसित करे और हृदय को उपेक्षित छोड़ दे, तो वह समाज को कुशल व्यक्तियों की भीड़ तो दे सकती है, किंतु श्रेष्ठ नागरिक नहीं।
आपकी सोच इस दृष्टि से अत्यंत दूरदर्शी प्रतीत होती है कि उन्होंने शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे चरित्र निर्माण, नैतिक चेतना और सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ा है। उनका चिंतन हमें यह स्मरण कराता है कि राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके विशाल भवनों, उद्योगों अथवा आर्थिक आंकड़ों में नहीं, बल्कि उन नागरिकों में निहित होती है जिनके जीवन में सत्य, करुणा, सहिष्णुता, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा जैसे मूल्य जीवित रहते हैं।
आज जब समाज का एक बड़ा वर्ग सफलता को केवल भौतिक उपलब्धियों के पैमाने पर मापने लगा है, तब श्री चौधरी जी का यह संदेश एक नैतिक हस्तक्षेप के रूप में सामने आता है। उनका दृष्टिकोण शिक्षा को बाज़ार की वस्तु नहीं, बल्कि मानवता के संस्कारों की कार्यशाला के रूप में स्थापित करता है। यह विचार भारतीय ज्ञान परंपरा की उस गौरवशाली धारा का विस्तार है जिसमें शिक्षा को आत्मोन्नति और लोकमंगल का माध्यम माना गया है।
समालोचनात्मक दृष्टि से देखें तो उनके विचारों की सबसे बड़ी विशेषता उनकी व्यवहारिकता है। मूल्यपरक शिक्षा केवल आदर्शवाद का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक स्थिरता और राष्ट्रीय एकता की आधारशिला है। जब शिक्षण संस्थानों में नैतिक मूल्यों का समावेश होता है, तब भ्रष्टाचार, हिंसा, असहिष्णुता और सामाजिक विघटन जैसी समस्याओं के विरुद्ध एक स्वाभाविक प्रतिरोध विकसित होता है। इस प्रकार उनका चिंतन समाज के वर्तमान संकटों का समाधान प्रस्तुत करने वाली एक रचनात्मक वैचारिकी के रूप में उभरता है।
वस्तुतः आपका यह कथन आधुनिक भारत के लिए एक चेतावनी भी है और एक दिशा भी। चेतावनी इस बात की कि यदि शिक्षा से मूल्य विलुप्त हो गए, तो ज्ञान विनाश का उपकरण बन सकता है; और दिशा इस अर्थ में कि यदि शिक्षा में नैतिकता और संवेदना का समावेश हो, तो वही ज्ञान राष्ट्र की प्रगति और मानवता के कल्याण का सबसे बड़ा साधन बन सकता है।
साहित्यिक अभिव्यक्ति
"विद्यालयों की दीवारों के भीतर केवल पाठ्यपुस्तकों का ज्ञान नहीं, बल्कि मनुष्यता का भविष्य आकार लेता है। यदि शिक्षा मस्तिष्क को प्रकाश देती है, तो मूल्य उसे दिशा प्रदान करते हैं। आपके द्वारा मूल्यपरक शिक्षा पर दिया गया बल वस्तुतः उस दीपशिखा के समान है, जो आधुनिकता की अंधी दौड़ में भटकते समाज को नैतिकता, संवेदनशीलता और मानवीय गरिमा का मार्ग दिखाती है। उनका चिंतन केवल शिक्षा का दर्शन नहीं, बल्कि एक ऐसे राष्ट्र के निर्माण का संकल्प है जहाँ ज्ञान के साथ विवेक हो, सफलता के साथ संस्कार हों और प्रगति के साथ मानवता भी सुरक्षित रहे।"
निस्संदेह यह दृष्टिकोण शिक्षा को उसके वास्तविक उद्देश्य से पुनः जोड़ने का एक गंभीर, दूरदर्शी और राष्ट्रोपयोगी प्रयास है। यह विचार केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के नैतिक और सांस्कृतिक भविष्य के लिए भी एक अमूल्य मार्गदर्शन सिद्ध हो सकता है।
@1stIndiaNews@ashokgehlot51@PIBHindi
राष्ट्र निर्माण में हमारा योगदान कितना है? हम दिन के 24 घंटों में देश के लिए क्या करते है?
डॉ. सहदेव चौधरी फाउंडेशन के संस्थापक श्री वीरेंद्र चौधरी द्वारा संचालित जनपक्ष के पॉडकास्ट सीरीज में जानिये आज की Gen-Z देश के वर्तमान हालात को कैसे देखती है।
पूरा एपिसोड देखिए जनपक्ष के यूट्यूब चैनल पर!
@virender_RJ21
“ख्यालों के रास्तों से उभरती है दुनिया, तुम देखते हो जैसे ठीक वैसी है दुनिया!”
