Here I am declaring the ‘NGO Thik Karo’ movement.
Thousands of foreign-funded NGOs are working in our country without any scrutiny.
They are illegally involved in conversion, protests against critical infrastructure projects, collecting data from the tribal community and submitting it to their foreign funders;
A few of them are involved in anti-India activities too.
They are spending just a little on good things, and the rest of the money works as parasites.
Will you come together for the development of our country?
We need volunteer professionals such as CAs, CSs, Lawyers, ground workers, researchers, managers, and whatever other skills and knowledge you have.
Students with excellent skills can also join.
Please fill out the Google Form provided in the tweet below.
#NGOThikKaro
निष्पक्ष हो कर और एक सवर्ण के रूप में बता रहा हूं।
हरियाणा के कई जिलों में उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में और राजस्थान के कुछ जिलों में मेरे जितने जानने पहचानने वाले हैं (सवर्ण), उनके अनुसार यूजीसी का कोई इंपैक्ट नहीं है, आरक्षण एक मुद्दा है, पर मोदी या भाजपा या कोई भी पार्टी आरक्षण हटा देगी ऐसी कोई आशा किसी को भाजपा को वोट देने से पहले भी नहीं थी और ना ही वोट देने के बाद है।
ट्विटर के ऊपर एक माहौल बन रहा है, फिर चाहे वो यूजीसी पर हो या फिर आरक्षण पर हो। परन्तु धरातल पर उसका बहुत बड़ा इमेक्ट नहीं है। जिन लोगों से मैने बात की और उनसे यूजीसी के बारे में जानने का प्रयास किया तो पता यही चला के जब नियम आया था तब एक दम सब आहत हुए थे, किंतु जब वो वापस हो गया तो लोगों को समझ आ गया।
आरक्षण पर चर्चा इंपॉर्टेंट है, और हम चर्चा कर रहे हैं। और वो चर्चा ट्विटर से शुरू हुई है, और न्यूज रूम तक गई है। लोग आपस में इसके बारे में हल्की हल्की बात करने लगे हैं। जिन लोगों के इस विषय पर ओपिनियन थे लेकिन वो उन्हें बंद कमरे में ही साँझा करते थे वो अब खुले में साझा कर पा रहे हैं। और यह अत्यंत आवश्यक है।
परन्तु आज के समय में आरक्षण सरकार पलटने वाला मुद्दा नहीं है।
14 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे मेरे साथ आज पुलिस द्वारा धक्का-मुक्की और बलपूर्वक रोकने की कोशिश की गई। मेरे साथ मौजूद साथियों के साथ भी पुलिस द्वारा मारपीट की गई।
कई दिनों से भूखा होने के बावजूद मैं अपने अधिकार और जनता की आवाज़ के लिए खड़ा हूँ। हमें इस तरह रोककर हमारी आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता।
#devendranathmahto
#JharkhandProtest
#JharkhandStudentProtest
@CMOfficeUP कृपया मेरी शिकायत पर ध्यान दें। UPPCL को टैग करने के बावजूद अभी तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। 07 जुलाई 2026 को स्मार्ट मीटर लगा, घर में कोई रहता भी नहीं है, फिर भी ₹429 का बिल आया है, कृपया संबंधित विभाग को मामले की जांच कर बिल सुधार के निर्देश देने का कष्ट करें
मेरे सवालों से परेशान होकर आखिरकार @zoo_bear और @SauravDassss हम पर हमला करने की कोशिश कर रहे हैं।
अब इतना कष्ट कर रहे हैं तो चलिए थोड़ा और सही। मेरे बाकी सवालों का भी जवाब दे दीजिए।
डॉ. सुमैया शेख जो आपके फैक्ट-चेकिंग साइंस पोर्टल की एडिटर है और डॉ. शरफरोज़ सतनी के बारे में क्या आप हमें बता सकते हैं ?
क्योंकि रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्हें रिसर्च के लिए करीब ₹50 लाख का ग्रांट मिला था। दावा ये है कि ये Alt News के लिए लेख लिखने के लिए नहीं था।
Thakur Foundation की वेबसाइट पर listed URLs क्यों Alt News पर Redirect हो रहे हैं? इसका कोई स्पष्टीकरण है क्या? कुछ बता सकते हैं ?
सौरव दास ने कभी दिनेश ठाकुर की TFF से भारतीय मुद्दों पर लेख लिखने के लिए फंडिंग ली है या नहीं? अगर नहीं ली तो बताइए ना।
आप CJP का इतना समर्थन कर रहे हैं, तो जरा पूछिए सौरव दास से कि उन्होंने अभी तक अपना रेंट एग्रीमेंट पब्लिक क्यों नहीं किया?
@abhijeet_dipke अपनी लंबे समय से चली आ रही AAP वाली एसोसिएशन को क्यों नकार रहे हैं?
