"ये मौलाना जर्जिस अंसारी दंगे कराकर ही मानेगा.."
डीजीपी साहब, मौलाना जर्जिस अंसारी हमारे हिंदू देवताओं को क्या ऐसे ही अपशब्द बोलता रहेगा!! कभी श्री कृष्ण को पांच वक्त का नमाजी बताता है तो कभी भगवान शंकर के खतने की बात करता है..
हे ईश्वर..
यूपी के कानून के रखवाले इतना जहर बर्दाश्त कैसे कर सकते हैं!! हमारे आराध्यों के लिए जिन बातों को एक सामान्य व्यक्ति नहीं सुन पा रहा है, उसे पुलिस अधिकारी सुनकर कैसे शांत बैठे रह सकते हैं..
मौलाना के खिलाफ इतनी एफआईआर दर्ज होने के बाद भी कोई कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है??
#Sawan #savan #HateSpeech #Police #DGP #LawandOrder #UttarPradesh #CMYogi
जबरा मारे, रोवे भी ना दे...
कहानी उत्तर प्रदेश सेतु निगम के उन्नाव की है।
₹50 लाख की RMC सप्लाई में साहब लोग पहले ही लगभग ₹7 लाख का "प्रसाद" चढ़वा गए। जब ठेकेदार का हिसाब-किताब पूरी तरह बिगड़ गया तो उसने सप्लाई देने से हाथ खड़े कर दिए।
बस फिर क्या था... साहब का रौब जाग गया। उन्नाव की सप्लाई तो गई ही, लखनऊ की सप्लाई भी बंद करा दी गई।
अब ठेकेदार न उगलते बन रहा है, न निगलते। कमीशन भी गया, काम भी गया, और ऊपर से सज़ा अलग।
कोटा में बिजली मंत्री की समीक्षा बैठक में बिजली गुल...!! 😃
अब इससे ज़्यादा ईमानदार 'समीक्षा' क्या होगी...?? विभाग ने रिपोर्ट की जगह, मंत्रीजी को सीधे 'समस्या का अनुभव' ही करा दिया...!! 😂
@INCIndia@INCRajasthan
आज करोड़ों पौधे लगाकर नया रिकॉर्ड बनाने का दावा किया जाएगा। स्वागतयोग्य पहल है, लेकिन असली परीक्षा आज नहीं, अगले वर्ष में होगी।
पिछले वर्ष लगाए गए करोड़ों पौधों का भी सार्वजनिक हिसाब दिया जाना चाहिए
• कितने पौधे आज भी जीवित हैं?
• कितने सूख गए?
• कितने नष्ट हो गए?
• और कितने अब वास्तव में वृक्ष बन चुके हैं?
केवल पौधे लगाना उपलब्धि नहीं है, उन्हें जीवित रखकर वृक्ष बनाना ही असली सफलता है। सरकारी अभियानों का मूल्यांकन "पौधारोपण" से नहीं, बल्कि "जीवित वृक्षों" की संख्या से होना चाहिए। रिकॉर्ड लगाने से अधिक ज़रूरी है हर वर्ष उसकी जवाबदेही तय करना।
जब दो सबसे ज़हरीले जीव एक दूसरे से आमना सामना करेंगें तो ऐसा होता है।
यक़ीन मानिये इन दोनों में से कोई भी नहीं बचेगा। थोड़ी देर बाद मर ही जायेंगें क्योंकि दोनों का ज़हर अलग अलग तरह से काम करता है।
"लखनऊ कमिश्नरेट के एक दरोगा गुड्डू प्रसाद, पीड़ित द्विवेदी जी और दलाल तारिक के बीच डीलिंग का ये संवाद सुनिये.. मजे की बात ये है कि दलाल काम भी करा रहा है.. वीडियो भी बना रहा है.. और वीडियो वायरल भी कर रहा है.."
पुलिस का भ्रष्टाचार चरम पर है.. दरोगा-सिपाहियों को समझना चाहिए कि दलाल भी अब भरोसे के नहीं रहे.. वीडियो बना लेते हैं ताकि सही समय पर वायरल कर सकें.. खैर आप रहीमाबाद थाने की चौकी की ये अद्भुत बातचीत सुनिए..
दलाल :- इधर आ जाओ, यहां सब बैठे हैं..
(दलाल दरोगा जी को कुर्सी से उठाकर किनारे ले जाता है.. आवाज सुनिए..)
दलाल :- आराम से आओ, छाईं में बात करो.. देखो द्विवेदी जी, ये जो है गुड्डू भाई (दरोगा जी) हमारे.. आज से नहीं बहुत पुराने तालुकात हैं.. द्विवेदी जी, जो संतोष का मामला है, वो बताओ जरा इनको.. संतोष कौन??
दरोगा जी :- भाई है इनके.. बड़े भाई हैं.. ये छोटे भाई हैं.. शुभम उनके भतीजे हैं.. आलमनगर में रहते हैं.. मैं चाहता तो उनको भी टांग लाता..
दलाल :- ये तो आपकी इंसानियत है..
