It's very simple, bank can not suspend the tehsilar or sdm
Bank officer lost their credibility, egos & eco's ,same time Administrative people even improve their status
@TheOfficialSBI slaps a chief manager @aiboc sleeps as they are only for upto scale 3
@RtiCell15796
प बंगाल की NEET की एक परीक्षार्थी सृष्टि दुबे का 14 जून के एक्सीडेंट हो गया था। नौ पसलियाँ टूट गईं। सर्जरी हुई और अभी कृत्रिम ऑक्सीजन पर है। लेकिन हौंसला इतना बुलंद की परीक्षा देने पर अड़ी हुई थी।
उसके माता-पिता ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तक संदेश पहुंचाया। कहा कि अस्पताल परीक्षा केंद्र पर मेडिकल सपोर्ट के लिए तैयार है। बच्ची को ग्राउंड फ़्लोर पर टेबल कुर्सी दी जाए। वह अस्पताल के कपड़ों में ही परीक्षा देगी। चेस्ट ड्रेन आदि अटैचमेंट की अनुमति भी दी जाए।
शिक्षा मंत्री ने मानवीय आधार पर संज्ञान लिया। परीक्षा केंद्र पर अलग रूम की व्यवस्था की गई। मेडिकल सपोर्ट और एंबुलेंस रखी गई। अब बच्ची परीक्षा दे रही है। माता-पिता ने फ़ोन कर शिक्षा मंत्री को धन्यवाद दिया।
Guys please do not share such videos of UP-Bihar people travelling like cattle in trains as such videos destroy the image of India.
Please guys, strictly DO NOT RETWEET😁
Let’s present Vishwaguru image of India by not sharing such videos!!
2002 से पहले की बात है. गोरखपुर में मेरे घर का एक हिस्सा कच्चा मकान था और वो किराए पर दिया गया था.
एक कमरे में बिहार के तिरलोकी, जिन्हें हम लोग तिरलोकी चाचा कहते थे. वो तंबाकू काटने/पैकिंग का काम करते. उनको बच्चा नहीं हो रहा था तो गोरखपुर इलाज के लिये आये और यहीं रहने लगे. नौ साल शादी के बाद बेटी पैदा हुई. बहुत कम पैसा कमाने वाले तिरलोकी ने अपने यार दोस्त, रिश्तेदार को मछली चावल की दावत दी, अपनी हैसियत से ज्यादा खर्च किया.
बहुत खुश थे कि घर में लक्ष्मी आई है. एक साल बाद दोबारा उनकी पत्नी गर्भवती हुई. इस बार भी बहुत खुश थे लगा कि गोरखपुर जिसलिये आये वो सब पूरा हो रहा था, तभी एक दिन बिहार के अपने गाँव में किसी काम से जाने के लिये निकले-
देर रात खबर आई की पुलिस ने यूपी-बिहार बॉर्डर पर उनका एनकाउंटर कर दिया है…
( किसी और को समझकर तिरलोकी को मार दिया, तीन महीने बाद उनके घर में बेटा हुआ था )
Can railway minister travel in this condition?
Youths have been reduced to non-humans while PM travels in 8000 crore plane in the same country and enjoys all the luxuries of life!
This trial is probably among the most covered trials in Norway of this century and have been covered extensively the last few months in all media outlets in Norway.
In general, critique worthy and awful stuff happen in Norway too. A free press doesn’t equal a perfect country, system or people, but we can report on it.
तीन भारतीय मारे गए हैं- ओमान के पास एक टैंकर पर अमेरिकी कार्रवाई में|
ऐसे समय में देश को जवाब चाहिए, संवेदना चाहिए|
साहब विदेश जा चुके है । और इधर टीवी स्टूडियो में सवाल यह है कि भारत का मान कितना बढ़ गया, दोस्त कितने बन गए और दुनिया हमें कैसे देखती है।
कमाल की देशभक्ति है ?
एक तरफ़ जब भारतीयों की अर्थियाँ उठ रही हों, तब आत्मप्रशंसा आत्ममुग्धता कितनी शोभा देता है ?
राष्ट्र का सम्मान अपने नागरिकों के सम्मान और सुरक्षा से है।
हमारे PM trump को thank you tweet कर सकते है- मगर इसपे सवाल नहीं ? 💔💔💔💔
छुट्टी का अर्थ क्या है?
