आदरणीय श्री भूपेंद्र चौधरी जी (निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा) को उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ लेने पर हार्दिक बधाई।💐💐
@myogiadityanath@Bhupendraupbjp@BJP4UP
Delimitation को लेके देश में बहस शुरू हो चुकी है और जैसा की मुझे अंदेशा था वही झूठ पूरे जोर शोर से फैलाया जा रहा है की दक्षिण भारत ने तो अपनी आबादी कंट्रोल कर ली थी पर उत्तर भारत बेहताशा जनसंख्या वृद्धि किए जा रहा है। इस कारण पॉपुलेशन कंट्रोल लागू करने वाला साउथ डेलिमिटेशन में नुकसान उठाएगा। और नार्थ की बल्ले बल्ले हो जाएगी। साउथ को विक्टिम दिखाया जा रहा है। जबकि हकीकत इसके उलट है। हमे कुछ नहीं करना। बस पिछले डेढ़ सौ सालों का सेन्सस का डेटा और अलग अलग regions में हुई पॉपुलेशन ग्रोथ देखनी है। दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
सेन्सस का हम स्टार्टिंग पॉइंट 1871 ना लेके 1881 लेंगे। क्युकी 1881 में ही भारत का पहला synchronous सर्वे हुआ था। 1871 वाले में कई राज्यो का 40 साल पुराना डेटा इंक्लूड कर रखा था। पर 1881 से ये पिक्चर क्लियर हो जाती है।
भारत को चार geographical regions में बाँटते हैं:
East — Bengal, Odisha
West — Gujarat, Maharashtra
North — सभी Hindi-speaking states (North + Central India)
South — Kerala, Karnataka, Tamil Nadu, Andhra Pradesh
पहले starting point 1881 में इन चारों की क्या आबादी थी?
East India: 2 करोड़ 58 लाख — 12.08%
West India: 2 करोड़ 87 लाख — 13.44%
South India: 4 करोड़ 61 लाख — 21.56%
North India: 10 करोड़ 67 लाख — 49.85%
अब ending point के लिए हमारे पास 2011 Census है। इसमें इन चारों रीजन्स की क्या आबादी थी?
East India: 16 करोड़ 44 लाख — 13.58%
West India: 17 करोड़ 28 लाख — 14.27%
South India: 25 करोड़ 12 लाख — 20.75%
North India: 56 करोड़ 27 लाख — 46.47%
कुछ दिखायी दे रहा है?
North India की आबादी 1881 में 49.85% थी। और 2011 में 46.47%. यानी 130 सालों में North का share घटा है। लगभग 3% कम हो गया।
और South? 1881 में 21.56%। 2011 में 20.75%। मात्र 0.81% कम।
पर बीच में क्या हुआ? ये और interesting है।
1881 — North: 49.85%, South: 21.56%
1901 — North: 46.16%, South: 24.23%
1921 — North: 44.14%, South: 25.56%
1951 — North: 42.61%, South: 26.08% ← South PEAK
1971 — North: 41.90% ← North LOWEST, South: 24.69%
2011 — North: 46.47%, South: 20.75%
देखिए क्या दिख रहा है?
North India की आबादी लगातार 90 सालों तक — 1881 से 1971 तक 1881 वाले share से नीचे गिरती रही। 49.85% से गिरते-गिरते 1971 में 41.90% — lowest point।
इसी दौरान South? लगातार 90 सालों तक बढ़ती रही। 21.56% से बढ़ कर 1951 में 26.08% peak। ये 1881 के share से 5% ज़्यादा था।
यानी जब South अपने peak पे था तब North अपने lowest पे था। और ठीक उसी समय delimitation पे embargo लगा।
अब cumulative growth देखिए। 1881 से 2011 तक:
National average growth: 465%
Eastern India: 535%
Western India: 500%
Southern India: 444%
Northern India: 427%
पढ़िए फिर से।
Northern India 427%। चारों में सबसे कम। National average से 39% कम। South से भी 17% कम। East से पूरे 108% कम।
अगर 1881 से 1951 तक देखें 70 साल तो?
