Greater Noida, Uttar Pradesh: On Mahashivratri, Philosopher and author Acharya Prashant combined knowledge, art, and spirituality through a special theatrical performance and exhibition, educating 2,000 selected participants, sharing Vedantic insights, answering questions, and demonstrating the true essence of Shivtatva while signing over 10,000 books
Osho बाबा अपने लातों के स्पर्श मात्र से मुक्ति दिलाया करते थे।
वहीं आचार्य प्रशांत जी हमारे जीवन से जुड़े हर प्रश्न का तार्किक, वैज्ञानिक और स्पष्ट उत्तर देते हैं। लोगों से जमीनी स्तर पर बात करते हैं, उन्हें गले लगा लेते हैं।
सचिन तूने सोच भी कैसे लिया कि कोई ओशो (जादू वाले बाबा) की बराबरी कर सकता है।
काश तू होता तो तुझे भी अपनी लात के स्पर्श से दिव्य अनुभूतियां करवा देते ओशो बाबा।
वैसे मुझे मौक़ापरस्त लोगों से कोई मतलब नहीं होता।
लेकिन क्योंकि इसमें मेरे शिक्षक मुझे नया जन्म देने वाले व्यक्ति @Advait_Prashant जी का ज़िक्र है, इसलिए स्वयं को लिखने से रोक नहीं पाई। बाकी लोगों से मुझे कोई लेना-देना नहीं।
मैं बताती हूँ कि लोग आचार्य प्रशांत को क्यों सुनते हैं —
🔹 क्यों सुनते हैं लोग आचार्य प्रशांत को?
•लाखों-करोड़ों छात्र ऐसे हैं, जिनके जीवन को अंधकार में जाने से आचार्य जी ने रोका है।
•मेरे जैसी लाखों महिलाएँ हैं, जिन्होंने उड़ना सीखा है; जिन्हें नया जन्म मिला है।
•लाखों जानवरों को बचाया गया है और बचाया जा रहा है।
•Climate Change जैसे गंभीर विषय पर, जहाँ भारत में खुलकर बात तक नहीं होती, वहाँ आचार्य जी इसे आम लोगों तक पहुँचा रहे हैं।
•हज़ारों लोगों के रिश्ते बेहतर हुए हैं।
•जहाँ आज का युवा वेदांत, उपनिषद, भगवद्गीता जैसे ग्रंथों से दूर भाग रहा है, वहाँ विशुद्ध अध्यात्म को युवाओं तक पहुँचाया जा रहा है।
सूची बहुत लंबी है। तू चाहें तो नीचे दिए गए लिंक पर पूरा लेख पढ़ सकता हैं।
A rigorous exposition of AP Framework: Advaita stripped of metaphysics and refined into a relentless inquiry into ego and suffering.
👉🏻 Read here: https://t.co/DXlrl8bxlC
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अब कुछ स्पष्ट बातें:
तुम्हारी पोस्ट देखकर यही लगता है कि न तो ओशो का मर्म तेरे जीवन में उतरा है, न किसी और का।
तू आज भी “Original Vichar” सुन-सुनकर अपनी ही दुकान चला रहे हैं।
ओशो ने स्वयं कहा था —
“Listen to me, but don’t follow me blindly.”
तो फिर अंधानुकरण क्यों?
और आज के सबसे Logical, समकालीन और ज्वलंत मुद्दों पर बोलने वाले व्यक्ति को “सस्ती copy” कहना क्या दर्शाता है?
क्या तुम सच में जानते हैं कि आप किसके बारे में बात कर रहे हैं?
🔹 ओशो / आचार्य प्रशांत
•ओशो के पास कम्यून था, सैकड़ों संन्यासी थे।
•कृष्णमूर्ति के पास curated halls थे, elite audience थी, और राजनीति से दूरी का luxury था।
लेकिन आचार्य प्रशांत?