दरोगा जी :- इंसानियत नहीं है.. इस लेवल तक नहीं गिर सकता मैं..
दलाल :- हां, देख लो.. देख लो, कितने ऊंचे स्वभाव के हैं..
दरोगा जी :- मैंने आपसे क्या बोला.. मैं आपके घर आ जाऊंगा बयान लेने.. उस बच्चे का बयान इसलिए जरूरी है कि उसी ने लिखवाया है गुमशुदगी.. उसी का बयान है.. उसी को मैं कंटिन्यू कर दूंगा कि भैया आज तक मिले नहीं हैं.. मैं भी कोशिश नहीं करूंगा खोजने की.. मैं जानता हूं, तब भी नहीं जाऊंगा.. इतना मैं कर सकता हूं..
दलाल :- हां, बयान दर्ज कर दो.. क्या देना होगा..
दरोगा जी:- जो आपसे बता दिया तारिक भाई वही होगा..
दलाल :- आप बता दो..
दरोगा जी :- डेढ़ लाख
दलाल :- ये हमारे दोस्त हैं दरोगा जी
दरोगा जी :- वन फिफ्टी.. वन फिफ्टी.. डेढ़ लाख.. कम नहीं हो पाएगा.. अब इनसे आप बात कर लीजिएगा..
(फिर कुछ लेनदेन होता है.. कहा जाता है दरोगा जी को दे दो..)
दरोगा जी :- यहां हम दरोगा नहीं हैं.. ये (दलाल) हमारे छोटे भाई हैं..
दलाल :- लेकिन राजनीति बता दो.. जरा समझा दो..
दरोगा जी :- उसको दो दिन के अंदर बुलाकर बयान दिला दो.. और जो बात हो गई, यहीं पर खत्म.. ये बात यहीं पर दब जानी चाहिए..
बेचारे दरोगा जी को क्या मालूम था कि उनका अपना छोटा भाई यानि डीलिंग करने वाला दलाल ही वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहा था और उसी ने रिकॉर्डिंग वायरल कर दी.. दरोगा जी सस्पेंड हो गए..
हालांकि, आज से कुछ साल पहले इस तरह के वीडियो वायरल होने पर एफआईआर दर्ज होती थी.. लेकिन अमृत काल में अब ऐसा नहीं होता..
#Police #Lucknow #UPPolice #SI #Deal #Dealing #Bribe #Bribery #Suspension
प्रीमियम बिजली देने के नाम पर जनता को प्रीपेड मीटर का झटका… और अब जैसे ही भीषण गर्मी से लोगों ने थोड़ी राहत की सांस ली, बिजली विभाग फिर लोड बढाकर नया बवाल खड़ा कर दिया
सवाल यह है कि हर बार बोझ उपभोक्ता पर ही क्यों?
न इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, न मैनपावर बढ़ेगी। एक-एक संविदा कर्मी 12–16 घंटे तक काम कर रहा है, लेकिन उनकी संख्या बढ़ाने की बजाय विभाग केवल लोड बढ़ाने में व्यस्त है। नतीजा फॉल्ट बढ़ेंगे, कटौती बढ़ेगी, ट्रिपिंग बढ़ेगी और जनता का गुस्सा सीधे सरकार के खाते में जाएगा।
किसी ने बड़ी सटीक बात कही....यूपीपीसीएल का इंफ्रास्ट्रक्चर 1984 की एम्बेसडर कार जैसा हो चुका है। जिसे अधिकारी हर बार डेंट-पेंट करके सड़क पर उतार देते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि वह 10–20 किलोमीटर चलने के बाद फिर गरम होकर खड़ी हो जाती है।
अगर सच में व्यवस्था बदलनी है तो केवल उपभोक्ताओं पर नए नियम थोपने से काम नहीं चलेगा। इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश, पर्याप्त मैनपावर और जवाबदेह प्रशासन ही समाधान है।
मुख्यमंत्री जी से आग्रह है कि यूपीपीसीएल में ऐसे सक्षम और परिणाम देने वाले अधिकारी तैनात हों जो एम्बेसडर को घसीटने की बजाय पूरे सिस्टम को "फॉर्च्यूनर" बनाने की सोच रखें।
और हाँ… शायद अभी विपक्ष की नज़र इस फैसले पर नहीं पड़ी है। वरना यह मुद्दा सड़कों से लेकर विधानसभा तक गूंज रहा होता। 😊
वाराणसी
➡दिल्ली-NCR की तर्ज पर काशी में होगा एलिवेटेड रोड जाल
➡वरुणा और गंगा किनारे एलिवेटेड रोड का होगा निर्माण
➡25 हजार करोड़ की परियोजना के लिए डीएम ने जारी आदेश
➡19 गांव और 34 मुहल्लों में भू-रजिस्ट्री पर रोक
➡रिंग रोड से राजघाट पुल तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड
➡काशी विश्वनाथ मंदिर आने पर श्रद्धालुओं को होगी सहूलियत
➡4 लेन का एलिवेटेड नदी के उत्तर और पश्चिम दिशा से गुजरेगा
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