@HansrajMeena कहते है न मदरसाछाप को बाहरी दुनिया की कोई
जानकारी ही नहीं होती
गरीबी मिटाना ही है तो तू भी कुछ कर
ये कोट पहनना छोड़ दे उस पैसों से कितने गरीबों का भला होगा
"इतिहास मौन नहीं रहता —
वह चीखता है…
और जो उसे नहीं सुनते,
वो एक दिन खुद इतिहास की शव-यात्रा में बदल जाते हैं।"
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20वीं सदी का जर्मनी —
जहां यहूदी सिर्फ एक धर्म नहीं थे,
वो ज्ञान के निर्माता, विज्ञान के जनक, बैंकिंग के स्तंभ,
शिक्षा के मार्गदर्शक और संस्कृति के संरक्षक थे।
जैसे आज भारत में हिंदू हैं।
पर जब नाज़ी विचारधारा ने करवट ली—
तो इन्हीं यहूदियों को बताया गया:
"ये षड्यंत्रकारी हैं"
"ये राष्ट्रविरोधी हैं"
"ये हमारी गरीबी के ज़िम्मेदार हैं"
मीडिया, शिक्षा, और राजनीति को हथियार बनाया गया,
और जनता को घृणा की आग में झोंक दिया गया।
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और फिर...
सिर्फ चार वर्षों में,
25 लाख नाज़ियों ने
60 लाख यहूदियों को
गैस चेंबरों में झोंका,
बच्चों को माँ की गोद से छीनकर मार डाला,
लोगों को जिंदा जला दिया…
इतिहास कांप उठा, पर इंसान नहीं जागे।
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और यह सब हुआ…
क्योंकि यहूदी बहुसंख्यक होते हुए भी असंगठित थे।
वो लड़ना भूल गए,
सोचते रहे – “हमें कुछ नहीं होगा…”
ध्यान दीजिए – ज्ञान था, पर जागरूकता नहीं।
धन था, पर आत्मरक्षा नहीं।
शब्द थे, पर साहस नहीं।
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लेकिन जब राख से उठी एक पुकार,
तो जन्म हुआ — इज़राइल का।
जहाँ…
हर 16 वर्षीय बच्चा सैनिक है,
हर महिला कमांडो है,
स्कूल में जितना गणित सिखाया जाता है, उतना ही राइफल चलाना भी।
राष्ट्र पहले है — धर्म, दल और जाति सब बाद में।
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अब आइए अपने भारत की ओर देखें…
आज हिंदू समाज वहीं गलती दोहरा रहा है।
आपसी फूट
जातिगत द्वेष
आत्ममुग्ध धर्मनिरपेक्षता
और सबसे घातक —
"हमारे साथ कुछ नहीं होगा" वाली मुग्धता।
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क्या आप जानते हैं?
यहूदी धर्म, जो हजारों सालों पुराना है,
आज दुनिया में सिर्फ 2 करोड़ लोग बचा पाया है।
और वहीं इस्लाम और ईसाई,
जो बाद में आए—
आज 5 अरब से अधिक लोगों की वैश्विक ताकत बन चुके हैं,
क्योंकि उनके पास है —
धर्म आधारित एकता।
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जब भारत-पाकिस्तान युद्ध होता है,
तो तुर्की, मलेशिया, ईरान, इंडोनेशिया, सीरिया, अज़रबैजान, सऊदी अरब—
सब खुलकर पाकिस्तान के साथ खड़े होते हैं।
क्यों?
क्योंकि मज़हब एक है।
और भारत के साथ?
सिर्फ संयुक्त राष्ट्र की चुप्पी और राजनयिक पंक्तियाँ।
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अब सोचिए—
अगर यह भारत नहीं रहा तो...
क्या हिंदुओं के पास कोई इज़राइल है?
नहीं!
यह धरती का अंतिम टुकड़ा है जहाँ हिंदू सुरक्षित हैं।
अमेरिका नहीं देगा,
जापान, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया — कोई नहीं देगा।
इसलिए भारत बचाना, खुद को बचाना है।
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आज—
रोहिंग्या को वकील मिल जाते हैं,
बांग्लादेशी घुसपैठियों को राशन और वोटर ID मिल जाती है,
लेकिन राम मंदिर की बात करने पर आपको "कट्टर" कहा जाता है।
गीता पढ़ने पर "हिंदुत्वा" का ठप्पा लगता है।
और आप चुप हैं?
क्यों?
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अब नहीं जागे,
तो आने वाली पीढ़ियों के इतिहास की किताबों में
"हिंदू" एक संस्कृति नहीं,
एक भूली हुई सभ्यता के रूप में दर्ज़ होगा।
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इसलिए…
जाति नहीं, जननी बड़ी है।
भाषा नहीं, भारत बड़ा है।
दल नहीं, धर्म बड़ा है।
खुद नहीं, संघर्ष बड़ा है।
आज भी समय है —
संगठित हो जाइए,
जाग जाइए,
क्योंकि अगर अब नहीं जागे,
तो अगली बार राख तक नहीं बचेंगी।
जय हिंद,
जय भारत,
जय सनातन!
🚩🔥
प्रिय हिन्दुओं!
ब्रिटेन का ताजा हाल..
सिर्फ हम हिंदुओं के लिए नहीं बल्कि दुनिया
की बड़ी गैर-मुस्लिम आबादी के लिए खतरा बन चुका है।
अपनी मातृभू व मूल-संस्कृति को बचाना है,
तो अब संभलना होगा...
