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ये कैसी पॉलिसी है आपकी? ऐसा कौन सा उल्लंघन किया गया है?
झारखंड में छात्रहित की बात करना गुनाह है क्या?
आंदोलन खड़ा करना गुनाह है क्या?
छात्रों को जरूरी सामान पहुंचाना गुनाह है क्या?
आदेश फ़ाइलों में दब गए या बुलडोज़र रास्ता भूल गया?
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी के आदेश के बावजूद
क्यों नहीं ध्वस्त की गई ?
अवैध दरगाह उस्मान अली काले खाँ रणजीत नगर
@MCD_Delhi@DelhiJalBoard@p_sahibsingh
देरी की वजह क्या है?
खाली तो करना पड़ेगा मुल्ला - हम भी तैयारी के साथ है
जहाँ आप 25 गज का मकान नहीं ख़रीद सकते उसी दिल्ली में मुल्ला ने 25 बीघा ज़मीन क़ब्ज़ा कर ली
लोकेशन देख कर आप के होश उड़ जाएँगे
दिल्ली का सब नामी चौराहा पर अवैध मदीना मस्जिद कब्रिस्तान
Urgent message 📢
झारखंड पुलिस के आला अधिकारियों से मेरा निवेदन है कि मुझे नोटिस भिजवाना और धमकी दिलवाना बंद कीजिए,
अंदरुनी खबर के मुताबिक छात्र आंदोलन के नेतृत्व और हमको सर्विलांस पर डाला गया है,
मैं आप सबसे पूरी जिम्मेदारी से ये बात कहना चाहता हूँ कि छात्र पूरी ईमानदारी से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं उनके खिलाफ कोई भी रणनीति या आंदोलन खराब करने के लिए कोई चाल मत चलना आप हमारी नजर में हैं,
अगर हम आपके पीछे आए तो आपकी भ्रष्टाचार की फाइलें आपका परिवार, पूरा झारखंड और देश देखेगा,
हमे हमारा काम करने दीजिए, ट्रैकिंग, ट्रेसिंग , चेजिंग के चक्कर में मत पड़ना।
झारखंड में छात्रों के मशाल जुलूस के दौरान एक दिलचस्प और भावुक दृश्य देखने को मिला।
रास्ते में एक मंदिर से भजन की धुन सुनाई दी। सावन का पवित्र महीना है। हजारों छात्र कुछ पल के लिए रुक गए और भोलेनाथ की भक्ति में झूम उठे। यह दृश्य बताता है कि अपने अधिकारों के लिए संघर्ष और अपनी आस्था, दोनों साथ-साथ चल सकते हैं।
शायद यही वजह है कि हिंदू विरोधी राजनीति करने वाले, देश को तोड़ने का सपना देखने वाले, गाली-गलौज और अराजकता की राजनीति करने वाले विपक्ष के नेता और उनके गुर्गे आज तक झारखंड के छात्रों के हित की बात करने से बच रहे हैं।
जब आंदोलन उनकी राजनीतिक पटकथा के मुताबिक नहीं होता, जब उसमें भारत विरोधी नारे नहीं लगते, जब उसमें अपनी आस्था पर गर्व करने वाले छात्र होते हैं, तब उनके लिए छात्रों का संघर्ष भी महत्वहीन हो जाता है।
झारखंड के छात्रों का आंदोलन उनकी इस दोहरी मानसिकता को बेनकाब कर रहा है.
रांची में लगातार बारिश हो रही है, लेकिन छात्र आंदोलन में डटे पड़े हैं।
हेमंत सोरेन सरकार छात्रों को टेंट भी नहीं लगाने दे रही है। सही मायने में यही तो लोकतंत्र है।
हेमंत सोरेन तुमको इस्तीफा देना पड़ेगा।
झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार को शर्म आनी चाहिए।
रात भर भारी बारिश में छात्र बचने के लिए संघर्ष करते रहे।
परीक्षा में धंधली को लेकर छात्र सरकार के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
छात्रों को इतनी कठिन परिस्थितियों में देखकर भी हेमंत सरकार का दिल नहीं दुख रहा है।
शर्म आनी चाहिए ऐसी सरकार को।
भारत के लिए गर्व का समय।
भारत ने ऑफिशियली 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेज़बानी संभाली!
कॉमनवेल्थ गेम्स का झंडा IOA प्रेसिडेंट पीटी उषा, गुजरात के डिप्टी CM हर्ष सांघवी और नीरज चोपड़ा को मिला।
झारखंड में छात्र सड़कों पर हैं।
लेकिन न राष्ट्रीय मीडिया में वैसी चर्चा दिख रही है, न सोशल मीडिया पर वैसा शोर।
अभिजीत डिपके अमेरिका से भारत आकर विरोध कर सकता है।
राहुल गांधी भी पीएम आवास तक विरोध करने पहुंच सकते हैं।
लेकिन कोई भी झारखंड नहीं पहुँच सकता,क्या विरोध की आवाज़ सिर्फ़ तब महत्वपूर्ण होती है जब सरकार किसी खास पार्टी की हो? एक ही मुद्दे पर अलग-अलग रवैया क्यों?