It was not simply for water, it was about self-respect, self-emancipation, dignity of life; more than that it was for nation building through social revolution for equality!
20-March-1927
#MahadSatyagraha#JaiBhim
मनोज मुतसिर का चुनौती मैं एक्सेप्ट करता हूँ कर ले मुझसे डिबेट । जितने भी काल्पनिको का नाम लिया है सबके अस्तित्व से लेकर काग़ज़ी वीर बनने तक और भारत की ग़ुलामी में ब्राह्मणों के योगदान से लेकर जातिवाद, छुवाछूत से लेकर भारत के हरेक ग्लोबल इंडेक्स में पिछड़ने के कारण से लेकर। इलेक्ट्रॉनिक मेकनिकल इलेक्ट्रिकल से लेकर हरेक सेक्टर में पिछड़न�� से लेकर हरेक मुद्दे पर डिबेट को तैयार हूँ । आ जाना Sunday 7:30pm Rational World Youtube live me. जॉइन लिंक पिन रहेगा क्लिक करके जुड़ जाना और डिबेट कर जीतना एकतरफा गपोड़े हो सबका सबूत के साथ साबित करना ।
@ScienceJourney2 The architect of modern India who guaranteed every citizen: justice, liberty, equality, fraternity, and dignity of life!
The Bodhisattva who connected us to our roots in Dhamma!
Best wishes on Babasaheb Dr. B. R. Ambedkar Jayanti🙏❤️🙏
#AmbedkarJayanti#AmbedkarJayanti2025
The architect of modern India who guaranteed every citizen: justice, liberty, equality, fraternity, and dignity of life!
The Bodhisattva who connected us to our roots in Dhamma!
Best wishes on Babasaheb Dr. B. R. Ambedkar Jayanti🙏❤️🙏
#AmbedkarJayanti#AmbedkarJayanti2025
@ScienceJourney2 The greatest emperor who won the majority of Asia and influenced the rest of the world through his novel concept of 'Conquest by Moral Force' (Dhamma)!
Best wishes on #SamratAshokJayanti#Repeal_BTact1949
🙏❤️🙏
ब्राह्मणों की किसी प्राचीन किताब में #होली का जिक्र नहीं मिलता। फाल्गुन पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर स्त्री जलाने यानी काल्पनिक हिरण्यकश्यप की बहन #होलिका का #होलिकादहन कर सेलिब्रेट करने की कहानी अंग्रेजों के समय गढ़ी गई है।
होली दरअसल बुद्ध की अस्थिया साल के अंतिम पूर्णिमा के दिन महाबोधि बोधगया में प्रदर्शित की जाती थी जिसे देखने ��े लिए पूरे भारत से लोग आते थे इस दिन महिलाए आग जला कर गांव से बाहर उसे फेक देती थी ।
ये सेलिब्रेशन बुद्धिस्ट कैलेंडर (युगाब्द, शक संवत्, मालवा ) के अनुसार मनाया जाता था। (रिफरेन्स -ह्यूएनसंग की भारत यात्रा, अलबरूनी का भारत)
बुद्धिज्म में फाल्गुन पूर्णिमा इसलिए भी ख़ास है क्योकि इस दिन शिल्पकलाये इस तरह से डिज़ाइन की जाती थी की बुद्ध की अस्थिया हो या बुद्ध की मूर्ति, उसपर नेचु��ल किरणे इस तरह से पड़ती थी कि वो जगह सभी के देखने लिए अद्भुत नजारा बन जाती थी। लोग इसे बुद्ध का चमत्कार नाम से सेलिब्रेट करते थे।