आपने सिर्फ वे ही चीज़े उठाई जो आपके नैरेटिव में फिट बैठते थे। तो कृपया अपने प्रोपगैंडा को पीछे छोड़ कर मेरे इन सभी सवालों के सवाल दीजिये। क्योंकि अब बातचीत शुरू की है, तो पूरी बातचीत कर लीजिए।
एससी-एसटी के लिए मोदी सरकार मुआवजा राशि 40% बढ़ाने की तैयारी कर रही है। स्पेशल थानों के लिए ₹5 लाख का अनुदान दिया जाएगा।
केंद्र सरकार की दलील है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के अनुसार महंगाई बढ़ गई है, इसलिए मुआवजा भी बढ़ना चाहिए। अभी अपराध की प्रकृति और गंभीरता के आधार पर एससी-एसटी वर्ग है। प्रस्तावित बदलाव के बाद न्यूनतम मुआवजा ₹1 लाख और अधिकतम ₹12 लाख हो सकता है।
एससी-एसटी वर्ग के लिए विशेष थाने और अदालतें गठित करने के लिए राज्य सरकारों को विशेष अनुदान दिया जाएगा। बाद में इन थानों पर होने वाला खर्च संबंधित राज्य सरकारें उठाएंगी।
आप ही बताइए कि हम लोग क्यों कमाते हैं? एक सड़ा हुआ लॉजिक आता है कि क्या एससी-एसटी टैक्स नहीं देते हैं? बिल्कुल देते हैं, लेकिन गरीबों का कंजम्पशन कम होता है। सड़क किनारे की सब्जी और अनब्रांडेड नमक पर हमेशा वही टैक्स नहीं होता, जो ब्रांडेड सामान पर होता है।
अगर कोई गरीब परिवार महीने में ₹2,000 खर्च करता है और हम या कोई मिडिल क्लास टैक्स-पेइंग सिटीजन ₹10,000 खर्च करता है, तो 5% के हिसाब से एक परिवार लगभग ₹100 और दूसरा ₹500 टैक्स देता है। इसके बाद इनकम टैक्स भी दिया जाता है। यानी टैक्स सब देते हैं, लेकिन ज्यादा खर्च करने वाला ज्यादा अप्रत्यक्ष टैक्स भी देता है।
उस टैक्स के पैसे से हम सरकार से मांग रहे हैं कि ईडब्ल्यूएस में जो आरक्षित वर्ग है, उसकी फीस माफ करो। उसकी हॉस्टल फीस माफ करो, कोर्स फीस माफ करो और आवेदन फॉर्म का दाम खत्म करो।
सरकार यह नहीं कर रही है। सरकार क्या कर रही है? मुआवजा 40% बढ़ा रही है। ₹85,000 कम लगता है, इसलिए ₹1 लाख कर दो और अधिकतम ₹12 लाख कर दो।
हम कमा-कमा कर, घिस-घिस कर, किराया देते-देते परेशान हैं। सीटें कम होती जा रही हैं। प्रमोशन में एससी-एसटी-ओबीसी का ओवररिप्रेजेंटेशन में हिस्सेदारी 4.5% बताई जाती है, वह 40% सीटें ले जा रही है। उसे रैशनलाइज़ करने की जगह सामान्य वर्ग से कहा जा रहा है कि तुम लोग गुस्सा क्यों हो?
कन्विक्शन रेट 4%, 5%, 3% और 1% बताए जाते हैं। एक राज्य में यह दर 14% बताई जाती है। 2018 में मोदी सरकार ने एससी-एसटी एक्ट में जो प्रावधान जोड़े, उनके बाद कोई भी व्यक्ति केस दर्ज करा सकता है। समझौता करने पर पैसे देने पड़ सकते हैं, नहीं तो दो-तीन साल तक मुकदमे में फंसे रहिए।
कुछ लोगों ने एससी-एसटी एक्ट के मामलों में 20-20 साल तक झेला है।
यह पैसा मोदी जी या भाजपा की जेब से नहीं जा रहा है। यह जनता और टैक्स देने वाले लोगों का पैसा है। सड़कें टूट रही हैं, अस्पतालों और स्कूलों की स्थिति भी दिख रही है। हम जो पैसा दे रहे हैं, वह जा कहां रहा है?