डॉ. सहदेव चौधरी फाउंडेशन के संस्थापक श्री वीरेंद्र चौधरी जी द्वारा संचालित जनपक्ष लेकर आ रहा है, जनपक्ष सिटिंग्स! जिसमें हम बात करेंगे अलग अलग उम्र, सोच और अनुभव के पड़ाव से निकले हुए साथियों से। जनपक्ष सिटिंग्स का उद्देश्य है समाज में व्याप्त अलग अलग विचारों को एक साझा मंच पर लाना। इस ही कड़ी में जनपक्ष सिटिंग्स का पहला एपिसोड आगामी सोमवार को रिलीज़ किया जाएगा। इस पहले एपिसोड में हम बात देश की युवा शक्ति यानी Gen-Z के दृष्टिकोण से वर्तमान समय को समझने और जानने की कोशिश करेंगे। इस पॉडकास्ट में जनपक्ष के फाउंडर श्री वीरेंद्र चौधरी जी बात करेंगे विनम्र कुलवाल, आर्यन शर्मा और यति नंदवाना से!
पॉडकास्ट देखने के लिए जनपक्ष के यूट्यूब चैनल को अभी सब्सक्राइब करें और बेल आइकॉन पर क्लिक करें।
@virender_RJ21
'नारायण बारेठ...बीबीसी...जयपुर'
ये साइन ऑफ़, जो बीबीसी हिन्दी की राजस्थान से आने वाली रेडियो रिपोर्ट की ख़ास पहचान थी.
नारायण बारेठ एक बेहतरीन पत्रकार होने के साथ-साथ, बेहद सुलझे हुए शख़्स और अपने मज़ाकिया अंदाज़ के लिए भी जाने जाते थे.
68 साल की उम्र में उनका निधन हो गया.
नारायण बारेठ की पत्रकारिता, निजी जीवन और व्यक्तित्व को बीबीसी हिन्दी के एडिटर नितिन श्रीवास्तव (@Tweetnitins ) और बीबीसी हिन्दी के पूर्व संपादक संजीव श्रीवास्तव ने कुछ इस तरह याद किया.
रिपोर्टर अपना काम कर रहा था…तभी अचानक APRO खैरथल–तिजारा के श्री अतर सिंह जी प्रकट हुए…उन्होंने रिपोर्टर को कवरेज से रोका और लोकतंत्र के चतुर्थ स्तंभ की ज़िम्मेदारी निभा रहे पत्रकार को “यूट्यूबर” कहकर अपमानित करने का प्रयास किया।
अरे अतर सिंह जी, सुनिए…यह डिजिटल मीडिया का दौर है, इसलिए सच्चाई सामने आ रही है; वरना सच अक्सर दबा ही रह जाता।
माननीय मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी,
एक तरफ देश के प्रधानमंत्री डिजिटल दुनिया और न्यू मीडिया का सम्मान कर रहे हैं, और दूसरी तरफ आपके ही अधीन एक अधिकारी डिजिटल मीडिया के साथ दुर्व्यवहार कर रहा है। उम्मीद है सरकार इस मामले में गंभीरता दिखाएगी।
बाकी प्रदेश का डिजिटल मीडिया यदि एक बार खैरथल–तिजारा में ग्राउंड पर उतर गया, तो अतर सिंह जी को कई सवालों का सामना करना पड़ेगा। @DistrictCo95708@BhajanlalBjp@RajCMO@DIPRRajasthan
#Rajasthan
भिवाड़ी में एक अवैध फैक्ट्री में आग लगती है, धमाका होता है और 7 लोगों की मृत्यु हो जाती है!
जब साथी पत्रकार महेंद्र जी ग्राउंड रिपोर्ट करने जाते हैं, उसी समय दंभ से भरा APRO अतर सिंह आता है और पत्रकार को "यूट्यूबर" कहकर बाहर निकाल देता है!
क्या राजस्थान में यूट्यूबर बैन हैं? क्या यूट्यूब चैनल पर ग्राउंड रिपोर्ट करना प्रतिबंधित है?
जिला कलेक्टर, सूचना विभाग और मुख्यमंत्री जी को तुरंत इस घटना पर एक्शन लेना होगा!
#Rajasthan @DistrictCo95708@RajCMO
डॉ. सहदेव चौधरी फाउंडेशन द्वारा संचालित जनपक्ष पहल मोबाइल एवं डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय सभी पत्रकारों के साथ सदैव दृढ़तापूर्वक खड़ी रही है।
वर्तमान समय में मोबाइल और डिजिटल पत्रकारिता वैकल्पिक पत्रकारिता के एक सशक्त एवं प्रभावशाली केंद्र के रूप में उभरी है, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 में निहित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की मूल भावना को सुदृढ़ करती है। हमारा स्पष्ट मानना है कि किसी भी पत्रकार की उपेक्षा या अवमानना, चाहे वह मुख्यधारा से जुड़ा हो अथवा नवोन्मेषी डिजिटल माध्यम से, मूलतः संवैधानिक अधिकारों के हनन के समान है।
जनपक्ष पहल, इस परिवर्तनशील पत्रकारिता युग में जमीनी स्तर पर सतत संघर्षरत मोबाइल पत्रकारों के साथ प्रतिबद्धता के साथ खड़ी है तथा उनके उत्कृष्ट और जनहितकारी कार्यों का सम्मान करती है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवैधानिक जवाबदेही को सुदृढ़ करने का यह सतत प्रयास निरंतर चलता रहे, इसी भावना के साथ हम अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं।
@Viveksbarmeri@ReporterSahab@8PMnoCM@BalkaurDhillon@balmukundjoshi@Zinda_Avdhesh@nirmal_pareek93@arvindchotia@ashokshera94@dineshbohrabmr@naveen1003@iamnarendranath@umashankarsingh@virender_RJ21