•Digital battlefield में अकेले खड़े हैं। Live sessions में हज़ारों unfiltered सवाल लेते हैं।
•हर चीज़ recorded है, फिर भी 8-second clips बनाकर संदर्भ से काटकर हमला किया जाता है।
•आज का सबसे बड़ा माध्यम algorithm है, जो “feel good” wellness industry को promote करता है।
और आचार्य जी उसी industry को expose कर रहे हैं।
•बिना किसी political backing, बिना foreign buffer के — भारत की जड़ समस्याओं पर सीधी बात कर रहे हैं:
जाति, धर्म, मांसाहार-उपभोगवाद, स्त्री-स्वतंत्रता, Climate Crisis।
कोई चमत्कार नहीं।
कोई aura-chakra की कहानी नहीं।
कोई पिछले जन्म का रहस्य नहीं।
सिर्फ़ तर्क।
सिर्फ़ आज की हक़ीक़त।
@Advait_Prashant ये तो इतना सब कर रहें हैं और तुम ? तुम क्या कर रहे हो - आचार्य प्रशांत के नाम से रोटी पानी की व्यवस्था?
तू confusion फैला रहा क्योंकि तुझ में सच सुनने की हिम्मत नहीं। Free Press Journal में कपिल जोशी ने लिखा है—'The Unique Mandate: The Difficulty Of Acharya Prashant's Role' ये uniquely arduous है, कोई copy नहीं, नया युद्धक्षेत्र है। डिजिटल chaos, पहचान-प्रेरित हमले, वेलनेस इंडस्ट्री का बैकलैश, संस्था चलाने का बोझ सब झेल रहे हैं बिना समझौते।
तेरे जैसे सारे 'ओशो लवर' जो सिर्फ सुनते हैं लेकिन बदलते नहीं, लेकिन आज आचार्य जी आग बनकर इस भारतवर्ष को रोशन करने की कोशिश कर रहे कहीं तो हम पिघल जायें इसी कोशिश में।
आचार्य जी सच के बंदे हैं और सच का बंदा जंगल में शेर होता है उनकी दहाड़ तुम्हारे जैसे चमगादड़ों की नींद उड़ा रही है - सच की आग सबको जला रही है fake spirituality, neta-baba nexus, ego की दुकानें। 🔥🐕🦺💥
पढ़ ले पूरा लेख, शायद तेरी आँखें खुल जाएँ:
https://t.co/hYtKDKdfzT
#AcharyaPrashant
@sachinsgaur सचिन, या तो तुम एकदम बुद्धिहीन हो, या चतुर बनने की नाकाम कोशिश में हो!
ओशो के विचार इंटरनेट पर हैं इसीलिए आचार्य प्रशांत को सुनने की बहुत जरूरत है,— ओशो ने अध्यात्म को सेक्स, कविता और अंधविश्वास की चाशनी में लपेट दिया है और तुम चाट रहे हो और आचार्य प्रशांत तुम्हारे नशे छुड़वा रहे हैं!
सचिन, आगे सुनो -
पुनर्जन्म, कुंडलिनी साँप जैसा उठना, चक्र, पिछले जन्मों की यादें (खुद दावा: तिब्बती मॉन्क थे, तीसरी आँख से खोपड़ी फटी) — सब literal फैक्ट की तरह पेश किए थे ओशो ने
1. पुनर्जन्म = बिना प्रमाण की कहानी
अनुभव कहकर मिथक को तथ्य बना देना।
2. कुंडलिनी = काल्पनिक ऊर्जा-सर्प
प्रतीक को शारीरिक सच्चाई की तरह बेचना।
3. चक्र = शरीर में अनदेखे पावर-सेंटर
जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं।
4. आभा/वाइब्रेशन = माप से परे दावे
नाप नहीं सकते, पर मानना होगा।
5. टेलीपैथी = मन पढ़ने का संकेत
परामनोविज्ञान को आध्यात्मिक संभावना कहना।
6. सिद्धियाँ = चमत्कार को ‘संभव’ छोड़ना
साफ़ इनकार नहीं, बस नैतिक चेतावनी।
7. गुरु-ऊर्जा = व्यक्तित्व को रहस्य बनाना
मनोवैज्ञानिक प्रभाव को अलौकिक रंग देना।
8. ध्यान = गुप्त आध्यात्मिक टेक्नोलॉजी
सामान्य मानसिक अभ्यास को रहस्यवादी पैकेजिंग।
9. “तर्क सीमित है” = आलोचना से बचाव
जब सवाल आए, तो बुद्धि को ही कटघरे में खड़ा कर दो।
10. ज्योतिष= "लीजिटिमेट साइंस", एनलाइटेंड मौत का समय चुन सकते हैं — प्स्यूडोसाइंस + सुपरस्टिशन।
दुनिया ओशो की तरफ क्यों आकर्षित होती है?