इस फैसले का कोई लॉजिकल रीजन नहीं दिखता। ऐसा लगता है कि सामान्य वर्ग से पैसा लेकर दलित, पीड़ित, वंचित और शोषित वर्ग को देने की कोशिश की जा रही है। यह केवल मैसेजिंग है।
भाजपा की लोकप्रियता और उसका नैरेटिव इस समय बहुत कमजोर है। उसे लगता है कि सवर्ण पहले से नाराज हैं, इसलिए उन्हें मनाने के बजाय एससी वर्ग को अपने साथ जोड़ना ज्यादा जरूरी है।
झारखंड प्रदर्शन ने @BJP4India के पूरे प्रचार तंत्र को एक उदाहरण दिखाया है। जब CJP की बकलोली से पूरा सोशल मीडिया भरा पड़ा था, तब बिना किसी ऐसे लक्ष्य के साथ (कि भाजपा की सहायता करनी है), कुछ लोगों ने झारखंड में विद्यार्थियों को एकत्र कर दिया।
CJP का पूरा ट्रैक्शन समाप्त हो गया और, केवल ऑर्गेनिक रीच के बल पर, इन लोगों ने भाजपा को प्लेट पर सजा कर एक प्रदर्शन दिया कि सब इस पर लिखो। मेनस्ट्रीम मीडिया और बड़े यूट्यूब पत्रकार विवश हो गए राँची जाने को। भाजपा को धन्यवाद देना चाहिए वरना मोदी जी को हर रात दो रील बनाने पड़ते और अपनी हार को व्यूज गिन कर दिखाना पड़ता।
इससे एक बात साबित हुई है: भाजपा संचार तंत्र गोबर ही है और सामान्य जनता टेक्नॉल्जी के प्रयोग मात्र से एक स्वस्थ (और चाहें तो अस्वस्थ भी) प्रदर्शन कर सकती है। विधानसभा छू कर आ सकती है। …और अभी तो प्रतीक्षा कीजिए कि क्या-क्या होगा।
ये एक प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट है। जिनको समझना है, समझ लें। केस स्टडी करें, भागवत टाइप नहीं, गंभीरता से। धीरे-धीरे चुनाव का डायनमिक्स बदलने वाला है। उच्छृंखल सत्ता पर लगाम लगेगी।
नागरिकों को ठेंगे पर रख कर राजनीति करने का समय धीरे-धीरे जाएगा। उसका आरंभ हो गया है। सोरोस कनेक्शन ढूँढना है, ढूँढो। झारखंड के बच्चे न तो राजनीतिक हैं, न देशद्रोही। उन्होंने दिखा दिया कि उन्हें न तुम फंड पर घेर सकते हो, न विदेशी लिंक पर, न पार्टी लिंक पर…
सोचते रहो कि क्या हो रहा है और क्या होने वाला है।
मुख्यमंत्री जी की तरफ से छात्रों को बर्थडे पार्टी मिल चुकी है,
छात्रों का सर फोड़ने, उनकी टांग तोड़ने, 100- छात्र अस्पताल में भर्ती करने, आंसू गैस के गोले दागने, वाटर कैनन चलाने के बाद हेमंत जी पुलिस वालों को थैंक यू बोल रहे हैं।
छात्र अपनी पीठ और मजबूत कर लें, क्योंकि आंदोलन खत्म होगा नहीं, और सरकार मानेगी नहीं।
एकदम शांतिपूर्वक आंदोलन रहा,
पुलिस ने इतनी मिठाइयां और केक बांटा
कि इस छात्रा को पेट में गैस की दिक्कत हो गई।
(छात्र कह रहे हैं की पुलिस ने लाठी बरसाई हैं इसलिए अस्पताल में भर्ती है)
लेकिन आप लिख रहे हैं तो झूठ थोड़े ही लिखेंगे💀
कल विधानसभा का घेराव है, उसके मद्देनजर सरकार ने ऐसी तैयारी की है,
छात्रों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग के साथ साथ कंटीले तार भी लगाए हैं, ताकि छात्र जंप करके भी न जा सकें।
हेमंत जी ने अगर नकल माफियों, पेपर लीक माफियाओं और भर्ती घोटालों के दोषियों के खिलाफ ऐसी तैयारी की होती तो आज छात्रों को रोकना नहीं पड़ता।
📍रांची झारखंड
एक बार आरक्षण दे दिया तो पीछे का गियर नहीं होता।
अब नया सलूशन आ गया — ब्राह्मणों को छोड़कर सबको आरक्षण दे दो।
बिहार में भूमिहार को ST में डालने की बात हो रही है। कल कोई और जाति को OBC में ठूंस देंगे। परसों पूरा समाज SC-ST-OBC बन जाएगा।
SC-ST के लिए कम से कम कोई ऐतिहासिक आधार था। OBC में तो सिर्फ पावर डिस्कोर्स है। कमीशन बनती है, निष्कर्ष पहले से तय रहता है।
ट्रंप DEI हटा रहे हैं। यहाँ जाति को ही क्लास बना दिया गया है।
आरक्षण अब सामाजिक न्याय नहीं, वोट बैंक का स्थायी ठेका बन चुका है।
Appreciation Tweet for
Abhijit Iyer Mitra @Iyervval
Vijay Patel @VijayGajeraO
The Pamphlet @Pamphlet_in
People say there is no Nationalist Ecosystem, but these three have proved that Nationalist Ecosystem Exists and it can take on the Anti Nationalists Head On
From Exposing CJP to exposing the left ecosystem, they have done a tremendous job