ये सारे जंगल के नजारे रेगिस्तान के हैं।
रोहिड़ा का जंगल ,केर का जंगल
खेजड़ी ��ा जंगल ,जाल का जंगल
इ��्हें लगाने में सरकार का कोई योगदान नही है,बुजुर्गों ने ओरण छोड़े थे ओर उनमें बिना एक रूपए के ये जंगल विकसित हुए है।
लेकिन सरकार का दोगलापन देखकर तरस आता है
एक पेड मॉं के नाम पर करोड़ों रूपए खर्च करके आँकड़े बता रही है कि हमने इतने पेड़ लगा दिए ओर पिछले दो तीन महीने से ओरण बचाने के लिये चल रही ओरण यात्रा पर कोई सुनवाई नहीं कर रही।
गाय के नाम पर राजनीति करने वाले लोग गायों के ओरण कंपनियों को बे��� रहे है।पेड़ के लिए सबसे ज्यादा हल्ला करने वाले ढोंगी नेता सबसे ज्यादा पेड़ कटा रहे हैं
अरे पापियों बेवक़ूफ़ हमें समझते हो या खुद हो।
वो थार का रेगिस्तान जिसे सरकारें बंजर मानकर सोलर प्लांट लगा रही हैं वो एक हँसता मुसकुराता जीवन का शांत बगीचा है ।पर इन आकाओं की हरकतों से ज़िंदगी के लिए तरस जायेगा ये थार।
हरियाली के लिये विलायती बबूल लाया गया था जो आज नासूर बन चुका है गले में अटका है।सबसे बड़ी जैवविविधता के नष्ट होने का कारण बनकर।
अगर ऐसा ही ऊर्जा के लिए ये सोलर लाये है अभी परिणाम सकारात्मक बता रहे है ये बेवक़ूफ़ क्योंकि इनके जेब में अथाह पैसा आ रहा है।
इनकी औलादों के लिए ये लोग विदेश में प्लॉट ओर खेत खरीद रहे है पर हमें अपने शुद्ध पर्यावरण से दूर कर रहे है।
जाग जाओ भाईड़ो इन ढोंगियों को जितना जल्दी हो समझ जाओ।
16 अप्रेल को ज्यादा से ज़्यादा ओरण बचाओ आंदोलन के लिए जयपुर में शामिल हो।
बोलेरो ओर रेगिस्तान की गहरा संबंध रहा है
ये वो गाड़ी थी जिसने रेगिस्तान के लोगों को रेगिस्तान में घूमने की आजादी दी थी।
ज़्यादा ऊँचाई ओर ताकतवर इंजन ने रेगिस्तान में अपनी छाप छोड़ी।
कोई भी विवाह ओर हथाई हो चौधरियों की प���ली पसंद थी बोलेरो।
आज भी धोती ओर साफा पहने चौधरी इसकी स्टेरिंग घुमाते नजर आते है।
तब के दौर का प्रसिद्ध वायरल गाना बना था “बैठ बोलेरो में चाले चौधरी,लागे घणा रो फुटरो” ने भी इस गाड़ी के प्रति क्रेज़ बढाया था।
इस दृश्य में अथाह थार रेगिस्तान में बहती ये गाड़ी ओर बादलों की ओट से निकलती सूर्य की किरणों का मन मोहक दृश्य बेहद खूबसूरत लग रहा है।