प्रतियोगी छात्र:- मैने अपनी तैयारी 2018 में शिक्षक भर्ती के लिए की थी
2018 से आज तक उसी भर्ती की तैयारी कर रहा हूं😳 क्यो क्योकि सरकार खाली पद होने का बावजूद भर्ती नही निकाल रही
राहुल गाँधी:- ऐसा होता क्यों है
छात्र:- ये सरकार की मनमानी है
UPSSSC में 2022 की 9-10भर्तियां आज भी लम्बित है पूरी नही की जा सकी !!
आप चुनाव कराते है 3 महीने मे रिजल्ट दे देते है आप हमारा रिजल्ट 5 साल मे नही दे पा रहे है !!
ब्रेकिंग न्यूज़। अल्मोड़ा। उत्तराखंड।
पहाड़ जैसा हौसला, आसमान छूता नवाचार। रवि टम्टा ने साबित किया है। उड़ने वाली टैक्सी बनाई। जन्म पहाड़ में हो तो हौसले भी पहाड़ जैसे हो सकते हैं। प्रतिभा अपना रास्ता बना ही लेती है। अल्मोड़ा के रवि टम्टा ने इसका शानदार उदाहरण पेश किया है। सुदूर पहाड़ से निकलकर उन्होंने ‘हैपिडा स्काईनेक्स’ उड़ान वाहन प्रोटोटाइप का सफल परीक्षण किया है।
रवि इस परियोजना को सुरक्षित और विद्युत चालित व्यक्तिगत उड़ान वाहन के रूप में विकसित कर रहे हैं। वर्षों के शोध, निर्माण और परीक्षण के बाद प्रोटोटाइप की सफल उड़ान परियोजना का पहला बड़ा मील का पत्थर है।
#Almora #FlyingTaxi #Uttarakhand #Innovation @pushkardhami@ukcmo
यह शिक्षा आयोग की नियमावली है।
इसमें साफ साफ लिखा है,#जहां इंटरव्यू नहीं होगा""""वहां लिखित परीक्षा के 100% अंक जोड़े जाएंगे।
और जिन परीक्षाओं में इंटरव्यू होता है वहां ,90% अंक लिखित परीक्षा के और 10% अंक इंटरव्यू के जोड़े जाएंगे।
एक बात और बेसिक में 100% अंक जोड़ने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है,वहां से अनुमति मिल चुकी है..
इसलिए प्राथमिक में एकेडमिक हटाकर SUPERTET लिखित परीक्षा आधार मेरिट चयन होगा
तो क्या आप पेपर लीक खत्म करने आए थे या उसका नया रिकॉर्ड बनाने?
बीते कल की गलतियां गिनाने से आज की नाकामी छोटी नहीं हो जाती ।।
छात्र पूछ रहा है कि 12 साल बाद भी व्यवस्था सुधरी क्यों नहीं - पेपर लीक रुके क्यों नहीं?
आप आज भी वही बहाना बनाकर ताली बजवा रहे है कि ‘पहले भी होता था’, तो फिर बदलाव किस बात का?
काहे के अच्छे दिन ??
नेता जी की रैली में अगर हम बांस गाड़ने के लिए
गड्ढा नहीं कर सकते तो किस काम की ऐसी सड़कें??
पटना में टैक्सपेयर्स को शोर मचाने के बजाए नेता जी का साथ देना चाहिए।
नितिन गडकरी अब
(ऑन 27.06.2026)
“पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से मेरा कोई लेना देना नहीं”
नितिन गडकरी तब
(ऑन 14.06.2026)
“मेरे लिए आज ख़ुशी का दिन है कि कल रात 8 PM बजे, मैंने 100% इथेनॉल के इस्तेमाल को क़ानूनी तौर पर मंज़ूरी देने के लिए नियमों को फ़ाइनल करते हुए फ़ाइल पर साइन किए…”
माउंटेन ड्यू ऐड : डर सबको लगता है, गला सबका सूखता है
Video Courtesy @ANI
एक ट्रेंड चल रहा है— 'Reservation Hatao'
हो सकता है आपके चार दोस्त हों, जिन्हें लगता हो कि आरक्षण की वजह से उनका चयन नहीं हुआ। उनकी पीड़ा भी वास्तविक है, उसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
लेकिन क्या सिर्फ़ उन्हीं चार लोगों की कहानी पूरे भारत की कहानी है?
