अगर #2019मे कांग्रेश चुनाव जीत जाती है ?
अलगाववादियो के लिए बागों मे बहार
दिग्विजय,लालू,मोमता,माया आदि के चेहरो पर रौनक
LOC पर अंधाधुंध फायरिंग
पाकिस्तान पर सर्जिकल अटैक को उग्र कार्रवाई तथा देश को युद्ध की आग में झोंकने का प्रयास मानकर मोदी को
जेल भेजने की तैयारी.
जो पहले गांव हुआ करते थे, वो आज नहीं रहे...
इन्हें भी शहर की हवा लग गई है।
पहले जहाँ दिलों की गर्मी से पूरा मोहल्ला गुनगुनाता था,
वहाँ अब सिर्फ़ कुलर की ठंडक और लालच की गर्मी बाकी रह गई है।👇
फिर आपस में भिड़ गए उत्तराखंड के दुकानदार ओर निहंग....निहंग हेमकुण्ड साहिब गुरद्वारा को जा रहे थे, रास्ते में रुके एक दुकान पर कोल्ड ड्रिंक लेने,, दुकानदार बोला के कोल्ड ड्रिंक पीकर यहां पर खाली बोतल मत फेंकना, यहां पर गंद मत डालना तो हो गई लड़ाई शुरू
लापरवाही मे तो हम सबके बाप है हम सिर्फ घुस लेने का काम ही स्पीड से करते है
और काम मे देरी तो हमारे जज साहब ही सिखाते हैं तारीख पर तारीख
वादे पूरा न करना तो हमारे नेताओं के खून मे ही है
@KuldeepKumarAAP केजरीवाल सोनम vankchuk को शिक्षा मंत्री बनाने की बात करता है तो पंजाब का शिक्षा मंत्री क्यों नहीं बना देता उनको?
पार्टी 10 साल मे जन्म भी ली बड़ी भी हो गई म्रत्यु के नजदीक भी पहुंच गई 😁😄
@scribe9104 ये भारी पड़ा शब्द है ये सिर्फ ख़बरों को सुर्खियों में लाने के लिए है ये शख्स काफी सालो से ऐसे समुद्र मे छलांग लगाकर लोगों की जान भी बचाता है न उसके लिए वो किसी से पैसा लेता है न कोई खर्च सिर्फ मदद कर्ता है ये स्टंट्स से कुछ लोग मदद जरूर करते है
@aajtak किसी भी रिसर्च और इसके परिणाम मे कई साल और महीने लग जाते है ऐसे में कुछ दिनों में इसके असर का नकारत्मक या सकारत्मक पहलु का जवाब हडबडी में नहीं देना चाहिए?
गुरूग्राम में द्वारका एक्सप्रेसवे पर एक ई-रिक्शा लदे सरियों से टकराकर एक टैक्सी चालक की मौके पर ही मौत हो गई। सरिए कार के अंदर इतनी गहराई तक घुस गए कि पीछे बैठी सवारी भी गंभीर रूप से घायल हो गई।
नियम यह है कि किसी भी वाहन में ऐसा सामान नहीं रखा जाना चाहिए जो वाहन की बॉडी से बाहर निकला हो। फिर भी यदि ऐसे वाहन सड़कों पर बेखौफ चलते हैं, क्योंकि RTO और ट्रैफिक पुलिस केवल ₹20 के लिए लोगों की जान जोखिम में डाल सकते हैं..😡
आरबीआई का बड़ा कदम: देश में प्लास्टिक नोटों की तैयारी
भारतीय रिज़र्व बैंक ने देश में करेंसी नोटों की सुरक्षा और उनकी उम्र बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा क़दम उठाया है।
केंद्रीय बैंक ने आज नोटों के निर्माण के लिए आवश्यक 'ओपेसिफाइड पॉलिमर सब्सट्रेट शीट' की सप्लाई करने वाली कंपनियों से वैश्विक स्तर पर निविदाएँ आमंत्रित की हैं।
साफ़ है कि भारत में जल्द ही प्लास्टिक बैंक नोट देखने को मिल सकते हैं।
पारंपरिक भारतीय नोट मुख्य रूप से कपास से बने विशेष काग़ज़ पर छापे जाते हैं।
इसके विपरीत, प्लास्टिक या पॉलिमर नोट एक विशेष सिंथेटिक प्लास्टिक सामग्री से बने होते हैं।
ये नोट छूने और दिखने में काफ़ी हद तक सामान्य नोटों जैसे ही होते हैं, लेकिन इनमें पारदर्शी विंडो और एडवांस होलोग्राफिक फ़ीचर जैसे आधुनिक सुरक्षा उपाय आसानी से शामिल किए जा सकते हैं, जिनकी नकल करना बेहद मुश्किल होता है।
प्लास्टिक नोटों को अपनाने पर विचार करने के दो मुख्य कारण हैं: स्थायित्व और सुरक्षा।
काग़ज़ी नोट पसीने, पानी और रगड़ से जल्दी खराब हो जाते हैं, जिससे आरबीआई को हर साल पुराने नोटों को बदलने और नए नोट छापने पर भारी ख़र्च करना पड़ता है।
इसके विपरीत, प्लास्टिक नोट वाटरप्रूफ़ भी होते हैं और आसानी से कटते फटते नहीं।
इसके अलावा, इन नोटों में बेहद जटिल सुरक्षा विशेषताएँ होती हैं, जिससे जाली नोट पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सकेगी।