यह हुई न बेल्ट ट्रीटमेंट 🔥
चित्रा त्रिपाठी: — इस डिबेट में बैठे अर्थशास्त्री मोदी सरकार की तारीफ कर रहे हैं।
आलोक शर्मा 😂: — ये तो BJP प्रवक्ता की भाषा का अपग्रेडेड वर्जन बोल रहे हैं।
चित्रा त्रिपाठी: — 🤐🤐
आलोक शर्मा 🗿: — मैंने अर्थशास्त्र में PhD की है, इसलिए मुझे इतना तो पता है। इस एक्सपर्ट को डिबेट में एकतरफा एजेंडा नहीं चलाना चाहिए। मोदी सरकार ने जो कर्ज लिया है, उस पर ये बात क्यों नहीं कर रहे?
चित्रा की खामोशी ने सब कुछ कह दिया। 🔥
देश के छात्रों ने system के फैलाए अंधेरे के बीच, अपने डर का सामना कर, रौशनी की मशाल जलाई है।
ये मशाल अब पूरे देश को अपने अधिकारों का रास्ता दिखा रही है।
BJP-RSS और अडानी के System को अब खतम, tata, bye-bye कहने का वक्त आ गया है।
बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) के कर्मठ, ईमानदार व पूरी तरह से वफादार बलिया की रसड़ा सीट से लोकप्रिय विधायक श्री उमाशंकर सिंह की आज शाम लम्बी बीमारी की वजह से इलाज के दौरान देहान्त हो जा��े की ख़बर अति-दुखद। उनके परिवार तथा उनके सभी चाहने वालों के प्रति मेरी गहरी शोक संवेदना। पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा की जितनी भी तारीफ की जाये वह कम है। उनका पूरा परिवार बी.एस.पी. परिवार की तरह है तथा उनके परिवार के सभी लोग मुझे बड़ी बहन की तरह ही पूरा आदर-सम्मान देते हैं।
उनके पुत्र से लगातार सम्पर्क बने रहने के दौरान ��ी आज शाम उनके देहान्त की ख़बर उनके पुत्र से ही मिली। इस दुख की घड़ी में मैं व पूरी पार्टी उनके व उनके परिवार के साथ है तथा उन्हें किसी भी प्रकार से हिम्मत नहीं हारना है बल्कि इस परिस्थिति का सामना करते हुये आगे बढ़ना है। कुदरत उन सभी लोगों को इस दुख को सहन करने की शक्ति दे।
जब 2022 में बसपा विधायक उमाशंकर सिंह जी विधानसभा में पहली बार बोलने के लिए खड़े हुए तो अखिलेश यादव सहित तमाम नेता उनपर हँस रहे थे क्योंकि वो एकमात्र ऐसे विधायक थे जो बसपा से चुनकर गए थे ।
लेकिन फिर उमाशंकर सिंह जी ने ऐसा जवाब दिया कि अखिलेश यादव सहित तमा��� नेताओ की बोलती बंद हो गयी ।
बात एकमात्र विधायक की नहीं है, उस भाई की है जो बुरे से बुरे दौर में साथ खड़ा रहा।
अटल से लेकर अचल तक, राखी बंधवाकर बहनजी बोलकर, मौके पर धोखा दे दिए।
उमाशंकर साथ निभाते रहे, अंतिम सांस तक। सारी सरकारी मशीनरी उनके खिलाफ छोड़ दी गई फिर भी डिगे नहीं, जवाब देते रहे।
जिस दौर में 80 में 64 विधायक भाजपा चले जाते हैं उस दौर में अकेले चट्टान की तरह खड़े रहे।
हजारों करोड़ की संपत्ति और व्यापार है, उसके बावजूद धमकिय���ं से नहीं डरे।
उमाशंकर सिंह अलग तो थे, श्रद्धांजलि💐। दुनिया में ऐसे ही आपसी भरोसा बना रहे, बचा रहे।
भाजपा ‘अवध एक्सप्रेस’ से सत्ता में आई थी, ‘अयोध्या एक्सप्रेस’ से उसकी वापसी तय है।
दानपात्र में हाथ डालनेवाले भाजपाई और उनके संगी-साथियों के ख़िलाफ़ ‘दानपात्र’ के साथ सपा के सांसदों ने संसद के सामने ��ो सांकेतिक प्रदर्शन किया, उसे देखकर शर्मिंदगी में डूबे भाजपाई लोग, सबसे निगाह चुराकर चुपके से आते-जाते देखे गए।
जनता कह रही है, हम उदार हृदय भारतीय लोग, भाजपाइयों की सौ क्या हज़ार चोरी भी माफ़ कर देते लेकिन धर्म के पैसे चुराने का महापाप हम कभी माफ़ नहीं करेंगे। जनता ये भी कह रही है कि जो भगवान के नहीं हुए, वो हमारे क्या होंगे।
जो भाजपा का साथी, वो रामघाती-महापापी!