विदेश यात्राएँ भी, मंदिर दर्शन भी, लक्षद्वीप के समुद्र तट भी देखे गए, समुद्र के भीतर की तस्वीरें भी आईं।
अगर विदेश यात्रा, धार्मिक यात्रा, समुद्र तट पर जाना, प्रकृति के बीच समय बिताना, अच्छा भोजन करना और आराम करना भी छुट्टी नहीं है,
तो फिर मुझे लगता है इस देश में कोई भी छुट्टी नहीं ले रहा।
हर आदमी काम ही कर रहा है - कोई मनाली में काम कर रहा है, कोई गोवा में, कोई परिवार के साथ, कोई दोस्तों के साथ।
2014 से 2026 के बीच प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च हुए। असली बहस यह है कि इन दौरों से भारत को कितना निवेश मिला, कितने रोजगार बने और व्यापार हितों को कितना लाभ हुआ?
देश का आम आदमी नहीं देखता कि नेता ने कितने घंटे काम किया, वह देखता है कि उसके जीवन में क्या बदला।
जिस युवा का पेपर लीक हो गया, जिस किसान को फसल का दाम नहीं मिला, जिस मरीज को अस्पताल में बेड नहीं मिला, जिस परिवार की नौकरी चली गई - उसे 18 घंटे और 20 घंटे के से क्या फर्क पड़ता है?
18 घंटे काम करने का काम का परिणाम क्या निकला? शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, न्याय और नागरिक सुरक्षा के मोर्चे पर देश कहाँ पहुँचा।
युवा पूछ रहा है कि डिग्री के बाद नौकरी कब मिलेगी?
आम आदमी भी अपनी नौकरी में भी 12-14 घंटे खटता है, मजदूर धूप में पूरा दिन काम करता है, किसान बिना रविवार के खेत में उतरता है।
सवाल यह नहीं कि किसने कितने घंटे काम किया। सवाल यह है कि उस काम का परिणाम क्या निकला।
अगर काम का पैमाना सिर्फ घंटे हैं, तो इस देश का सबसे बड़ा कर्मयोगी शायद वह मजदूर है जो रोज़ दो वक्त की रोटी के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक देता है।
India should ask US Ambassador in New Delhi to go back to Washington and remain there unless US expresses regret for the reckless killing of our citizens on sea. But Modi is a pussy cat before Donald. He shivers before him.
When it's time to congratulate power, the tweets arrive instantly.
When it's time to speak about paper leaks, unemployment or inflation, suddenly the timelines go silent. 🤡
What a hypocrite 🥺
मेरी भाषा के लिए मैं क्षमा चाहता हूँ लेकिन गोदी मीडिया के साथ साथ जो स्वतंत्र पत्रकारिता करते हैं क्या वो भी अंधे हो गए हैं? गूगल पर search कीजिये "bank of baroda employee bishal barata roy suicide" आपको एक भी main stream media का article नहीं दिखाई देगा और ना किसी स्वतंत्र पत्रकार का।
क्या सब के सब अंधे हो गए हैं?
आज कोई एक customer, नियमों की अनदेखी करके अपनी मरी बहन के कंकाल को ब्रांच लाकर रखदे तो सारे कैमरा लेकर पहुँच जायेंगे लेकिन अगर एक बैंक कर्मी अपनी जान ले ले, ऐसे नियमों के कारण जो उसे बंधुआ मजदूर बना रहे हैं, तो किसी के मुँह से कोई आवाज़ नहीं आती।
मैं @Siddhantmt@TheNewspinch@Abhinav_Pan@ravish_journo@ajitanjum@sundaysarthak@TheDeshBhakt@moliticsindia@khurpenchh@abhisar_sharma@CJP_2029@Cockroachisback@sharadsharma1 और भी सभी स्वतंत्र लोगों से पूछना चाहता हूँ क्या बैंकर इस समाज का हिस्सा नहीं हैं?
I think the government & its chamchas are making a mistake in telling the middle class that it’s fine to let the rupee collapse having said the opposite when the BJP was in opposition
Every time some stooge says something dismissive like this, public anger grows. We are not fools
अमेरिका में प्रति व्यक्ति औसत कमाई - $95000
भारत में प्रति व्यक्ति औसत कमाई - $2890
लेकिन भारतीय मीडिया आपको ये नहीं बताएगा कि अमेरिका वाले का 2% बढ़ौतरी में भी काम चल जाएगा, लेकिन हम जितनी ग़रीबी में हैं उसमें 10% ग्रोथ भी कम है।