विदेश दौरे की हर तस्वीर... हर स्वागत... हर उपलब्धि पर तुरंत ट्वीट आ जाता है।
लेकिन जब लाखों युवा पेपर लीक से टूट रहे हों उनकी की चीखें सुनाई नहीं देतीं।
राम मंदिर की व्यवस्था पर उठे सवालों पर शब्द नहीं निकलते।
700 करोड़ के स्वास्थ्य घोटाले के आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं।
तब प्रधानमंत्री जी की ओर से एक ट्वीट, एक बयान, एक आश्वासन भी सुनने को नहीं मिलता।
नेतृत्व सिर्फ़ उपलब्धियाँ साझा करने का नाम नहीं है...
मुश्किल समय में जनता के सवालों का जवाब देना और उनकी हिम्मत बढ़ाना भी नेतृत्व होता है।
यही बात सबसे ज़्यादा खटकती है।
हर नए प्रयोग की पहली कीमत हमेशा आम जनता ही क्यों चुकाए?
अगर एथेनॉल मिश्रित petrol इतना ही सुरक्षित, भरोसेमंद और भविष्य का समाधान है, तो सबसे पहले इसका इस्तेमाल सरकारी गाड़ियों में होना चाहिए। जब सरकार खुद इस पर भरोसा दिखाएगी, तभी जनता का भरोसा भी बनेगा।
जिस व्यक्ति ने अपनी वर्षों की मेहनत की कमाई से गाड़ी खरीदी है, उसकी गाड़ी किसी नई नीति का परीक्षण स्थल क्यों बने? पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि पुरानी गाड़ियों पर इसका क्या असर होगा, नुकसान होने पर जिम्मेदारी किसकी होगी और आम नागरिक को सुरक्षा कैसे मिलेगी।
सरकार कहती है कि एथेनॉल से पेट्रोल बचेगा और आयात कम होगा। उद्देश्य अच्छा है, लेकिन क्या हमने उन वजहों पर भी उतना ध्यान दिया है जहाँ हर दिन भारी मात्रा में ईंधन बेवजह बर्बाद होता है? टूटी सड़कें, घंटों के ट्रैफिक जाम, वर्षों तक अधूरे पड़े निर्माण कार्य और खराब ट्रैफिक प्रबंधन… इनसे होने वाली ईंधन की बर्बादी रोकने की उतनी ही गंभीर कोशिश क्यों नहीं दिखती?
और अगर बात पर्यावरण की है, तो जनता को यह भी बताया जाना चाहिए कि एथेनॉल उत्पादन में पानी, खेती और पूरी प्रक्रिया का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।
नीति के लाभ का ढिंढोरा पीटो और चुनौतियाँ को एक दम छुपा लो |
सरकार पहले पुरानी गाड़ियों के लिए किफायती समाधान और आवश्यक किट निशुल्क उपलब्ध कराए, उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे, उसके बाद ऐसी नीति लागू करे।
जनता पर अब और प्रयोग नहीं… पहले solution लाओ फिर implementation करो
DAY 8
Still Alive, though not kicking….
Some 7,000 people gathered at Jantar Mantar today from morning to evening. Leaders of various social and political movements spoke in support. A clear indication of how effective this movement is can be judged from the number of trolls in the comments below. Over the years I’ve seen that this number is directly proportional to the impact. I’ll be so sad & dejected the day they go missing. Thank you, my success-o-meter, for your hard work.
#SonamWangchuk #CJP #JantarMantar #Education
श्रीराम, श्रीकृष्ण, श्री हनुमान...
ये किसी पार्टी के स्टार प्रचारक नहीं हैं।
ये करोड़ों लोगों की आस्था हैं।
आस्था का सम्मान राजनीति से ऊपर हैं।
सवाल राजनीति की मर्यादा का है- सत्ता किसी की भी हो, आस्था का सम्मान वोट से ऊपर हैं।
जब विकास, शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य पर तालियाँ कम पड़ने लगें...
तब आस्था को भी चुनावी मंच पर बुला लो। भगवान चुनाव नहीं लड़ते...
🚨Corruption At Its Peak In Madhya Pradesh.
A fearless young journalist has exposed the massive corruption in road construction, bringing the issue into the spotlight. 👇
Sonam Sir has lost 5 kg, and his health is deteriorating with each passing day. How much longer will the Prime Minister wait before sacking Dharmendra Pradhan?
Why is Dharmendra Pradhan so important to PM Modi that, despite the deaths of 20 students, he still refuses to remove him?