उत्तर प्रदेश के फतेहपु�� जिले के किशनपुर कस्बे स्थित सर्वोदय इंटर कॉलेज में आज सैकड़ों छोटे-छोटे बच्चे ‘जेन-अल्फा’ अपने हाथों में परम पूज्य बाबा साहेब की तस्वीरें लिए शिक्षा एवं सम्मानजनक मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए।
इनका आरोप है कि विद्यालय में लंबे समय से साफ़-सफ़ाई की व्यवस्था बदहाल है। बेंच-डेस्क टूटे हुए हैं, पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है और शौचालयों की स्थिति भी बेहद खराब है। उनका कहना है कि इन समस्याओं को लेकर कई बार विद्यालय प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। यह दृश्य भ���जपा की डबल इंजन सरकार की शिक्षा व्यवस्था में विफलताओं का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
इन्हीं बदहाल परिस्थितियों के विरोध में सामने आया यह दृश्य शिक्षा और संवैधानिक अधिकारों के प्रति बच्चों की जागरूकता के साथ-साथ बेहतर भविष्य की उनकी उम्मीदों को भी प्रतिबिंबित कर रहा था।
जय भीम! जय जेन-अल्फा! 😊
पेपर लीक और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर जंतर-मंतर पर छ���त्रों और छात्राओं द्वारा किए जा रहे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन पर 20 जुलाई को हुई बर्बरतापूर्ण सरकारी कार्रवाई के विरोध में आज भीम आर्मी–आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने पूरे देश के जिला मुख्यालयों पर महामहिम राष्ट्रपति महोदया जी के नाम ज्ञापन सौंपा। इसी क्रम में आज लखनऊ रहा।
केंद्रीय शिक्षा मंत���री धर्मेद्र प्रधान जी का इस्तीफा छात्रों और युवाओं के लोकतांत्रिक संघर्ष की एक महत्वपूर्ण जीत है। यह उन लाखों विद्यार्थियों की आवाज़ की जीत है, जिन्होंने अन्याय के सामने झुकने से इनकार किया।
लेकिन हमारी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। जब तक शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।
इस संघर्ष से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े सभी छात्र-छात्राओं, युवाओं औ��� साथियों को हार्दिक बधाई एवं उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए मंगलकामनाएँ।
धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे ने इतिहास रच दिया है . Gen Z ने मोदी को घुटनों के बल झुका दिया है .
इसके साथ ही सरकार को हमेशा कवर फायर देने न्यूज चैनलों का भी मुंह काला हुआ है .
बेशर्मी का लबादा ओढ़कर ��िन रात मोदी की सत्ता की चाटुकारिता करने एडिटर, ऐंकर और रिपोर्टर इस प्रोटेस्ट के फ्लॉप होने का इंतज़ार कर रहे थे , इसे बदनाम करने की मुहिम में जुटे थे , वो सब आज सोने से पहले आईना में अपना चेहरा जरूर देखें