फिरोजाबाद में 4 साल के मासूम की आंख में पेंसिल घोंप दिया
बेरहम लोग शिक्षक कैसे बन जाते हैं 😳
उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में एक निजी स्कूल की शिक्षिका पर 4 वर्षीय छात्र अनमोल की पिटाई करने और उसकी आंख में पेंसिल घोंपने का गंभीर आरोप लगा है। घटना के बाद बच्चे की आंख में चोट आई है।
मासूम की मां का आरोप है कि वह शिकायत लेकर पुलिस चौकी पहुंचीं, लेकिन उन्हें थाने भेज दिया गया। थाने पहुंचने पर कथित तौर पर फिर चौकी जाने को कहा गया।
मां का सवाल है—चौकी वाले थाने भेजते हैं और थाने वाले चौकी… आखिर मेरी शिकायत सुनेगा कौन?
Join this Space with me https://t.co/cK5G4eBXzF कोई शिकायत नहीं अब किसी से, न कोई मलाल है,
खुद की ही महफ़िल है और खुद ही का ख्याल है।
अकेला हूँ मगर अब बेबस नहीं ज़रा भी,
इस बेफिक्र तन्हाई में सुकून कमाल है।
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#टीम_सनातन
सनातनियों,
अगर जातिवाद होता तो राम कभी सेवरी के जूठे बेर ना खाते,
"वाल्मीकि रचित रामायण" कोई नहीं पढता,
कृष्ण कभी सुदामा के पैर ना धोते !
जाति में मत टूटिए, धर्म से जुडिए...."""""
एक हिन्दू, एक भारत, श्रेष्ठ भारत,,"""
जय श्री राम...🙏🚩
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بھلا کیسے بھلائیں ہم وہ باتیں پیار کی تم سے
نگاہیں اب بھی ہر اک موڑ پر تم کو ہی ڈھونڈتی ہیں
تری اک دید کی خاطر، یہ دل بے چین رہتا ہے
تیری الفت کا جادو اب، رگ و پے میں اترتا ہے
زمانہ لاکھ روکے پر، تمھیں ہی چاہیں گے ہم دم
یہی اقرارِ دل ہر پل، زباں پر نام لیتا ہے
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تم ناحق ناراض ہوئے ہو ورنہ میخانے کا پتہ
ہم نے ہر اُس شخص سے پوچھا جس کے نین نشیلے تھے.
तुम नाहक नाराज़ हुए हो, वरना मयख़ाने का पता
हमने हर उस शख़्स से पूछा, जिसके नैन नशीले थे।
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جتنا کہو گے، اتنا ہی تم سے پیار کریں گے۔
جو کہو گے، اُس پر بے حساب اعتبار کریں گے۔
تم بس ہمیشہ ہمارے رہنا،
ہم اپنی ہر دعا میں تمہارا ہی انتظار کریں گے۔ ❤️✨
भावनाओं से भरा एक अनमोल पल… 💔
कई वर्षों की लंबी और दर्दभरी तलाश के बाद, एक मां को आखिरकार वह युवती मिल ही गई…
जिसे उसके दिवंगत बेटे का दिल, अंगदान के माध्यम से मिला था।
जब दोनों आमने-सामने आईं, तो जैसे समय थम सा गया।
मां ने उस युवती को सीने से कसकर लगा लिया… मानो अपने बेटे को ही गले लगा रही हो।
कंपकंपाते हाथों से उसने धीरे से अपना सिर उस युवती के सीने पर रखा…
और फिर… उसने वही धड़कन सुनी…
अपने बेटे की धड़कन… जो अब किसी और के शरीर में जिंदा थी।
उस एक पल में दर्द, सुकून, यादें और प्यार—सब कुछ एक साथ उमड़ पड़ा।
वहां मौजूद हर इंसान की आंखें नम हो गईं…
क्योंकि ये सिर्फ एक मुलाकात नहीं थी,
ये एक मां का अपने बेटे से फिर से मिलने का एहसास था।