भारतीय जनता पार्टी राजस्थान के माननीय प्रदेश अध्यक्ष श्री @madanrrathore जी के निर्देशानुसार सेवा संकल्प अभियान 2026 के लिए केंद्र द्वारा निर्धारित विभिन्न 13 कार्यक्रमों हेतु प्रदेश टीम निम्नवत है।
जिनकी पहली किरण से जीवन में उजियारा
आता है, ऐसे सूर्य देव को मेरा शत शत प्रणाम!
कर्म करो, प्रकाश बनो और आगे बढ़ो !!
ॐ भास्कराय नमः !! #SpiritualSunday#GodMorningSunday
सीएम योगी आदित्यनाथ आज भले ही सत्ता के शिखर पर हों,
भले ही उनके कंधों पर देश के सबसे बड़े राज्य की ज़िम्मेदारी हो —
लेकिन कुछ लोग ऊँचाई पर पहुँचकर बदल जाते हैं…
और कुछ ऐसे होते हैं,
जो ऊँचाई पर पहुँचकर पहले से भी ज़्यादा भरोसेमंद हो जाते हैं।
योगी आदित्यनाथ उन्हीं में से एक हैं।यह उस समय की बात है,जब वे मुख्यमंत्री नहीं थे। न कोई सुरक्षा काफ़िला था,न सत्ता की चकाचौंध न कैमरों की भीड़।
वे सिर्फ़ सांसद थे —
लेकिन दिल से तब भी उतने ही बड़े थे,
जितने आज हैं।
एक छोटी-सी बच्ची…
महज़ दस साल की उम्र और उसी उम्र में
उसके सिर से पिता का साया उठ चुका था।
जिस उम्र में बच्चे खिलौनों से खेलते हैं,
उस उम्र में उसने ज़िंदगी का सबसे बड़ा दर्द देख लिया था।
घर में मातम था,खामोशी थी,और भविष्य का डर था।
उसी कठिन घड़ी में योगी आदित्यनाथ उस परिवार से मिले।
उन्होंने उस बच्ची की आँखों में झाँका —
और शायद उसी पल तय कर लिया कि यह बच्ची अब अकेली नहीं रहेगी। न कोई भाषण,न कोई दिखावटी दिलासा।
बस सादे शब्दों में कहा —
“आज से मैं तुम्हारा अभिभावक हूँ।
और जब तुम्हारी शादी होगी,तो मैं ज़रूर आशीर्वाद देने आऊँगा।”
वक़्त बीतता गया…
साल बदलते गए…
योगी जी सांसद से
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए।
देश-दुनिया में उनका नाम गूंजने लगा।
और उस बच्ची के मन में
एक डर बैठ गया —
“अब वो इतने बड़े हो गए हैं…
शायद उन्हें वो वादा याद भी न हो…” शादी तय हुई।
न्योता भेजने की हिम्मत नहीं हुई।
कौन मुख्यमंत्री को बुलाने की सोचता?
लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था।
शादी का दिन था।
मंडप सजा हुआ था,ढोलक की थाप गूँज रही थी…
अचानक माहौल ठहर-सा गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
वहाँ खड़े थे।
न कोई औपचारिकता, न कोई शोर-शराबा,
बस वही पुराने योगी जी —
वही अभिभावक।
मुस्कुराते हुए बोले —
“तुम लोग बुलाओगे नहीं, तो मैं आऊँगा नहीं क्या?”