गोरों की भीड़, 93 रोल्स रॉयस, अमीरों का गुरु, लग्जरी कम्यून — राल टपकती है ऐसे शो-ऑफ पर। लेकिन असल वेदांत?
अब सचिन, सद्गुरु की सुन लो-
आज के युग में प्स्यूडोसाइंस और अंधविश्वास के सबसे बड़े प्रचारकों में एक ऊंचा नाम है बस!
ये आदमी हर सनातनी के मुँह पर थूक देता है ये बोलकर कि
"गीता उपनिषद क्यों पढ़ना है?
अपनी शरीर में सारा ज्ञान है!"
गुरु माने वो जो रौशनी दे
और जो रौशनी से दूर करे वो कौन हुआ फिर?
और ये परिभाषा स्वयं उपनिषद हमें देते हैं
भारतीयों की जिंदगी पर लानत है कि ऐसे आदमी के नाम के पीछे गुरु लिखा है
1. ग्रन्थ मत पढ़ना
2. मुर्दे को जिंदा कर दूंगा
3. पानी में मेमोरी है
4. ग्रहण में खाना जहर है, (कोई गोरा मरा आजतक?)
5. चुंबकीय क्षेत्र खून दिमाग में खींचता है
6. पैर इस दिशा में करके सोना
सूची बहुत लंबी है
ये कहता है कभी स्कूल नहीं गया, प्रमाण सामने है, और अनपढ़ सब ताली बजाते हैं!
समाज अगर ज़रा भी जगे हुए लोगों का होता, तो ऐसे आदमी की तस्वीर आचार्य प्रशांत के साथ रखने पर जेल हो जाती!
अब असली बात सुनो:
जिसे "सस्ती कॉपी" बोल रहे हो, वो घर-घर गीता पहुंचा रहा है आचार्य प्रशांत: सिंपल, सीधा, साफ वेदांत — बिना किसी मिलावट के।
कोई रोल्स रॉयस नहीं, कोई शो-ऑफ नहीं — सिर्फ तर्क, स्पष्टता और स्क्रिप्चर।
▪️आज 2 लाख+ लोग उनकी लाइव गीता सेशंस में रोज/रेगुलर जुड़ते हैं।
▪️कुल रीच: 10 करोड़+ लोगों के दिलों में — सोशल मीडिया पर 100M+ फॉलोअर्स, ऐप पर मिलियंस डाउनलोड्स।
▪️दुनिया का सबसे बड़ा ऑनलाइन गीता एग्जाम (वर्ल्ड रिकॉर्ड), 17 रूपों की गीता + 60+ उपनिषद पढ़ाते हैं। अंधविश्वास (पुनर्जन्म, कुंडलिनी, ज्योतिष) को सीधा काटते हैं।
ओशो/सद्गुरु की तरह कहानियाँ नहीं — "अभी, यहीं समझो, बदलो।" करोड़ों घरों तक शुद्ध वेदांत पहुंचा रहे हैं।
भाई, तुम जैसे लोग ओशो की लग्जरी और सद्गुरु की "मिस्टिक" स्टोरी पर राल टपकाते हो, लेकिन आचार्य प्रशांत जैसे सिंपल टीचर से चिढ़ते हो क्योंकि वो तुम्हारे अंदर के अहंकार और अंधभक्ति को बेनकाब करते हैं। सस्ती कॉपी नहीं, असली सुधार है।अगर हिम्मत है, तो खुद गीता पढ़ो, लाइव सेशन जॉइन करो। वरना बस ट्वीट करके लोगों को भ्रमित करो अपने echo chamber झूठ फैलाते रहो।
सुधर जाओ!