South: 104% growth — FIRST RANK
East: 89% — SECOND
West: 67% — THIRD
North: 44% — LAST
शुरू के 70 सालों में सबसे ज़्यादा आबादी किसकी बढ़ी? South की। सबसे कम? North की।
यानी 150 साल के census data से ये crystal clear है North is NOT the culprit of population explosion। And South is NOT the posterboy of population control।
अरे भई UP का share 1881 में 20.94% था। 1971 में? 15.30%। ये किसी भी state का सबसे बड़ा fall था। UP की population 1901 से 1921 तक negative growth में थी famines और 1918 Spanish Flu ने तबाही मचाई।
Hindi belt की population 1881 से 1921 तक 40 साल virtually stagnant रही। This is among the least known facts of the demographic history of Modern India.
और contrary to popular propaganda सबसे ज़्यादा आबादी बढ़ी Eastern India की (535%) और उसके बाद Western India की (500%)। पर उन्हें जनसंख्या वृद्धि के लिए कोई गाली नहीं देता। गाली किसे देते हैं? जिसकी सबसे कम बढ़ी North को।
This is the power of propaganda and narrative control.
डेलिमिटेशन में हउवा खड़ा किया जा रहा है की साउथ की सीटे घटेंगी। अमित शाह साफ़ कह चुके है नहीं घटेंगी किसी की भी। और मैं कह रहा हूँ घट भी गई तो? 1971 के delimitation में UP की seats भी तो घटी थीं। केरल और कर्नाटक की 2-2 बढ़ी थीं। तब तो किसी ने हाय-तौबा नहीं मचाई। तब तो UP की seats घटने से किसी को कोई problem नहीं हुई।
एक और उदाहरण देखिए ।
Rajasthan — 2011 population 6 करोड़ 85 लाख। Lok Sabha seats: 25।
Karnataka — 2011 population 6 करोड़ 11 लाख। Lok Sabha seats: 28।
Rajasthan की population 75 लाख ज़्यादा। पर seats 3 कम।
Madhya Pradesh — 7 करोड़ 26 लाख। Seats: 29।
Tamil Nadu — 7 करोड़ 21 लाख। Seats: 39।
MP की population TN से ज़्यादा। पर seats? 10 कम। दस!
प्रति MP कितने लोगों को represent कर रहा है?
Rajasthan: 27.4 लाख per MP
Bihar: 26 लाख per MP
UP: 25 लाख per MP
Tamil Nadu: 18.5 लाख per MP
Kerala: 16.7 लाख per MP
Kerala का हर MP, UP के MP की तुलना में लगभग आधे लोगों को represent करता है। तो एक Kerala voter की vote UP voter से 1.6 गुना ज़्यादा valuable है?
ये "one person, one vote, one value" कहाँ है?
और इस disparity का real-world impact? MPLAD Member of Parliament Local Area Development Scheme। हर MP को विकास कार्य के लिए साल में 5 करोड़ रुपए मिलते हैं। ये allocation irrespective of constituency population है। यानी 16.7 लाख लोगों वाले Kerala के constituency को उतना ही fund मिलेगा जितना 27.4 लाख वाले Rajasthan के constituency को। Per-capita MPLAD spending छोटी constituencies में लगभग double है बड़ी constituencies के मुक़ाबले। ये disparity है या नहीं?
cc to @AmitShah@HMOIndia@narendramodi
आज प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी करेंगे देहरादून - दिल्ली एक्सप्रेसवे) का लोकार्पण...साथ में रहेंगे केंद्रीय सड़क एवं राजमार्ग मंत्री श्री @nitin_gadkari जी और उत्तराखंड के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री @pushkardhami जी...
