Indian Ocean losing its salt
A vast part of the Southern Indian Ocean is losing salt rapidly, scientists reveal. Over 6 decades, high-salinity waters have shrunk by 30% as freshwater from tropical rains and climate-driven winds dilute the region.
This disrupts ocean layering, slows global currents, traps heat and reduces nutrient flow, putting marine ecosystems at risk.
Researchers warn these changes could ripple across global climate systems.
वैसे मुझे मौक़ापरस्त लोगों से कोई मतलब नहीं होता।
लेकिन क्योंकि इसमें मेरे शिक्षक मुझे नया जन्म देने वाले व्यक्ति @Advait_Prashant जी का ज़िक्र है, इसलिए स्वयं को लिखने से रोक नहीं पाई। बाकी लोगों से मुझे कोई लेना-देना नहीं।
मैं बताती हूँ कि लोग आचार्य प्रशांत को क्यों सुनते हैं —
🔹 क्यों सुनते हैं लोग आचार्य प्रशांत को?
•लाखों-करोड़ों छात्र ऐसे हैं, जिनके जीवन को अंधकार में जाने से आचार्य जी ने रोका है।
•मेरे जैसी लाखों महिलाएँ हैं, जिन्होंने उड़ना सीखा है; जिन्हें नया जन्म मिला है।
•लाखों जानवरों को बचाया गया है और बचाया जा रहा है।
•Climate Change जैसे गंभीर विषय पर, जहाँ भारत में खुलकर बात तक नहीं होती, वहाँ आचार्य जी इसे आम लोगों तक पहुँचा रहे हैं।
•हज़ारों लोगों के रिश्ते बेहतर हुए हैं।
•जहाँ आज का युवा वेदांत, उपनिषद, भगवद्गीता जैसे ग्रंथों से दूर भाग रहा है, वहाँ विशुद्ध अध्यात्म को युवाओं तक पहुँचाया जा रहा है।
सूची बहुत लंबी है। तू चाहें तो नीचे दिए गए लिंक पर पूरा लेख पढ़ सकता हैं।
A rigorous exposition of AP Framework: Advaita stripped of metaphysics and refined into a relentless inquiry into ego and suffering.
👉🏻 Read here: https://t.co/DXlrl8bxlC
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अब कुछ स्पष्ट बातें:
तुम्हारी पोस्ट देखकर यही लगता है कि न तो ओशो का मर्म तेरे जीवन में उतरा है, न किसी और का।
तू आज भी “Original Vichar” सुन-सुनकर अपनी ही दुकान चला रहे हैं।
ओशो ने स्वयं कहा था —
“Listen to me, but don’t follow me blindly.”
तो फिर अंधानुकरण क्यों?
और आज के सबसे Logical, समकालीन और ज्वलंत मुद्दों पर बोलने वाले व्यक्ति को “सस्ती copy” कहना क्या दर्शाता है?
क्या तुम सच में जानते हैं कि आप किसके बारे में बात कर रहे हैं?
🔹 ओशो / आचार्य प्रशांत
•ओशो के पास कम्यून था, सैकड़ों संन्यासी थे।
•कृष्णमूर्ति के पास curated halls थे, elite audience थी, और राजनीति से दूरी का luxury था।
लेकिन आचार्य प्रशांत?
•Digital battlefield में अकेले खड़े हैं। Live sessions में हज़ारों unfiltered सवाल लेते हैं।
•हर चीज़ recorded है, फिर भी 8-second clips बनाकर संदर्भ से काटकर हमला किया जाता है।
•आज का सबसे बड़ा माध्यम algorithm है, जो “feel good” wellness industry को promote करता है।
और आचार्य जी उसी industry को expose कर रहे हैं।
•बिना किसी political backing, बिना foreign buffer के — भारत की जड़ समस्याओं पर सीधी बात कर रहे हैं:
जाति, धर्म, मांसाहार-उपभोगवाद, स्त्री-स्वतंत्रता, Climate Crisis।
कोई चमत्कार नहीं।
कोई aura-chakra की कहानी नहीं।
कोई पिछले जन्म का रहस्य नहीं।
सिर्फ़ तर्क।
सिर्फ़ आज की हक़ीक़त।
@Advait_Prashant ये तो इतना सब कर रहें हैं और तुम ? तुम क्या कर रहे हो - आचार्य प्रशांत के नाम से रोटी पानी की व्यवस्था?