@sachinsgaur 93 Rolls Royce, commune scandals, bio-terrorism, contradictory statements - यह है तुम्हारे ओशो का legacy.
आचार्य प्रशांत: शुद्ध वेदांत, zero controversies, logical consistency.
Entertainment चाहिए तो Netflix देख लो, Liberation चाहिए तो AP सुनो.
@Sumitadey98@sachinsgaur ओह, तो पुनर्जन्म, कर्म-अकाउंट, चक्र-कुंडलिनी, ऑरा, टेलीपैथी, गुरु-ऊर्जा, “ब्रह्मांड तुम्हारी सुनता है” जैसी बातों को “ओरिजिनल ज्ञान” मानकर बाकी सबको सस्ती कॉपी कहना ही समझदारी है?
तो बताइए: यहाँ सच की खोज है, या अपने पसंदीदा गुरू के इर्द-गिर्द बना आरामदायक विश्वास-किला?
ओशो ने खुद कहा था कि वे परंपराओं को तोड़ने आए है लेकिन उसका मॉडल क्या था? करिश्मा, रहस्य और बहुत सारी बकवास।
आचार्य प्रशांत क्या करते हैं? गीता, उपनिषद् के एक-एक श्लोक पर आज के संदर्भ में बात। न कोई मेथड, न ही कोई चमत्कार।
तीसरा आदमी तो गिनती में ही नहीं है, उसे यहां चिपकाना तेरी बेवकूफ़ी का प्रमाण है
“सस्ती कॉपी” बोलने से पहले ओशो का असली माल देख ले 😂
ओशो के “ओरिजिनल विचार” क्या थे? चलो याद दिला दूँ:
• Meditation से past-life memory खुल सकती है
• आज की suffering पिछले जन्म की EMI है
• Karma = Universe का moral CBI
• Kundalini = spine में चढ़ती literal energy
• Chakras = invisible service centers
• Aura & vibrations = spiritual WiFi signal
और इतिहास भी देख — 1984 Rajneeshee bioterror attack. उनके कम्यून के वरिष्ठ अनुयायियों ने चुनाव प्रभावित करने के लिए 751 लोगों को Salmonella से बीमार किया. U.S. इतिहास का सबसे बड़ा bioterror attack. Guru-centric insulated structure कहाँ जा सकता है, इसका उदाहरण।
चैट देखनी है?
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Acharya Prashant operates under entirely different conditions. He is doing philosophy in a new kind of warzone, one shaped not by state surveillance or institutional control, but by digital volatility, ideological fragmentation, and an audience that is both vast and unfiltered.
Osho openly promoted astrology as science, defended the literal existence of chakras and auras, spoke of remembering past lives, and described enlightenment as producing measurable energetic fields.
