आपने एक दिन मुझसे पूछा था कि तुम्हें कैसा जीवनसाथी चाहिए...?
ये एक बहुत सरल से प्रश्न है और शायद उतना ही गहरा भी
वैसे तो सबकी तरह मैं भी किशोरावस्था से गुजरी हूँ
उस वक़्त के आकर्षण का आधार अलग था चयन के स्तर भिन्न थे लेकिन आजकल कुछ अलग सा सोचने लगी हूँ और सिर्फ़ सोचती ही नही
कितना हास्यास्पद है ये कि जीवन के समस्त चयन स्वयं करने की छुट देने के बावजूद जीवन के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण चयन पर समाज अपनी नज़र गडाए रहता है ...ये सच में अवैध और अमानवीय है जो जीवन की जीवन्तता को वास्तव में समाप्त कर देती है और जिसका कुप्रभाव आने वाली पीढ़ी पर भी पड़ता है...