संवत पन्द्रै सौ तैसठ आई,
मास आसोज सातूं सुद पाई!
शुक्रवार वरत्यो दिन जाई,
उण दिन नाथजी समाध लगाई!
गुरुदेव श्री जसनाथजी के 520वें अंतर्ध्यान दिवस की पूर्व संध्या,16 अक्टूबर को सबद गायन एवं अग्नि नृत्य तथा 17 अक्टूबर प्रातः हवन धोक हेतु कतरियासर में सर्व समाज का हार्दिक स्वागत है।
जांभाथळ: कतरियासर के दक्षिण में सरकारी अभिलेखों में दर्ज ‘जांभाथळ’ नामक धोरा (टीला) है। लोकधारणा अनुसार, संत जांभोजी जब सिद्धाचार्य जसनाथजी से मिलने आए, तो आचार्य की यौगिक शक्ति से उनका रथ यहीं घूम गया और उन्हें धोरे तक पैदल चलना पड़ा। ‘जांभाथळ’ उसी घटना की स्मृति है।
सोई बाण देवतां सानदयो, सो पण खाँचां तीरुं।
सीखो खोजो विवरो बिनो, खोज लियो गुरु वीरूँ।
गुरु रीखियाँ री हाल्यो नाहीं, डगर न पायो डांडो।
अकल-विहुणा लंमनर होड़ै, जां'रै सत गुरु भयो न खांडो।
#Jasnath#Jasnathi#36rules@absmbkn
https://t.co/OxZq7IlpkO
गुरुदेव जसनाथजी से स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना के साथ, बीकानेर के वरिष्ठ पत्रकार एवं @1stIndiaNews के सीनियर रेजिडेंट एडिटर श्री लक्ष्मण राघव जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। @kunwarraghav@CharLineNews
गुरुदेव जसनाथजी के 520वें अंतर्ध्यान दिवस (आसोज शुक्ल सप्तमी) की पूर्व संध्या 16 Oct को सबद गायन एवं अग्नि नृत्य तथा 17 Oct प्रात हवन-धोक हेतु,तपोभूमि कतरियासर में सर्व समाज का हार्दिक स्वागत है।@RajGovOfficial@PoliceRajasthan@INCRajasthan@BJP4Rajasthan
#Katriyasar:
मंत्री जी, तपोभूमि कतरियासर में आपका हार्दिक स्वागत है।@Sumit_Godara11
19 जुलाई की बैठक में पूर्व सांसद एवं मंत्री कैलाश चौधरी जी की उपस्थिति में सती मंदिर पुजारी मोहननाथ जी ने गुड़ खाकर पैनोरमा के स्टे हटवाने की सहमति दी, कृपया उस पर अमल करवाएं। #Bikaner#Jasnathi
#Jasnathji—
गुरुदेव श्री जसनाथजी के 520वें अंतर्ध्यान दिवस (आसोज शुक्ल सप्तमी) की पूर्व संध्या 16 अक्टूबर को सबद गायन एवं अग्नि नृत्य तथा 17 अक्टूबर प्रातः हवन-धोक हेतु कतरियासर में सर्व समाज का हार्दिक स्वागत है।
#जसनाथी#राजस्थान#बीकानेर#नोखा#लूणकरणसर#श्रीडूंगरगढ#बाड़मेर
संवत पन्द्रै सौ तैसठ आई,
मास आसोज सातूं सुद पाई!
शुक्रवार वरत्यो दिन जाई,
उण दिन नाथजी समाध लगाई!
गुरुदेव श्री जसनाथजी के 520वें अंतर्ध्यान दिवस की पूर्व संध्या,16 अक्टूबर को सबद गायन एवं अग्नि नृत्य तथा 17 अक्टूबर प्रातः हवन धोक हेतु कतरियासर में सर्व समाज का हार्दिक स्वागत है।
#Bikaner: सिद्ध समाज प्रतिनिधिमंडल ने की मुख्यमंत्री से मुलाकात
बीकानेर से जयपुर पहुंचा समाज का प्रतिनिधिमंडल, मुख्यमंत्री ने सराहा जसनाथजी महाराज का योगदान, सांस्कृतिक विरासत....