https://t.co/PZHS4qWFjl
ओशो और आचार्य प्रशांत में जमीन-आसमान का फर्क है:
ओशो: ओशो की शिक्षाएं अंधविश्वासों और छद्म-वैज्ञानिक दावों से भरी थीं। उन्होंने ज्योतिष को वैध विज्ञान बताया, पूर्वजन्म, आभामंडल, चक्रों को वास्तविक ऊर्जा केंद्र, और अटलांटिस को ऐतिहासिक सच्चाई के रूप में प्रस्तुत किया।
जबकि ओशो ने संगठित धर्म और उसके कर्मकांडों का मजाक उड़ाया, उन्होंने उन्हें अपने स्वयं के रहस्यमय विश्वासों और अनुष्ठानों के ढांचे से प्रतिस्थापित कर दिया।
आचार्य प्रशांत जी: वे इन सभी सहारों को अस्वीकार करते हैं। कोई चमत्कार नहीं, कोई पौराणिक कथाएं नहीं, कोई चक्र नहीं, कोई पूर्वजन्म नहीं, कोई दैवीय सुरक्षा नहीं। वे अंधविश्वास के प्रति निजी तौर पर कोई छूट नहीं देते — उनकी अस्वीकृति संपूर्ण और सुसंगत है।
शिक्षण को केवल अपनी सुसंगतता, अपनी प्रकाश डालने की क्षमता से काम करना होगा, या बिल्कुल नहीं।
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अंतर: जबकि ओशो ऊर्जा संचरण और पूर्वजन्म की कहानियों से मोहित कर सकते थे, आचार्य प्रशांत इनमें से किसी भी सुरक्षात्मक परत के बिना कार्य करते हैं।"
ओशो ने अंधविश्वास को नया पैकेज दिया। आचार्य प्रशांत हर अंधविश्वास को ध्वस्त करते हैं। यही फर्क है।
पूर्ण लेख पढ़ें: https://t.co/jWNLCZDoWp
"Sasti Copy" का रट्टा लगाने से पहले ज़रा तथ्यों की Post-Mortem Report देख लो। तुम्हारी 'अंधभक्ति' का इलाज करने के लिए मैंने दुनिया के सबसे निष्पक्ष AI Models (ChatGPT & Claude) और National Media से ओशो और आचार्य प्रशांत (AP) की तुलना करवाई है।
परिणाम (Results) तुम्हारी नींद उड़ा देंगे:
1. अंधविश्वास की दुकान बनाम विज्ञान (Superstition vs Science): ओशो ने "भूत-प्रेत", "ज्योतिष" (Astrology) और "700 साल पुराने तिब्बती भिक्षु" होने के पाखंड को बेचा। AI साफ़ बता रहा है कि ओशो ने अंधविश्वास फैलाया, जबकि आचार्य प्रशांत ने उसकी सफाई की। सफाई करने वाले को कचरा फैलाने वाले की "कॉपी" कहना तुम्हारी बुद्धि का दिवालियापन है।
ChatGPT Proof: https://t.co/9xLPgHl9WX
2. दर्शन का कचरा (Philosophical Garbage): ओशो ने कहा "आत्मा गंदी हो जाती है" और "प्रेम आत्मा का आत्मा से होता है"। यह वेदांत का Basic Failure है। उपनिषद कहते हैं आत्मा नित्य शुद्ध है। ओशो को ABCD भी नहीं पता थी, और तुम उन्हें "Original" कहते हो? AP ने इस Spiritual Pollution को धोया है।
ChatGPT Proof: https://t.co/SAl80Sm39y
3. अपराधी बनाम सुधारक (Criminal vs Reformer): ओशो का 'कम्यून' (Rajneeshpuram) Bioterrorism (1984) और ड्रग्स का अड्डा था। आचार्य प्रशांत अकेले दम पर Climate Change और Environmentalism की लड़ाई लड़ रहे हैं।
ChatGPT Proof: https://t.co/KsTTc3R2fh
4. मीडिया का खुलासा (National Media Exposes Reality): Free Press Journal का यह आर्टिकल पढ़ो (अगर हिम्मत है)। यह साफ कहता है:
"Osho's teachings came saturated with superstitious and pseudoscientific claims... He promoted astrology as a legitimate science..." (ओशो ने ज्योतिष और अंधविश्वास को विज्ञान बताकर बेचा।)
इसके विपरीत, AP के बारे में मीडिया कहता है:
"Acharya Prashant stands alone... surrounded not by disciples... but by the noise of a civilisation that defends its illusions with unprecedented speed and ferocity." (आचार्य प्रशांत अकेले खड़े हैं... उस सभ्यता के शोर के खिलाफ जो अपने भ्रमों को बचाने के लिए उन पर हमला करती है।)
Read Full Article: https://t.co/ZBiAchxSiv
The "Rolls-Royce" Paradox of Osho
Osho’s lifestyle was a masterclass in hypocrisy. While teaching that the ego must be dissolved, he accumulated 93 Rolls-Royces and wore watches encrusted with diamonds.