तू confusion फैला रहा क्योंकि तुझ में सच सुनने की हिम्मत नहीं। Free Press Journal में कपिल जोशी ने लिखा है—'The Unique Mandate: The Difficulty Of Acharya Prashant's Role' ये uniquely arduous है, कोई copy नहीं, नया युद्धक्षेत्र है। डिजिटल chaos, पहचान-प्रेरित हमले, वेलनेस इंडस्ट्री का बैकलैश, संस्था चलाने का बोझ सब झेल रहे हैं बिना समझौते।
तेरे जैसे सारे 'ओशो लवर' जो सिर्फ सुनते हैं लेकिन बदलते नहीं, लेकिन आज आचार्य जी आग बनकर इस भारतवर्ष को रोशन करने की कोशिश कर रहे कहीं तो हम पिघल जायें इसी कोशिश में।
आचार्य जी सच के बंदे हैं और सच का बंदा जंगल में शेर होता है उनकी दहाड़ तुम्हारे जैसे चमगादड़ों की नींद उड़ा रही है - सच की आग सबको जला रही है fake spirituality, neta-baba nexus, ego की दुकानें। 🔥🐕🦺💥
पढ़ ले पूरा लेख, शायद तेरी आँखें खुल जाएँ:
https://t.co/hYtKDKdfzT
#AcharyaPrashant
@sachinsgaur ये जो फोटो में चीख रहा है, तू ही है न, सचिन 🫣
देख, तुम्हारे रजनीश क्या कर रहे हैं तुम्हारे साथ।
क्या आचार्य प्रशांत भी ये सब करते हैं?
तो कॉपी कैसे बोल रहा है?
हाँ, तू ज़रूर किसी महामूरख का जेरॉक्स लगता है
Osho बाबा अपने लातों के स्पर्श मात्र से मुक्ति दिलाया करते थे।
वहीं आचार्य प्रशांत जी हमारे जीवन से जुड़े हर प्रश्न का तार्किक, वैज्ञानिक और स्पष्ट उत्तर देते हैं। लोगों से जमीनी स्तर पर बात करते हैं, उन्हें गले लगा लेते हैं।
सचिन तूने सोच भी कैसे लिया कि कोई ओशो (जादू वाले बाबा) की बराबरी कर सकता है।
काश तू होता तो तुझे भी अपनी लात के स्पर्श से दिव्य अनुभूतियां करवा देते ओशो बाबा।
@sachinsgaur सचिन, या तो तुम एकदम बुद्धिहीन हो, या चतुर बनने की नाकाम कोशिश में हो!
ओशो के विचार इंटरनेट पर हैं इसीलिए आचार्य प्रशांत को सुनने की बहुत जरूरत है,— ओशो ने अध्यात्म को सेक्स, कविता और अंधविश्वास की चाशनी में लपेट दिया है और तुम चाट रहे हो और आचार्य प्रशांत तुम्हारे नशे छुड़वा रहे हैं!
सचिन, आगे सुनो -
पुनर्जन्म, कुंडलिनी साँप जैसा उठना, चक्र, पिछले जन्मों की यादें (खुद दावा: तिब्बती मॉन्क थे, तीसरी आँख से खोपड़ी फटी) — सब literal फैक्ट की तरह पेश किए थे ओशो ने
1. पुनर्जन्म = बिना प्रमाण की कहानी
अनुभव कहकर मिथक को तथ्य बना देना।
2. कुंडलिनी = काल्पनिक ऊर्जा-सर्प
प्रतीक को शारीरिक सच्चाई की तरह बेचना।
3. चक्र = शरीर में अनदेखे पावर-सेंटर
जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं।
4. आभा/वाइब्रेशन = माप से परे दावे
नाप नहीं सकते, पर मानना होगा।
5. टेलीपैथी = मन पढ़ने का संकेत
परामनोविज्ञान को आध्यात्मिक संभावना कहना।
6. सिद्धियाँ = चमत्कार को ‘संभव’ छोड़ना
साफ़ इनकार नहीं, बस नैतिक चेतावनी।
7. गुरु-ऊर्जा = व्यक्तित्व को रहस्य बनाना
मनोवैज्ञानिक प्रभाव को अलौकिक रंग देना।
8. ध्यान = गुप्त आध्यात्मिक टेक्नोलॉजी
सामान्य मानसिक अभ्यास को रहस्यवादी पैकेजिंग।
9. “तर्क सीमित है” = आलोचना से बचाव
जब सवाल आए, तो बुद्धि को ही कटघरे में खड़ा कर दो।
10. ज्योतिष= "लीजिटिमेट साइंस", एनलाइटेंड मौत का समय चुन सकते हैं — प्स्यूडोसाइंस + सुपरस्टिशन।
दुनिया ओशो की तरफ क्यों आकर्षित होती है?
