2 अप्रैल 2018 को बहुजन समाज के उन वीर क्रांतिकारीयों को नमन, जिन्होंने SC/ST एक्ट को बचाने के संघर्ष में अपने प्राणों की आहुति दी। आपका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा, समाज सदैव आपका ऋणी रहेगा ।
जय भीम
देश में संसद व राज्य विधानमण्डलों के सत्र के घटते समय के साथ-साथ हर बार इनके भारी हंगामेदार एवं स्थगन आदि से इनकी जन उपयोगिता का घटता प्रभाव अक्सर गंभीर चिन्ता का विषय रहा है और इसीलिये उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इन दिनों चल रहे 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के तीन-दिवसीय सम्मेलन के दौरान विधानमण्डलों की कार्यवाही के लगातार घटते समय पर चिन्ता व्यक्त किया जाना उचित, सामयिक व सराहनीय, जिसपर सरकार और विपक्ष दोनों को अति-गंभीर होकर इस पर अमल भी ज़रूर करना चाहिये।
भारतीय संसद व राज्यों के विधानमण्डल यहाँ देश की संवैधानिक व लोकतांत्रिक व्यवस्था के अहम स्तंभ हैं तथा सरकार/कार्यपालिका को देश व जनहित के प्रति उत्तरदायित्व बनाये रखने का एक सशक्त माध्यम है। संसद व विधानमण्डलों की कार्यवाही साल में कम-से-कम 100 दिन के कैलेण्डर तथा सही नियमों के हिसाब से शान्ति-व्यवस्था के साथ चले, यह बहुत ज़रूरी है।
इसके अलावा, ’सरकारी मान्यता नहीं होना मदरसा को बंद करने का आधार नहीं’ सम्बंधी माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनऊ बेंच द्वारा दिया गया फैसला अति-महत्वपूर्ण व सामयिक है तथा इस आधार पर श्रावस्ती में मदरसे पर लगी सील 24 घण्टे में हटाने के निर्देश का भी स्वागत।
वैसे भी संभवतः यहाँ कोई भी सरकार नीतिगत तौर पर प्राइवेट मदरसों के विरुद्ध नहीं, बल्कि ज़िला स्तर पर अधिकारियों की मनमानी का ही शायद यह परिणाम है कि इस प्रकार की अप्रिय घटनाओं की ख़बरें आती रहती हैं, जिसपर सरकार को उचित संज्ञान लेकर ऐसी प्रवृति को सख़्ती से ज़रूर रोकना चाहिये।
“यदि बीएसपी नहीं बनी होती तो अब तक ये बाबा साहेब का नाम मिटा देते और जो संविधान में दबे कुचले लोगों को कानूनी अधिकार मिले है उन्हें खत्म कर देते ये तो बीएसपी की वजह से इनकी मजबूरी है।”
~ आदरणीय बहन कु• मायावती जी
@narendramodi माननीय प्रधानमंत्री जी इसी देश में प्राइवेट कंपनियां 5G दे रही हैं आप सत्ता में रहते हुए भी 4G का ऐलान कर रहे हैं इससे बड़ी दुख की बात क्या होगी
उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग जब परीक्षा करवा ही नहीं पाता है तो भंग क्यों नहीं कर दिया जाता।
ऐसे ‘अपरिहार्य कारण’ क्या हो सकते हैं कि जिनको बताया ही नहीं जा सकता। पारदर्शिता ही ईमानदारी को सुनिश्चित करती है और व्यवस्था में विश्वास को भी।
कुछ तो है जिसकी पर्दा-दारी है…
पूरे देश को बहुजन समाज से आने वाली बेटी आयरन लेडी बहन कुमारी @Mayawati जी ने बता दिया कि कैसी होती है शासन, प्रशासन,अनुशासन।
लोकतंत्र का चमत्कार है आदरणीय बहनजी 🔥🔥🔥
केन्द्र सरकार द्वारा कल संसद में, भारी हंगामे के बीच लाया गया 130वाँ संविधान संशोधन बिल, देश में पिछले कुछ वर्षों से चल रहे राजनैतिक हालात में, यह स्पष्टतः लोकतंत्र को कमज़ोर करने वाला लगता है और इसका सत्ताधारी पार्टियाँ अपने-अपने लाभ, स्वार्थ व द्वेष में ज्यादातर इसका दुरुपयोग ही करेंगी, ऐसी जनता को आशंका।
अतः इस बिल से हमारी पार्टी कतई भी सहमत नहीं है। सरकार इसे देश के लोकतंत्र एवं संविधान के हित में ज़रूर पुनर्विचार करे तो यह उचित होगा।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के OSD राजीव दत्ता पर लगे मानव तस्करी के गंभीर आरोप चिंताजनक हैं। सिर्फ जांच नहीं, तुरंत गिरफ्तारी होनी चाहिए ताकि सबूत और गवाह सुरक्षित रहें। सत्ता का संरक्षण अपराधियों को नहीं, न्याय को मिलना चाहिए। #राजीव_दत्ता_को_गिरफ्तार_करो
हम सबके पूर्वजों ने इस सरकार को 2 सीट पर लाकर छोड़ दिया था,क्योंकि उन्होंने देखा था इस सरकार का जुर्म, अहम और घमंड।
लेकिन हम सब बहक गए धर्म, जाति, हिन्दू-मुस्लिम और गाय के मुद्दों पर,,
जिसका परिणाम ये है कि ये सरकार सर पे चढ़ के नाच रही।
#मधुशाला_नहीं_पाठशाला_दो