याद रहे ब्राह्मणों का अपना कोई कैलेंडर तक नहीं है वो बुद्धिस्ट के कैलेंडर और उसकी तिथि का प्रयोग कर बुद्धिस्ट के ही पर्वों का अलग अलग कहानी बना कर हिन्दुईकरण कर रखे है इसलिए उनकी किसी पुरानी किताब में फाल्गुन पूर्णिमा में होलिका को जला कर सेलिब्रेट करने का जिक्र नहीं मिलता । हा स्त्री जलाने का सबूत उनकी किताबों में भरपूर मिलता है जैसे सती प्रथा पर इसका बुद्धिस्ट कैलेंडर फाल्गुन पूर्णिमा से कुछ भी लेना देना नहीं है।
भविष्य पुराण जिसकी किताब खुलते ही मिलावट का रोंदू रोना रोने लगते है क्योकि अकबर से लेकर अंग्रेजों तक को इन्होंने अपना हितैषी और भाई घोषित कर रखा है उसमे ये फाल्गुन पूर्णिमा का जिक्र तो करते है लेकिन ये होलिका जलाने का नहीं बल्कि ढूंढा राक्षसी को भगाने का जिक्र करते है।।
ऐसे में पूरी तरह साफ़ है की फाल्गुन पूर्णिमा पूरी तरह से बुद्धिज्म का है उसका ब्राह्मणीकरण करके स्त्री जलाने की फेक कथा कहानी जोड़कर सबको भ्रमित किया गया है ।
नोट: जिसका अपना कोई इतिहास नहीं होता वो दूसरो के तिथि का सही इतिहास दबा कर मनगढ़त काल्पनिकता के साथ जोड़ कर अपना बनाने की कोशिश करता है।
#Holi
#Holi2025
#HolikaDahan
#HolikaDahan2025
ईसापूर्व सैकड़ो महाविहार, स्तूप भारत में मिल
चुके है जबकि वैदिक मंदिर शैव य वैष्णो, शाक्त एक भी मंदिर नहीं मिले है तो
सवा�� यह है कि जब भारत के विभिन्न क्षेत्र के अलग अलग वर्ग के लोग बुद्धिज्म के स्तूप महाविहार बनवाते थे यानी बुद्ध धम्म को पूर्व बुद्ध को मानते थे तो आज महाबोधि महाविहार पर ब्राह्मणों का कब्जा क्यो?
#Repeal_BTact1949
#महाबोधि_मुक्ति_आंदोलन
#MahaBodhiMuktiAndolan
आज है ढेरो गिवअवे जितने का शानदार मौका । Freedom Fighter Mega Event 2025 का इंतजार खत्म । सभी फॉर्म भरने वाले कैंडिडट अपना ईमेल चेक करे। जॉइन लिंक ईमेल पर भेजा गया ���ै अगर आज दोपहर 12pm तक जॉइन लिंक नहीं मिलता तो Rational World यूट्यूब कम्युनिटी पोस्ट पर अपडेट करे ।
याद रहे पार्टिसिपेट करने वाले हरेक कैंडिडट को गिवअवे मिलेगा ही मिलेगा इसलिए ऐसा शानदार मौका हाथ से न जाने देवे।
आज 9 Feb 2025, 7pm on Rational World YT लाइव देखना न भूले।
3500 साल पुराने सीरिया में मिले बुद्धिज्म के सकेंत ।
चौक गए न ? ध्यान से अंतिम तक पढ़िए दिमाग हिल जाएगा घोटाला सुनकर ।
वैदिक संस्कृत और वेद को 3500 साल पुराना साबित करने का सबसे बड़ा गपोड़ हथियार इस्तेमाल किया गया मिटानी आर्यन गॉड सीरिया तुर्की माइनर एशिया इंस्क्रिप���शन का और एक फेक गपोड़ क्लेम किया गया की उसमे संस्कृत के नाम पाए गए है ।
जबकि हकीकत यह है की सीरिया में हुरियन लैंग्वेज थी और उसमे पाली पक्कित उच्चारण शैली थी न की संस्कृत की।
रिफरेन्स संलग्न है आप देख सकते है वही सीरिया में पाली पक्कित का नंबर सिस्टम भी पाया गया इससे ये भी पता चलता है की सारे चुनमंगे मिलकर सभी भारतीयो को वैदिक काल इतिहास के नाम पर न सिर्फ मूर्ख बनाते रहे है बल्कि चूना भी लगाते ���ए है। उद्देश्य क्या था ताकि 3500 साल पहले संस्कृत वेद और काल्पनिक वैदिक काल स्थ���पित करना?