गोरों की भीड़, 93 रोल्स रॉयस, अमीरों का गुरु, लग्जरी कम्यून — राल टपकती है ऐसे शो-ऑफ पर। लेकिन असल वेदांत?
अब सचिन, सद्गुरु की सुन लो-
आज के युग में प्स्यूडोसाइंस और अंधविश्वास के सबसे बड़े प्रचारकों में एक ऊंचा नाम है बस!
ये आदमी हर सनातनी के मुँह पर थूक देता है ये बोलकर कि
"गीता उपनिषद क्यों पढ़ना है?
अपनी शरीर में सारा ज्ञान है!"
गुरु माने वो जो रौशनी दे
और जो रौशनी से दूर करे वो कौन हुआ फिर?
और ये परिभाषा स्वयं उपनिषद हमें देते हैं
भारतीयों की जिंदगी पर लानत है कि ऐसे आदमी के नाम के पीछे गुरु लिखा है
1. ग्रन्थ मत पढ़ना
2. मुर्दे को जिंदा कर दूंगा
3. पानी में मेमोरी है
4. ग्रहण में खाना जहर है, (कोई गोरा मरा आजतक?)
5. चुंबकीय क्षेत्र खून दिमाग में खींचता है
6. पैर इस दिशा में करके सोना
सूची बहुत लंबी है
ये कहता है कभी स्कूल नहीं गया, प्रमाण सामने है, और अनपढ़ सब ताली बजाते हैं!
समाज अगर ज़रा भी जगे हुए लोगों का होता, तो ऐसे आदमी की तस्वीर आचार्य प्रशांत के साथ रखने पर जेल हो जाती!
अब असली बात सुनो:
जिसे "सस्ती कॉपी" बोल रहे हो, वो घर-घर गीता पहुंचा रहा है आचार्य प्रशांत: सिंपल, सीधा, साफ वेदांत — बिना किसी मिलावट के।
कोई रोल्स रॉयस नहीं, कोई शो-ऑफ नहीं — सिर्फ तर्क, स्पष्टता और स्क्रिप्चर।
▪️आज 2 लाख+ लोग उनकी लाइव गीता सेशंस में रोज/रेगुलर जुड़ते हैं।
▪️कुल रीच: 10 करोड़+ लोगों के दिलों में — सोशल मीडिया पर 100M+ फॉलोअर्स, ऐप पर मिलियंस डाउनलोड्स।
▪️दुनिया का सबसे बड़ा ऑनलाइन गीता एग्जाम (वर्ल्ड रिकॉर्ड), 17 रूपों की गीता + 60+ उपनिषद पढ़ाते हैं। अंधविश्वास (पुनर्जन्म, कुंडलिनी, ज्योतिष) को सीधा काटते हैं।
ओशो/सद्गुरु की तरह कहानियाँ नहीं — "अभी, यहीं समझो, बदलो।" करोड़ों घरों तक शुद्ध वेदांत पहुंचा रहे हैं।
भाई, तुम जैसे लोग ओशो की लग्जरी और सद्गुरु की "मिस्टिक" स्टोरी पर राल टपकाते हो, लेकिन आचार्य प्रशांत जैसे सिंपल टीचर से चिढ़ते हो क्योंकि वो तुम्हारे अंदर के अहंकार और अंधभक्ति को बेनकाब करते हैं। सस्ती कॉपी नहीं, असली सुधार है।अगर हिम्मत है, तो खुद गीता पढ़ो, लाइव सेशन जॉइन करो। वरना बस ट्वीट करके लोगों को भ्रमित करो अपने echo chamber झूठ फैलाते रहो।
सुधर जाओ!
दुनिया के फीडबैक ने आखिरकार तेरे 'ज्ञानचक्षु' पर जमी व्हाट्सएप वाली धूल झाड़ ही दी आशा रखती हूं! आचार्य प्रशांत जी अपने आप में एक ब्रांड है! दुनियाभर के सारे ओंगे पोंगे एक तरफ और मेरे आचार्य प्रशांत जी एकतरफ, जो निरंतर भेड़चाल से हटना सिखा रहा है और तू आया है उसे भीड़ के हिस्सा बनाने और सिर्फ हिस्सा भर नहीं compare भी कर डाला बिना सोचे समझे कुछ भी पोस्ट कर दिया?
@sachinsgaur 93 Rolls Royce, commune scandals, bio-terrorism, contradictory statements - यह है तुम्हारे ओशो का legacy.
आचार्य प्रशांत: शुद्ध वेदांत, zero controversies, logical consistency.