CM Yogi takes cognizance of the Shahjahanpur incident. FIR against the company that vandalized the statues of martyrs during the road widening project. Officers responsible for the work suspended with immediate effect. CM Yogi orders restoration of the vandalized statues of martyrs: Uttar Pradesh CMO
आज से 10 साल पहले उत्तराखंड में एक ज्योतिषी स्वर्गीय बेजान दारूवाला जी आए और उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि हरीश रावत 2017 का चुनाव जीत कर मुख्यमंत्री बनने वाले हैं लेकिन हरदा दोनों सीटों पर हार गए।
अलग-अलग बाबा और ज्योतिषाचार्य उत्तराखंड की राजनीति में अनुमान लगाते रहते हैं लेकिन यह अनुमान धरातल पर दूर की कौड़ी की साबित होते हैं। आजकल उत्तराखंड में एक ऐसा ही अनुमान सियासी गलियारों में तैर रहा है जिस पर प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि 2027 का चुनाव भाजपा सीएम @pushkardhami
के नेतृत्व में ही लड़ेगी।
इसके पीछे कुछ ठोस कारण भी नजर आते हैं
जनवरी 2026 निकल चुका है और दिसंबर 2026 तक आचार संहिता लगने की संभावना है। ऐसे में भाजपा के पास कुछ ही महीनों का प्रभावी समय बचता है। इस समयावधि में मुख्यमंत्री बदलना न तो प्रशासनिक रूप से व्यावहारिक है और न ही भाजपा की स्थापित राजनीतिक रणनीति का हिस्सा।
सबसे मुख्य, भाजपा नेतृत्व परिवर्तन तभी करता है जब सरकार पूरी तरह असफल हो। पुष्कर सिंह धामी के मामले में ऐसी कोई स्थिति नहीं है।केंद्र में प्रधानमंत्री @narendramodi और राज्य में धामी जी की जोड़ी उत्तराखंड में हर चुनाव में सफल हुई है।(लोकसभा से लेकर नगर निगम नगर निकाय पंचायत चुनाव तक)
इसके अलावा वे उत्तराखंड के 25 वर्षों में पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन पर क्षेत्रीय पक्षपात का आरोप नहीं टिकता। कुमाऊं से होने के बावजूद गढ़वाल में उनकी स्वीकार्यता बनी हुई है,(विकास कार्यों के चलते) जो राज्य की राजनीति में एक बड़ा संतुलन है। भाजपा इस संतुलन को चुनाव से ठीक पहले तोड़ने का जोखिम नहीं ले सकती।
सबसे अहम कारण यह है कि अगर सैद्धांतिक रूप से नेतृत्व परिवर्तन की संभावना मानी भी जाए, तो ऐसा कोई नया चेहरा नहीं है जिसके सामने एंटी-इनकंबेंसी न खड़ी हो। संभावित विकल्प वर्षों से सत्ता और मंत्रालयों का हिस्सा रहे हैं, और उनके विभागीय कार्यों, फैसलों और विवादों से जुड़ी असंतुष्टि स्वतः उनके साथ जुड़ जाती है। ऐसे में किसी चेहरे को “फ्रेश फेस” के रूप में पेश करना राजनीतिक रूप से संभव नहीं है।
भाजपा 2027 में दस साल की सत्ता के बाद चुनाव लड़ने जा रही है, इसलिए पार्टी का फोकस नेतृत्व बदलने के बजाय नैरेटिव बदलने पर है। सरकार के काम, कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार पर कार्रवाई और वैचारिक स्पष्टता को चुनावी मुद्दा बनाना तभी संभव है जब नेतृत्व स्थिर हो। वर्तमान सरकार के बड़े फैसलों को देखकर और भाजपा की चुनावी कार्यशैली को देखते हुए यह साफ है कि 2027 का विधानसभा चुनाव उत्तराखंड में भाजपा पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में ही लड़ेगी।
बेटी अंकिता भंडारी को न्याय दिलाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। अंकिता के माता-पिता ने भेंट के दौरान CBI जांच की मांग रखी थी जिसका सम्मान करते हुए हमारी सरकार ने इस मामले की जांच CBI से कराने का निर्णय लिया है।
