सुनो @ABPNews अपने कर्मचारियों से फ़ोन करवाकर माफ़ी माँगना बंद करो. माफ़ी गलती की माँगी जाती है बदमाशी की नहीं. मेरे बारे में अफ़वाह उड़ा कर तुम IT सेल को स्क्रीनशॉट मुहैया करा रहे थे? तुम्हारी इस घटिया हरक़त से मेरी छवि और गरिमा को जो ठेस पहुँची है उसकी कोई माफ़ी नहीं है.😡
A good rule of history: if you find yourself opposing a student movement while siding with the ruling class, you're wrong. Every time, in every era, whatever the issue.
You’ve heard a lot about Umar Khalid through the media. But amid the media witch-hunt against him, there has been very little space for him to speak for himself, especially since he’s spent the last six years in jail.
So I want to tell you a little about my friend Umar, in his own words, as shared with his family and friends.
ये वही दिल्ली पुलिस की महिला कॉन्स्टेबल है, जिसने NSUI की छात्राओं को प्रदर्शन के दौरान बर्बरतापूर्वक पीटा और फिर पुलिस स्टेशन के तहखाने में ले जाकर बेल्ट और पट्टों से मारा। हमारी छात्राओं को गंभीर चोटें आई हैं।
अब इसी महिला कॉन्स्टेबल को प्राइवेट गाड़ी में बैठाकर बचाकर ले जाया जा रहा है।
आखिर किसे बचा रही है दिल्ली पुलिस? छात्राओं को पीटने वालों पर कार्रवाई कब होगी? दोषियों को बचाना बंद करो और हमारी छात्राओं को न्याय दो!
दिल्लीतील ज्ञानेश कुमार आंदोलनातील ट्विस्ट:
ज्या पोलिसांना रस्त्यावर गुंडागर्दी करताना पाहिले,
महिला मुलींवर हात टाकताना दिसले,
ते भाजपचे (अमित शहा) नकली पोलिस होते,
भाडोत्री गुंडांना खाकी गणवेश देऊन आंदोलकांना रोखण्यासाठी उतरवले होते
दिल्लीत आंदोलनाच्या आसपास खाकी पोलिस वर्दी ने गच्च भरलेल्या गाड्या होत्या
कोणासाठी?
नेमप्लेट शिवाय जे पोलिस दिसत होते ते अशी वर्दी घातलेले गुंड होते
हाच राष्ट्रीय सुरक्षेचा गुजरात पैटर्न आहे!
उघडा डोळे आणि बघा नीट!