मैं गाँव से आता हूँ। मैंने अपनी आँखों से ऐसे परिवार देखे हैं जो इंसानी मल साफ़ करते थे। ऐसे बच्चे देखे हैं जिन्हें स्कूल में अलग बैठाया जाता था। जिनके छू लेने पर लोग नहाने चले जाते थे। यह कोई सैकड़ों साल पुरानी कहानी नहीं, आज भी बहुत से गाँव ऐसे हैं जहाँ वो समाज के नल से पानी नहीं पी सकते। आज भी उनकी बारात गाँव के बीच से नहीं निकल सकती।
सोचिए... जिस समाज ने किसी इंसान को जन्म के आधार पर ही सम्मान से वंचित कर दिया हो, उस मानसिक और सामाजिक दूरी का क्या ?
इसका मतलब यह भी नहीं कि आज का आरक्षण सिस्टम बिल्कुल परफेक्ट है।मैं खुद मानता हूँ कि Reforms की ज़रूरत है।?
जैसे General वर्ग में EWS आया।
जैसे OBC में Creamy Layer और Non-Creamy Layer का सिद्धांत आया।
SC/ST आरक्षण में जिन परिवारों की कई पीढ़ियाँ शिक्षा और अवसरों के माध्यम से आगे बढ़ चुकी हैं, उनके बारे में भी नीति-निर्माण के स्तर पर चर्चा हो सकती है।
लेकिन एक बात समझिए।
जब राजनीति आज भी जाति पर होती है...
जब समाज में आज भी जाति पूछी जाती है...
जब सामाजिक भेदभाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ...तब केवल यह कहना कि "आरक्षण पूरी तरह खत्म कर दो और सब कुछ सिर्फ़ आर्थिक आधार पर कर दो"
मेरा मानना है कि देश को दो अतियों से बचना होगा।
एक - 'कुछ मत बदलो।'
दूसरी -'सब खत्म कर दो।
'सही रास्ता है- सुधार (Reform), डेटा के आधार पर नीति, और सामाजिक न्याय के साथ समान अवसर।
क्योंकि किसी भी नीति का उद्देश्य समाज को बाँटना नहीं, बल्कि एक दिन ऐसी स्थिति तक पहुँचाना होना चाहिए जहाँ किसी विशेष सहायता की आवश्यकता ही न रह जाए।
देश के बच्चे Jantar Mantar के फुटपाथ पर सो रहे हैं, और TV Media PM Modi की Reel पर जश्न मना रहा है
अगर आपके सीने में इंसान का दिल है तो पिघल जाएगा,पत्थर हो चुके हैं तो मत देखिए
लोकसभा 27 जुलाई तक स्थगित कर दी गई है।
जनता के टैक्स से चल रही संसद में अब तक न किसी मुद्दे पर चर्चा हुई और न ही कोई बहस।
टैक्स का पैसा उड़ाया जा रहा है, मस्त कैंटीन में 5 रुपए की रोटी तोड़ रहे हैं।
छात्र लाठी खा रहे हैं, माँ बाप का कमाया पैसा सांसद लोग लोकसभा की कैंटीन में खा रहे हैं।
विपक्ष रोटियाँ सेंक रहा है…
तो आग बुझा दीजिए।
गैस सिलेंडर, माचिस और चूल्हा तो आपके ही हाथ में है।
पेपर लीक रुकवा दीजिए । युवाओ का भविष्य बचा लीजिए ।
राजनीति अपने आप ठंडी पढ़ जाएगी।