सुभाष चंद्रा को 22000 करोड़ के कर्ज के बदले अब महज़ 6.5 करोड़ ही चुकाने होंगे।NCLT ने यह रक्षाबन्धन का तोहफ़ा दिया है।वैसे NCLT तो माध्यम है,यह राजनीतिक संरक्षण के बग़ैर संभव नही है !
हरिद्वार में 12 दिन की कांवड़ यात्रा के दौरान 4 करोड़ 80 लाख कांवड़िए 7 हजार मीट्रिक टन कचरा गंगा घाटों पर फैलाकर चले गए। सबसे बुरा हाल मां गंगा के आरती क्षेत्र हरकी पैड़ी का रहा।
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सोनम वांगचुक जी का ट्रैक रिकॉर्ड दिखता है की वे एक गंभीर और सच्चे व्यक्ति हैं। उन्होंने अपने जीवन से दिखाया कि शिक्षा रट्टा मारने का नाम नहीं, सही जीवन जीने का नाम भी है।
भारत की सेवा वे जीवित रहकर अधिक कर सकते हैं। समाज को, लद्दाख को, भारत को, पर्यावरण और शिक्षा को उनकी ज़रूरत है। उनसे अपील है कि वे अपना अनशन तोड़ दें।
NEET पेपर लीक का संकट केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि हमारे शिक्षा तंत्र और समाज के किसी अधिक गहरे संकट का संकेत है।
हमें केवल व्यावसायिक शिक्षा नहीं चाहिए, हमें आत्म की सामूहिक शिक्षा, ‘मास- एजुकेशन-ऑफ़-द-सेल्फ’ चाहिए। अगर हम इससे बचते रहे, तो ऐसे हादसे बार-बार होते रहेंगे और हमारे बच्चों की जानें कभी किसी बहाने, कभी किसी और बहाने जाती रहेंगी।
विपक्ष को तोड़ कर चुनौती जनता को दी जा रही है कि आपकी कोई औक़ात नहीं है। ऐसा कर लोकतंत्र का उत्साह ख़त्म किया जा रहा है। अगर कोर्ट केस माफ़ कराने के लिए सांसद पार्टी छोड़ रहे हैं तो सवाल उठेगा कि क्या कोर्ट ने ED की जगह ले ली है? अदालत की साख को दाँव पर लगाने से नुक़सान भरोसे का होगा। वकील प्रतिस्पर्धा में निखरते हैं।उनके पेशे को AI से ज़्यादा ख़तरा न्याय व्यवस्था को पार्टी व्यवस्था में बदल देने से होगा। इसके बाद क्या बचेगा? हताशा का लंबा दौर और नतीजा? एक शब्द में - दुर्दशा। हताशा से केवल दुर्दशा पैदा होती है। राष्ट्र के लोक जीवन का उत्साह ख़त्म हो जाता है। उसकी आर्थिक प्रगति भी कुंठित हो जाती है। अभी सत्ता के दम पर कुछ भी कर लीजिए लेकिन सबके सामने सांसदों को गुलाम की तरह पेश कर राजनीति के महत्व को भी समाप्त किया जा रहा है। अगर यह जीत है तो बीजेपी जश्न क्यों नहीं मना रही? क्या इस देश में किसी को पार्टी चलाने नहीं आती? फिर जब सारा बहुमत आ ही गया तब चुनाव बंद कर दीजिए।
पूर्व सीएम अखिलेश यादव जिस बच्ची को लैपटॉप दे रहे, उनका नाम सारा मोईन है। सारा न देख सकती है, न सुन सकती है। सारा बोलने में भी असमर्थ हैं। सारा ने इस साल ISC बोर्ड की 12वीं परीक्षा में 98.75 नंबर लाकर इतिहास रचा है।
सारा की मां जो सरकारी शिक्षक हैं, वह उंगलियों से जब सारा के हाथ में अक्षर बनाती हैं तो वह समझ लेती हैं। वह सरकोइडोसिस नामक दुर्लभ बीमारी से जूझ रही हैं। क्राइस्ट चर्च कॉलेज में उन्हें पढ़ाने वाले सलमान अली काजी ने उन्हें ऑर्बिट रीडर नामक बेल डिवाइस से पढ़ाया।
इस डिवाइस से किताबों को आवाज और स्पर्ष में बदल देता था। उनकी किताबें पहले से स्कैन होती थी, ये काम सारा के पिता करते थे। जिन्होंने समय से पहले ही सरकारी नौकरी से वीआरएस लेकर बच्ची को ध्यान दिया।
Uttarakhand Govt should immediately ban this torture of animals at Kedarnath.
This 140 KG guy is literally crushing the mule with his weight.
At Mahadev’s place, every living being is equal, this is horrifying.
एक बात याद रखियेगा।
तेल का संकट, रुपये का गिरना, बैलेंस ऑफ पेमेन्ट क्राइसिस, महंगाई, मुद्रास्फीति, इन्वेस्टमेंट गिरावट, मार्किट क्रेश, बेरोजगारी, डिसरप्शन, औऱ तमाम स्थाई आर्थिक गिरावट का नजला झेलते समय, अपने आगे के जीवन मे याद रखियेगा, और अपने बच्चो को बताइयेगा..
कि सस्ता तेल तो बाजार भरपूर था।
बस, उसे खरीदने में हमारी फट रही थी।
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इतिहास दर्ज करेगा, कि यह तेल नही, डरपोक लीडरशिप से का पैदा हुआ क्राइसिस था।
When AAP lost Delhi in 2025, I was on DeKoder where they were dissecting what AAP did wrong leading to its loss. I had asked Dr Pranoy Roy, “Sir what could you have done differently to save NDTV? We are all victims of an authoritarian power grab. Let’s call it like it is.”
The post Bengal election analysis reminds me of that moment. By discussing an electoral verdict in terms of simple politics, we are legitimizing the BJP’s overturning of our democracy.
That’s why I have never been on any Indian media debate since - because it all mostly is narrative building for the dictatorship.