ख़ार-ब-ख़ार गुल-ब-गुल फ़स्ल-ए-बहार आ गई
फ़स्ल-ए-बहार आ गई ज़ख़्म बहाल हो गए!
शोर उठा मगर तुझे लज़्ज़त-ए-गोश तो मिली
ख़ून बहा मगर तिरे हाथ तो लाल हो गए!!
#जौन_एलिया
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बस जान गया मैं तेरी पहचान यही है...
तू दिल में तो आता है समझ में नहीं आता...
~ अकबर इल्लहाबादी #Sufism#JashneRekhta
अपना पसंदीदा सूफ़ी शेर नीचे लिखिए ...
मुहब्बत ग़म है तो आराम क्या है
हमें आराम से फिर काम क्या है
समझ में दिल की बातें कुछ न आएँ
न जाने इश्क़ का पैग़ाम क्या है
-ज़हीन शाह ताजी
#Sufinama#SufiKalam#Sufism
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खुला है झूठ का बाज़ार आओ सच बोलें,
न हो बला से ख़रीदार आओ सच बोलें।
सुकूत (खामोशी) छाया है इंसानियत की कद्रों पर,
यही है मौक़ा-ए-इज़हार आओ सच बोलें।
#क़तील_शिफ़ाई
तुझ से गिले करूँ तुझे जानाँ मनाऊँ मैं
इक बार अपने-आप में आऊँ तो आऊँ मैं
फिर उस गली से अपना गुज़र चाहता है दिल
अब उस गली को कौन सी बस्ती से लाऊँ मैं !
#जौन_एलिया
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फ़ज़ा-ए-दिल पे उदासी बिखरती जाती है
फ़सुर्दगी है कि जाँ तक उतरती जाती है
फ़रेब-ए-ज़ीस्त से क़ुदरत का मुद्दआ मालूम
ये होश है कि जवानी गुज़रती जाती है
~फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
मुझे शिकवा नहीं बर्बाद रख बर्बाद रहने दे
मगर अल्लाह मेरे दिल में अपनी याद रहने दे...
तिरी शान-ए-तग़ाफ़ुल पर मिरी बर्बादियाँ सदक़े
जो बर्बाद-ए-तमन्ना हो उसे बर्बाद रहने दे...
#बेदम_शाह_वारसी#Rabb#Shair