It was an exploitation of wealthy, disillusioned Westerners who were essentially "buying" a feeling of enlightenment while funding a millionnaire's hobby.
An eye-opening read: https://t.co/49xAX9MSgi
तेरे जैसे मंदबुद्धि, अनपढ़, गँवार लोग ही ऐसी बेतुकी comparison कर सकते हैं, जहाँ दूर-दूर तक भी कोई तुलना हो ही नहीं सकती
तू इतना गँवार है कि तुजसे fact check भी नहीं किया जाता
आध्यात्मिक दृष्टि या वेदान्तिक दृष्टि से देखो तो आचार्य प्रशांत IIT के प्रोफेसर हैं और ओशो नर्सरी के शिक्षक, किसकी तुलना किसके साथ कर रहे हो? पर वही अनपढ़!
हर अंधविश्वासी को उसका तथाकथित गुरु सबसे बड़ा ही लगता है, Fact कोई देखना ही नहीं चाहता
कुछ AI tools से प्रश्न पूछा था आचार्य जी और ओशो के मध्य अंतर को लेकर, बिल्कुल पढ़ें उन्हें और अपनी गलतफहमी से बाहर आएँ
ChatGPT उत्तर: https://t.co/7LS865wk2S
Claude उत्तर: https://t.co/kcW0Y7HiTJ
इस आर्टिकल को भी पढ़ें ज़रूर: https://t.co/aeRKCGKkOa
@sachinsgaur Osho: A garbage of blind superstitons and beliefs.
At the core, Acharya Prashant teaches what the Upanishads taught: reject outer authority, question borrowed beliefs, and turn inward.
https://t.co/wp3blrMKik
भाई तेरी बुद्धि घुटनों में है क्या?
ओशो वो था जिसने "मुक्ति" और "सेक्स-लिबरेशन" के नाम पर लोगों को ड्रग्स, बच्चों का यौन शोषण, महिलाओं का शोषण, बायोटेररिज्म जैसा घिनौना अपराध और करोड़ों की लूट का क्रिमिनल कल्ट चलाया, Pseudo-spirituality की आड़ में destruction मचाया, और खुद को "भगवान" कहलवाकर एक जहरीला साम्राज्य बनाया जो आज भी सरवाइवर्स के ट्रॉमा और अपराधों की बदबू बिखेर रहा है!
@sachinsgaur Osho को पेड़ पर चढ़ के ‘enlightenment’ मिल गया था।
आचार्य की के session में आकर ये सब बोलते तो बड़ी झाड़ पड़ती।
सारा enlightenment का भूत उतर जाता।
सही में ‘no mind’ में पहुँच जाते भाई साहब।
खैर!
😅
“माइंड-वाइब्रेशन” जैसी बकवास को आध्यात्म कहकर बेचने वालों से पहले हिसाब ले।
Osho ने रहस्यवाद को मनगढ़ंत वैज्ञानिक शब्दों में पैक किया। आज उनकी वही क्लिप्स इंटरनेट पर पड़ी हैं।
और Acharya Prashant साफ कहते हैं - न चमत्कार, न ऊर्जा-तरंग, न पंथ।
समझना है तो उनका AP Framework देखिए:
https://t.co/kuWFHEtBNP
जहाँ पूरी चर्चा ego की जाँच, suffering की जड़ और प्रत्यक्ष आत्म-पड़ताल पर टिकी है। कोई mystical धुंध नहीं, सीधी चोट।
तुलना करना ही आयामगत भूल है।
जहाँ एक तरफ़ रहस्यवादी बकवास है, वहाँ दूसरी तरफ़ निर्मम आत्म-विश्लेषण।
एक दार्शनिक की तुलना तूने एक टोटकेबाज़ से कैसे कर दी?