Entertainment चाहिए तो Netflix देख लो, Liberation चाहिए तो AP सुनो.
@sachinsgaur बिल्कुल सही कहा, जब इतनी सारी ध्यान विधियां करेगा कोई तो कन्फ्यूज (confuse) तो हो ही जाएगा।
मैं भी कन्फ्यूज हूं ओशो की ध्यान विधियां परम मोक्ष के लिए या परम भ्रम के लिए 😅
@sachinsgaur ओशो = अंधविश्वास + रहस्यवाद + आत्मा को गंदी-धुली होने वाली वस्तु मानना।
आचार्य प्रशांत = वेदांत + तर्क + मान्यतारहित स्पष्टता।
जो दोनों को एक तराजू में रखे, वो या तो दर्शन नहीं जानता
या जानबूझकर भ्रम फैला रहा है।
*ओशो*
ओशो को ‘सिर्फ आध्यात्मिक गुरु’ बताना अधूरा चित्र है। उन्होंने कई बार ज्योतिष, ऊर्जा-चक्र, रहस्यमय शक्तियों और चमत्कार जैसे विषयों को भी बढ़ावा दिया, जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। उनके आश्रम और आंदोलन के साथ जुड़े कई विवाद—धन, सत्ता और अंधभक्ति—भी सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा हैं।
*आचार्य प्रशांत*
1)गीता, उपनिषद, बुद्ध आदि की शिक्षाओं को आधुनिक भाषा और उदाहरणों में समझाया, ताकि आज का युवा भी उन्हें व्यावहारिक जीवन में लागू कर सके।
2)जागृति को अंध-आस्था से अलग कर तर्क, आत्म-परीक्षण और ईमानदार प्रश्नों पर आधारित किया—“मानो मत, समझो।”
ओशो: "Master या friend की ज़रूरत है — जो हाथ थामे, कहे 'डरो मत।' Master being share करता है।
AP: लगातार कहते हैं — "मुझसे मत जुड़ो, सत्य से जुड़ो। मैं mirror हूं, magnet नहीं।"
ओशो की असलियत: ओशो ने ego dissolution का दर्शन दिया — पर साथ ही एक commune बनाया जिसकी अपनी distinct collective identity थी। यह paradox खुद उनकी teachings को contradict करता है।
AP का कोई commune नहीं। कोई headquarters नहीं जहाँ शिष्य "orbit" करें। Guru जितना transparent, teaching उतनी safe।
@sachinsgaur “सस्ती कॉपी” कहने वाले भैया, आपकी रिसर्च भी सस्ती है।
ओशो = पास्ट-लाइफ़ + बुद्धाफील्ड + किरलियन फ़ोटो;
Acharya ji = “किसके लिए?” का ब्लेड।
एक मेटाफिज़िकल सास-बहू, दूजा अहंकार का सर्जिकल स्ट्राइक।
इंटरनेट पर ओशो मिल गया तो समझदारी का लाइसेंस नहीं मिल गया।
@sachinsgaur आचार्य जी कड़वे सच है, जो हर किसी को बर्दाश्त नहीं होता, आचार्य जी पूरी दुनिया पर आज छा रहे हैं, तो बहुत लोगों के पिछवड़े में आग लगना लाज़मी है 😅
तो तुझे एक सुझाव दूं, अपना पिछवाड़ा बचा के निकल ले, नहीं तो तेरी धज्जियां उड़ जाएंगी। 😅
पर्यावरण और पशु करुणा के मामले में:
यहाँ तो तुलना ही नहीं बनती। आचार्य प्रशांत शायद भारत के एकमात्र प्रमुख आध्यात्मिक शिक्षक हैं जिन्होंने पर्यावरण और पशु अधिकारों को अपने अध्यात्म का केंद्रीय अंग बनाया है। वीगनिज़्म पर उनका आग्रह किसी ट्रेंड से नहीं, वेदांत से आता है — अगर अहंकार का अर्थ है शरीर से तादात्म्य, तो पशुओं का शोषण उसी अहंकार की चरम अभिव्यक्ति है जहाँ "मेरा शरीर, मेरा स्वाद" को दूसरे जीव के प्राणों से ऊपर रखा जाता है।
जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई, औद्योगिक पशुपालन — इन सब पर वे लगातार लिखते और बोलते हैं, और यह उनके लिए अध्यात्म से अलग कोई "सामाजिक कार्य" नहीं, बल्कि अध्यात्म का अनिवार्य परिणाम है।
