"करोड़ों की दौलत कमाने वाला इंसान भी तब गरीब हो जाता है, जब अपने ही उसका साथ छोड़ दें।
माता-पिता को महंगे तोहफों की नहीं, बच्चों के प्यार, सम्मान और साथ की जरूरत होती है।
उनके जीते-जी उनका सम्मान करें, क्योंकि समय बीत जाने के बाद सिर्फ पछतावा रह जाता है।
बशीर नामा : बरसों तक मुशायरों के शोमैन रहे बशीर बद्र ने उर्दू और फारसी को हदों से बाहर लाकर आसान भाषा में इंसानी संवेदनाओं को शब्द दिए
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#BashirBadr was heartbroken when rioters targeted his Meerut home during the 1986 riots.
He was moved to Bhopal, and in dejection, wrote lines that will outlive him:
Log toot jaate hai ek ghar banane mein, tum taras nahi khaate bastiyaan jalane mein.