मातृशक्ति की सुरक्षा एवं उनके सम्मान के लिए हमारी सरकार सदैव प्रतिबद्ध रही है। देवभूमि उत्तराखंड में कानून का राज है, यहां दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।
शासकीय आवास पर दिवंगत बेटी अंकिता के माता-पिता से भेंट हुई। इस दौरान उनके द्वारा रखी गई मांगों पर विधि-सम्मत, निष्पक्ष एवं त्वरित कार्रवाई का उन्हें आश्वासन दिया।
हमारी सरकार पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है और उन्हें न्याय दिलाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
#AnkitaBhandari के बेहद दुखद, संवेदनशील मामले में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री @pushkardhami ने स्पष्टता से सामने आकर बात की है। धामी ने कहा कि, बेटी का परिवार जो कहेगा, वह सब करूँगा और न्याय दिलाऊँगा।
प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा मन की बात में उत्तराखंड के विंटर टूरिज़्म की चर्चा राज्य में नई संभावनाओं की पुष्टि है
मुख्यमंत्री @pushkardhami जी के प्रयासों पर यह मुहर उत्तराखंड के पर्यटन को ऊंची उड़ान प्रदान करेगी
अब औली,मुनस्यारी, चोपता जैसी तमाम जगहें नये विंटर डेस्टिनेशन हैं
बड़े भाई आदरणीय श्री @JitinPrasada जी (मा. केंद्रीय मंत्री) को जन्मदिन की अनंत मंगलकामनाएं।
आप स्वस्थ व प्रसन्न रहें और इसी प्रकार राजनैतिक सोपान चढ़ते हुए समाजसेवा के क्षेत्र में और अधिक नाम व कीर्तिमान स्थापित करें, पूज्य गुरुदेव बाबा नींब करौरी महाराज जी से यही प्रार्थना है।
@JyotiDevSpeaks यह चित्र फरवरी 1999 का है।
मेरे चाचा डॉ. उदयवीर सिंह जी के विवाह का
श्री @pushkardhami जी, दयाशंकर सिंह जी-मंत्री, सन्तोष सिंह जी-MLC, आशीष सिंह आशू-MLA, प्रो. जयशंकर पांडेय जी, स्व. शिवाजी चन्द्रमौलि जी व सभी सम्मानितजन उस समय लखनऊ विश्वविद्यालय में @abvplu के प्रमुख स्तंभ थे।
@Jairam_Ramesh लगातार राज्यसभा हथियाने वाले प्रमुख रणनीतिकार के अनुसार इनकी नैतिक जीत है(चार्ट संलग्न)
इंडी के 15 वोट स्लिप हो गए, लेकिन ज्ञान नैतिकता का
एक बार खुद लोकसभा चुनाव भी लड़ लो भाई
जितिन/RPN/JS/मिलिंद जैसे पब्लिक लीडर्स का हक मारकर बैठे इन लोगों की वजह से ये हाल हुआ है कांग्रेस का
माननीय केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी ने इस संगोष्ठी कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण के प्रति एक विशेष पहल करते हुए वृक्षारोपण भी किया। कार्यक्रम को इफको के उपाध्यक्ष श्री बलवीर सिंह जी व इफको के विपणन निदेशक श्री योगेंद्र कुमार जी ने भी संबोधित किया। इस दौरान अन्य जनप्रतिनिधि गण, कृषि और संबद्ध विभागों के अधिकारी गण और बड़ी संख्या में किसान बंधु मौजूद रहे। @ChouhanShivraj@OfficeofSSC@AgriGoI@Dileep_Sanghani
केंद्रीय कृषि मंत्री श्री @ChouhanShivraj जी (पूर्व मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश) के संसदीय क्षेत्र विदिशा में आयोजित वृहद वृक्षारोपण व उन्नत कृषि तकनीक संगोष्ठी में माननीय मंत्री जी के साथ पूज्य पिताजी श्री @BalveerSinghBJP जी की भी उपस्थिति रही।
@OfficeofSSC@BJP4India @IFFCO_PR
प्रख्यात अभिनेता व हमारी पुवायाँ (शाहजहाँपुर) की माटी के सपूत श्री राजपाल यादव जी से देहरादून में स्नेहपूर्ण भेंट हुई।
राजपाल जी की अपनी मातृभूमि तथा उत्तराखंड से लेकर उत्तर प्रदेश तक विस्तारित संपूर्ण तराई क्षेत्र के लिए कुछ करने की ललक व विज़न अनुकरणीय है।
@rajpalofficial