बस…
इतना सुनना था।
पूरा परिवार फूट-फूट कर रो पड़ा।
और वह बच्ची —
जो अब दुल्हन बनने जा रही थी — अपने आँसू रोक न सकी। काँपती आवाज़ में बस इतना कह पाई —
“हमें यक़ीन नहीं था
कि मुख्यमंत्री बनने के बाद भी
आपको अपना वादा याद होगा…”
ये आँसू दर्द के नहीं थे।
ये आँसू भरोसे के थे।
ये आँसू उस सुकून के थे जो बरसों बाद मिला था।
उस दिन योगी आदित्यनाथ जी ने न कोई भाषण दिया, न कोई राजनीति की। उन्होंने सिर्फ़ अपना वादा निभाया।
और यही फर्क होता है —
नेता होने में और नेतृत्व होने में। ऐसे हैं हमारे योगी जी —
जो पद से नहीं,
प्रतिज्ञा से पहचाने जाते हैं।
—
✍🏻 शरद राय की कलम से
जूते भीगा भीगा कर मारना सिर्फ सुना था
आज देख भी लिया
Amit Shah ने समय रैना से भी गंदा रोस्ट कर दिया पप्पू को
बोल रहा था सदन में आओ – सदन में आओ
जब अमित शाह सदन में आए
तो खुद बीच में ही सदन छोड़कर भाग...Open News
देश के भीतर देश विरोधी एनजीओ को रास्ते पर लाने के लिए FCRA कानून में संशोधन लाना जरूरी क्यों है एक कहानी सुनिए???
कासगंज में चंदन गुप्ता हत्याकांड में NIA कोर्ट ने 28 आरोपियों को उम्र कैद की सजा सुनाई.
कोर्ट ने आरोपियों को बचाने में देसी और विदेशी एनजीओ की भूमिका पर भी बड़े सवाल खड़े किए थे.
आरोपियों को बचाने के लिए विदेशी मदद ली गई.
न्यायाधीश वीएस त्रिपाठी ने आदेश की कॉपी केंद्रीय गृह मंत्रालय और बार काउंसिल को भी भेजी है जिसमें विदेशी एनजीओ की भूमिका पर सवाल खड़े किए गए हैं. कोर्ट ने कहा जब भी कोई आतंकवादी पकड़ा जाता है तो ऐसे एनजीओ बड़े से बड़े वकील कोर्ट में खड़ा कर देते हैं. उन्हें बचाने के लिए पैरवी के लिए फंडिंग होती है.
NIA कोर्ट ने 7 एनजीओ का जिक्र भी किया. यह NGO हैं:
अमेरिका का एलाइंस फॉर जस्टिस एंड अकाउंटेबिलिटी
इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल
लंदन से संचालित साउथ एशिया सॉलिडेरिटी ग्रुप
भारत स्थित सिटीजेट ऑफ़ जस्टिस एंड पीस मुंबई
पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टी
और जमीयत उलेमा ए हिंद
न्यायालय ने कहा कि यह देखा गया है कि जम्मू कश्मीर, पश्चिम बंगाल, केरल, असम, पंजाब आदि प्रदेशों में जब कोई अभियुक्त आतंकवाद, जाली मुद्रा, भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध, देश की रक्षा संस्थानों से गोपनीय सूचनाओं की जासूसी से संबंधित अपराधों में गिरफ्तार करके न्यायालय में लाया जाता है तो पहले से ही कुछ वकील वकालत नाम लेकर उनकी पैरवी के लिए उपस्थित रहते हैं. इसमें से कथित तौर पर ये वकील इन्हीं NGOs से संबंधित होते हैं. सरकारी अधिवक्ता ने जमीयत उलेमा हिंद के लीगल का विवरण कोर्ट के समक्ष रखा जिसमें कहा गया कि उसने मार्च 2019 से अब तक 400 लोगों की पैरवी और कानूनी सहायता दी है.
यह जांच का विषय है कि NGOs को कैसे पहले से ही पता चल जाता है. वकीलों को कोर्ट में उतार देते हैं??
कासगंज की घटना पूर्व नियोजित थी?
मेरे प्यारे देशवासियों
मोदी को पैदा करने के लिए हीरा ban जैसी माताजी चाहिए
वरना नचनिया के पेट से तो पप्पू गद्दार देशद्रोही पैदा हो सकते हैं
आपकी क्या राय है ?