जबकि हकीकत यह है की भारत में बुद्ध पूर्व 27 पूर्व बुद्ध की सभ्यता थी और इसलिए भारत से पाली पक्कित 3500 साल पूर्व भारत से बाहर तुर्की सीरिया में भी प्रभाव बना चुकी थी। यही कारण था कि अपने पूर्ववर्ती धम्म की भाँति सम्राट असोक ने अपने शिलालेख में सीरिया ग्रीक इत्यादि देशों में 28 वे बुद्ध तथागत के प्रचार प्रसार के लिए भी भिक्खू भेजे का जिक्र किया।
अब सुनने में आया है कि तमिलनाडु के CM अमेरिकी डॉलर में इनाम रखे है सिंधु घाटी लिपि पढ़ने पर तो जानकारी के लिए बता दू सिंधु घाटी सभ्यता से मेसोपोटामिया में व्यापार होता था उसके सबूत मिल चुके है और पाली पक्कित का प्रभाव 3500 साल पहले उन क्षेत्रों में मिल रहा है यानी पाली पक्कित सिंधु घाटी सभ्यता से ही उन क्षेत्रों में जा रहा था जो की पूर्व के 27 बुद्ध के सभ्यता का हिस्सा बनता है।
इसलिए सिंधु घाटी सभ्यता को जो गपोड़े वैदिक और संस्कृत समझ कर ��ूना लगाने की असफल कोशिश में है वो वही कर रह��� है जो कोई मुंह ऊपर करके थूकता है।
नोट: भारतीय इतिहास घोटालों से भरा पड़ा है और इसमें सारे इतिहासकार शामिल है चाहे वो राइट हो या लेफ्ट
2300 साल पुराने एशिया के सबसे बड़े स्तूपों में से एक केसरिया स्तूप जो लगातार उपेक्षा का शिकार रही है
#ProtectKesariastupa
परिसर में मंदिर ख���ल पूजा यज्ञ हवन चल रहे है, बाउंड्री कई जगहों टूटी हुई है । कुछ वर्ष पहले तक बुद्ध के गर्दन कटी सैकड़ो मूर्ति खंडित रूप में थी जो अब ��हीं दिखाई दे रही है लेकिन हजारों की भीड़ उसके ऊपर चढ़ी नजर आ रही है कम से कम 2 jan 2025 की न्यूज़ यही बता रही है ।
कैंपस के भीतर ASI की बोर्ड लगी है जिसमे लिखा है कैंपस में 400 मीटर और उसके बाद के 200 मीटर में कोई निर्माण कार्य नहीं हो सकता फिर भी स्तूप से मात्र 10 मीटर पर ही मंदिर निर्माण की इजाजत कैसे है?
स्तूप के ईंटे कौन चुरा ले गया है ?
मंदिर किस ईंट से बना है इसकी जांच हुई है?
स्तूप को देख लगता है बहुत बड़ी मात्र में ईंटो को उखाड़ कर हटाया गया है ।
और अब ये भीड़ स्तूप के ऊपर चढ़ गए है और ये किसी रिसर्च पर्पस से नहीं बल्कि मनोरंजन के लिए कैसे अलाउ किया गया जबकि वहाँ बोर्ड पर ऊपर चढ़ना मना है भी लिखा हुआ है ?
क्या ASI सहित, गवर्मेंट भी भारत की आन बान सान बुद्ध और उनके हेरिटेज के प्रति तनिक भी संवेदनशील नहीं है?
#protectKesariastupa