#RajasthanWithFirstIndia#BikanerNews@BikanerDm
सिद्ध समाज मांगपत्र—
1. सिद्धेश्वर जसनाथ कल्याण बोर्ड का गठन।
2. बीकानेर में बाड़ी/समाधि स्थल तथा जयपुर में छात्रावास हेतु भूमि आवंटन।
3. समाज को केंद्र स्तर पर ओबीसी आरक्षण।
4. सिद्धेश्वर जसनाथ जी महाराज की अवतार भूमि डाबला तालाब और समाधि स्थल कतरियासर धाम पर पैनोरमा निर्माण।
ओं बड़ोत सिंभू सिरजणहार,
सर्वे रूप कियो विस्तार।
पाये धरती, सीस गैणार,
ता सिंभूनै निमसकार। 🙏
शिक्षक दिवस के पावन अवसर पर मेरे पूर्वज गुरुदेव श्री जसनाथजी को सादर वंदन एवं
आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।
#शिक्षक_दिवस#नशा_मुक्ति_संवाद_दिवस#लोक_संकल्प#loksankalp
आदरणीय श्री @VasudevDevnani जी,
अध्यक्ष, राजस्थान विधानसभा
विषय: 16वीं विधानसभा के छठे सत्र में सिद्ध जाति को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल करने हेतु राज्य सरकार से राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) को अनुशंसा भेजने के आग्रह बाबत पत्र।
महोदय,
राजस्थान के बीकानेर, नागौर, चूरू, श्री गंगानगर, हनुमानगढ़, जैसलमेर एवं बाड़मेर जिलों में निवास करने वाली शैक्षणिक, सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़ी सिद्ध जाति (एंडोगेमस समुदाय), जिसके सभी 41 गोत्र जाट समाज के समान हैं, राजस्थान में जाट समाज से निकली हुई जाति है। जाट समाज को केंद्रीय अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) सूची में बहुत पहले शामिल किया जा चुका है। इसी प्रकार, सिद्ध जाति के समकक्ष अनेक जातियों को भी केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल किया जा चुका है। उदाहरणार्थ, राजस्थान की राज्य ओबीसी सूची में सिद्ध जाति के साथ क्रमांक 24 पर शामिल जोगी-नाथ समुदाय को भी केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल किया जा चुका है, जबकि सिद्ध जाति आज भी इससे वंचित है।
वर्ष 2001 में वर्मा आयोग ने सिद्ध जाति को ओबीसी के 'C' वर्ग में रखा, जो यह दर्शाता है कि यह जाति आवश्यक मानदंडों को पूर्ण करती है। वर्ष 2011 में भारतीय जनता पार्टी के चूरू सांसद राम सिंह कस्वां जी एवं 2022 में इंडिया गठबंधन के नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल जी ने लोकसभा में सिद्ध जाति को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल करने की मांग उठाई, जिसके अधिकांश परिवार मरुस्थलीय क्षेत्रों में खेती एवं पशुपालन पर निर्भर हैं तथा जिनका उच्च सेवाओं, विधायिका और संसद में प्रतिनिधित्व नगण्य है।
यह स्थिति "One Nation, One Category" के सिद्धांत के विपरीत है और सिद्ध जाति को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल किया जाना उसका सामाजिक, संवैधानिक एवं प्राकृतिक अधिकार है, जिससे उसे केंद्रीय स्तर पर शिक्षा, रोजगार एवं अन्य अवसरों का समान लाभ प्राप्त हो सके। अतः आपसे विनम्र आग्रह है कि राजस्थान विधानसभा के 16वें विधानसभा के छठे सत्र (20 अगस्त 2026 से शुरू) में इस विषय को सदन में उठाकर राज्य सरकार से राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) को सिद्ध जाति को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल करने संबंधी अनुशंसा शीघ्र भेजने का आग्रह करें, सधन्यवाद।
भवदीय,
@Ajaysidh_@RajGovOfficial@RajCMO@BhajanlalBjp@madanrrathore@DIPRRajasthan@RajAssembly@BJP4Rajasthan@ncbc_india@SadhviNiranjan