तुझे समझ भी नहीं आयेगा, क्योंकि व्यक्ति जब लालच और स्वार्थ से दुनिया को देखता है तो उसे सच नज़र नहीं आता है
जिन रजनीश ने इतने अंधविश्वास फैलाएं उनको दार्शनिक कैसे कहूँ? वो एक प्रभावी वक्ता हो सकते हैं
पहले यह देख कि ओशो की बातों और विज्ञान में कितना मतभेद है:
पुनर्जन्म
ओशो:
तुम पहले भी कई बार जन्म ले चुके हो। ध्यान में पिछले जन्म याद आ सकते हैं।
विज्ञान:
पिछले जन्म का कोई सबूत नहीं है।
“पिछले जन्म की याद” ज़्यादातर दिमाग की कल्पना और स्मृति है।
2️⃣ कर्म का नियम
ओशो:
जो करोगे वही लौटेगा। ब्रह्मांड हर कर्म का हिसाब रखता है।
विज्ञान:
ऐसा कोई “कॉस्मिक अकाउंट सिस्टम” नहीं है।
हाँ, गलत काम करोगे तो समाज, कानून और मनोवैज्ञानिक असर से परिणाम मिल सकते हैं — पर कोई अदृश्य शक्ति हिसाब नहीं रखती है।
3️⃣ कुंडलिनी
ओशो:
रीढ़ में एक ऊर्जा सोई है। ध्यान से वह ऊपर उठती है और इंसान बदल जाता है।
विज्ञान:
रीढ़ में ऐसी कोई ऊर्जा नहीं है।
जो अनुभव लोग बताते हैं, उन्हें नर्वस सिस्टम की प्रतिक्रिया या भावनात्मक उत्तेजना है।
4️⃣ सात चक्र
ओशो:
शरीर में सात ऊर्जा केंद्र हैं। इनके खुलने से चेतना बढ़ती है।
विज्ञान:
ऐसे कोई ऊर्जा केंद्र शरीर में नहीं है।
5️⃣ ऑरा / वाइब्रेशन
ओशो:
हर इंसान की एक ऊर्जा-आभा होती है। कुछ लोगों की ऊर्जा अलग महसूस होती है।
विज्ञान:
ऐसी कोई “आभा” मापी नहीं है।
जो महसूस होता है, वह मनोवैज्ञानिक असर, व्यक्तित्व या माहौल का प्रभाव हो सकता है।
6️⃣ टेलीपैथी
ओशो:
गहरे ध्यान में बिना बोले भी समझ हो सकती है।
विज्ञान:
दिमाग से दिमाग सीधे बात करने का कोई सबूत नहीं।
लोग चेहरे, हावभाव और अंदाज़ से समझ लेते हैं — उसे टेलीपैथी नहीं कहते।
7️⃣ सिद्धियाँ
ओशो:
अलौकिक शक्तियाँ होती हैं
विज्ञान:
ऐसी शक्तियों का कोई प्रमाण नहीं।
8️⃣ गुरु की ऊर्जा
ओशो:
गुरु की मौजूदगी से अंदर बदलाव आ सकता है।
विज्ञान:
“ऊर्जा ट्रांसफर” का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं।
@sachinsgaur पहली बात तो किसी के बारे में बोलने से पहले उसके बारे में थोड़ा जान लो और दूसरी बात comparison बराबर की स्तर में की जाती है।
आचार्य प्रशांत सिर्फ़ एक फिलॉसफर, अद्वैत शिक्षक ही नहीं वो क्लाइमेट एक्टिविस्ट भी है, तेरे ओशो ने कितनी बार बोला है क्लाइमेट के ऊपर?
@sachinsgaur और एक बात बता दूं तुझे की आचार्य प्रशांत ने 10lac janwar ki जान बचाई है हालांकि ये डाटा पुरानी है अभी तो और भी बढ़ गए होंगे, आचार्य प्रशांत को PETA का अवॉर्ड भी मिला हुआ है जा के देख ले, ये तो बस 0.000% झलकियां थी बस खुद जा के पड़ ले और देख ले और क्या क्या किया है उन्होंने
ओशो: Dynamic Meditation, catharsis, dance, music — रोज़ की practice से ego dissolve होगा। "Staircases to the same view।" (Bio Glance)
AP: कोई technique नहीं। सिर्फ एक सवाल — "किसके लिए?" यह सवाल questioner को expose करता है, सवाल collapse हो जाता है। (Acharya Prashant)
Real Problem: ओशो की techniques करते-करते लोग "अच्छे meditator" बन गए — अहंकार नया रूप ले लेता है।
AP की inquiry में छुपने की जगह नहीं। कोई technique नहीं = अहंकार के लिए कोई नया hobby नहीं।