Patiala, Punjab - A couple was attacked by a pitbull dog in Patiala while they were visiting a property with a real estate dealer. The husband and wife had gone to inspect a house for purchase. When they rang the doorbell, a pitbull inside the premises suddenly lunged at them. Local residents tried to intervene and rescue the couple, but by then the dog had already inflicted serious injuries. Both the husband and wife sustained multiple bite wounds on various parts of their bodies. They have been admitted to a private hospital in Patiala for treatment.
Litton Das said, “Goverment told us there was no safety in India. Our players told them, ‘we played in Pakistan too. In Pakistan guards used to stand outside the room with guns. What can be more dangerous than that? If we can play in Pakistan, why not India’”. (Prothom Alo).
उम्र रेत की तरह हाथों से फिसलती जा रही है, समय का प्रवाह बेहद तेज़ है। बरसों से ज़हन में बस यही एक सवाल रहा है कि कब कोई इच्छा पूरी होगी, कब जीवन का लक्ष्य करीब आएगा और कब इस घुटन भरे, कुंठित व्यक्तित्व से मुक्ति मिलेगी। मन बस इसी एक दिलासे के सहारे ज़िंदा है कि कभी न कभी, सही समय पर सब ठीक हो जाएगा; पर उस 'सही समय' का कोई अंदाज़ा नहीं है। अब न कोई मोह बचा है, न कोई आकांक्षा। जीवन पूरी तरह अनासक्त और बेपरवाह हो चुका है। कितना अजीब है न कि ज़िंदगी का सबसे कीमती दौर सिर्फ सोचने और एक कमरे की बंद दीवारों के बीच गुज़र गया। जो चीज़ बरसों पहले चाहिए थी, वो अगर अब मिल भी जाए, तो वैसी खुशी नहीं होगी। संघर्ष के रास्ते में इतने ग़मों से गुज़र चुका हूँ कि अब कोई भी हासिल मायने नहीं रखता...!!
अकेला बालकनी में बैठा हूं। चारों ओर से मेरा अकेलापन मुझे घेरे हुए है। बिजली कटी हुई है और पूरा शहर अंधेरे में डूबा हुआ है। मंद-मंद हवा चल रही है। ये हवाएं मुझे ऐसे सहला रही हैं, जैसे बचपन में मेरी मां मुझे सहलाती थी। मुझे नहीं मालूम कि मैं कितनी देर से मोबाइल में बड़ी गंभीरता से अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट देख रहा हूं। सच कहूं तो मैं ढूंढ रहा हूं एक ऐसा नंबर, जिसे बेझिझक कॉल करके अपनी सारी संवेदनाएं उसके सामने उड़ेल दूं। खैर, मैं एक अभागा जीव हूं... मेरे पास ऐसा कोई नंबर नहीं, मेरे पास ऐसा कोई साथी नहीं।
तभी आसमान की तरफ नजर जाती है। इस घने अंधेरे में भी कुछ तारे टिमटिमा रहे हैं। शहर की बत्तियां तो बुझ गईं, पर आसमान का वो पुराना चांद अब भी अपनी मद्धम रोशनी बिखेर रहा है। शायद यह रात मुझसे कह रही है कि जब बांटने के लिए कोई न हो, तो अपनी दास्तां इन सितारों को सुना दी जाए। ये सुनते सब कुछ हैं, और कभी किसी से कुछ कहते भी नहीं। मोबाइल की स्क्रीन लॉक होती है, और मैं अंधेरे के इस सुकून को खुद में समेटने लगता हूं। ✨🌿
तुम्हे कभी नफरत नही होती खुद से,जब इतनी सवेंदनाओ से घिर जाते हो या भर जाते हो भावनाओ से,जो सही नही है तुम्हारे होने के लिए वो सारी उदासियों से नफरत करो मान लो वो दुश्मन है तुम्हारी और ये सोचो कि तुम हरवख्त उदासियों को महसूस करने के लिये नही बने हो...!
कुछ देर पहले तक तेज़ गर्मी थी और अब ठंडी हवाओं के साथ बेमौसम बारिश होने लगी है प्रकृति सच में हर पल अपना रंग बदलती रहती है ऐसे मौसम में बादल की आवाज़ सुनते हुए शराब के दो घूंट पीना भी एक अलग ही एहसास देता है,जैसे कुछ देर के लिए दुनिया की सारी भागदौड़ थम गई हो और बस मौसम,1/2
@kushika_twt फार्मर की इनकम फिक्स नहीं होती और उसकी इनकम नेचर पे डिपेंड करती है टाइम पर बारिश ना होना या ज़्यादा बारिश हो जाना या ज़्यादा सर्दी इस टाइम जब आप Ac में बैठ ट्वीट कर रही है किसान की इस गर्मी में लगायी गई फसल अभी खतरे में है अगली बार थोड़ा खेत वगेरा जाकर देख लेना ट्वीट करने से पहले
दुर्गम वनों और ऊँचे पर्वतों को जीतते हुए जब तुम अंतिम ऊँचाई को भी जीत लोगे -
जब तुम्हें लगेगा कि कोई अंतर नहीं बचा अब तुममें और उन पत्थरों की कठोरता में
जिन्हें तुमने जीता है- जब तुम अपने मस्तक पर बर्फ़ का पहला तूफ़ान झेलोगे
और काँपोगे नहीं- तब तुम पाओगे कि कोई फ़र्क़ नहीं
सब कुछ जीत लेने में और अंत तक हिम्मत न हारने में।
वैभव सूर्यवंशी नमन है आपको 🙏🏻
किसी के शरीर को तकलीफ़ होती है लोग डॉ के पास जाते हैं और दवाइयों से आराम ढूँढ लेते हैं लेकिन तुम्हारे और मेरे बीचकुछ अलग है जब भी मन या शरीर थक जाता है,उसकी असली दवा सिर्फ हम एक-दूसरे के पास रखते हैं हमारा पास आना ही जैसे हर बेचैनी,हर दर्द और हर परेशानी को धीरे-धीरे मिटा देता है!