बिना रक्त बहाये ब्रिटेन पर कब्जा किया जा
रहा है
इनका अगला शिकार भारत हो सकता है..
सर्वप्रथम जि-हादियों के अर्थतंत्र को कमजोर करो,जिस कौम का अर्थतंत्र कमजोर हो जाता है वह कौम स्वतः खत्म हो जाती है।
आईये,
जिहादियों के इस अर्थतंत्र के खात्मे के लिए,
आज दृढसंकल्पित हो एक कदम बढ़ायें,
मात्र हिन्दू-व्यापारी व हिन्दुओं द्वारा प्रदत्त सेवाएं ही चुनें...
#हलाल जहर है।
बकरा-दाढ़ी भारत ही नहीं पूरी दुनिया के लिए खतरे की वो घंटी है जिसे इग्नोर करने का अंजाम ब्रिटेन समेत दुनिया के कई देश भुगत रहे हैं और अब भारत की बारी है।
काफिरों की हत्या व उनके देशों पर कब्जा करने का मंसूबा रखने वाली जि-हादी मानसिकता का पूर्ण आर्थिक बहिष्कार करो।
हिंदू सोये हुए हैं
झूठे सपनो में खोये हुए हैं
मजहबी दरिंदे नोचते हैं उनको
और हम भाई चारे का बीज बो रहे हैं ।
कब तक बेटियों की लाशें नालों में मिलेंगी?
मिताली को पहले धमकाया, फिर अगवा किया, और अब उसकी लाश मिली—लेकिन व्यवस्था सो रही थी!
यह कोई हादसा नहीं, सनातन पर प्रहार है! अपराधी बचे तो यह सिस्टम की हार होगी! 🚩🔥
तबतक कुछ नही बोलना है जबतक खुद के घर के बेटी कि लाश ऐसे न मिल जाये ।
23 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर मिताली लाल की लाश प्लास्टिक के बैग में लिपटी हुई नाले से बरामद हुई।
दो दिन पहले उसके पिता सोहन लाल ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि सुल्तान मोहम्मद और उसके साथियों ने उसे अगवा कर लिया है।
पिछले दो वर्षों से सुल्तान मोहम्मद, मिताली को लगातार परेशान कर रहा था।
#JusticeForMitali
अपने आसपास के माहौल को सुरक्षित रखें।
जहाँ मंदिर है, वहाँ सनातनी संस्कृति बनी रहनी चाहिए।
सद्भाव बनाए रखें, लेकिन दूरगामी साजिशों से सतर्क रहें।
इनकी मंशा साफ़ है - इरादे भी साफ़ हैं और मुहिम भी जारी हैं,
सवाल और परेशानी तो ये हैं कि हिन्दू कब समझेगा कि ये सब #गजवा_ए_हिन्द की तैयारी है।
ये न धर्म निरपेक्ष थे न है बस हिन्दू ही अपने को धर्म निरपेक्षता के ऐसे उड़ता है जैसे वह महान बन जाएगा।
हिन्दू समाज को जागरूक और संगठित रहना होगा
धर्म और परंपरा की रक्षा के लिए सतर्कता ही सबसे बड़ा शस्त्र है।🚩🔥
ये लैंड जिहाद नहीं तो और क्या है , आखिर एक पीड़ित हिंदू परिवार को न्याय कब मिलेगा।
पहले ग्रामीण और ग्राम प्रधान के कहने पर दिए थे 5 फिट का रास्ता अब उसकी आड़ में दबंगई दिखाकर पूरे 15 फीट और जमीन कब्जा कर रहे है ।
पूरा मामला 👇
थाना कोतवाली देहात बलरामपुर उ. प्र. क्षेत्र के ग्राम छोटा धुसाह मोहल्ले में रास्ते को लेकर चल रहा जंग, पीड़ित हिन्दू परिवार ने कहा सालों पहले ग्रामीण व प्रधान के कहने पर दिया था 5,फिट का रास्ता अब 15,फिट रास्ता 👉दबंग भू माफिया नौशाद अली पुत्र शौकत अली ग्राम छोटा धुसाह👈 कर रहे हैं कब्जा,
जिसका 👉खुद का मकान ग्राम समाज के जमीन👈 पर बना हुआ है और गांव की अन्य 👉ग्राम समाज की जमीन भी कब्जा👈 किए हुए हैं....
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👉गाटा संख्या 249 प्रार्थी की जमीन है और 250 ग्राम समाज की जमीन है जिस पर विपक्षी भू माफिया नौशाद अली पुत्र शौकत अली का घर बना हुआ है और पिछले प्रधान गजेन्द्र पांडेय जी के द्वारा सबकी सहमति से 249 गाटा संख्या से 5 फिट का रास्ता विपक्षी भू माफिया नौशाद अली को दिया गया था पर 24-02-25 को विपक्षी भू माफिया जबरन 249 गाटा संख्या में घुस कर 15 फिट बढ़ा कर 20 फिट का रास्ता बनाने की जबरदस्ती कर रहा हैं कोतवाली देहात बलरामपुर जाने पर भी कोई सुनवाई नहीं हुई और फिर 25-02-25, 26-02-25, 27-02-25, 28-02-2025 को फिर से भू माफिया नौशाद अली पुत्र शौकत अली अपने 5 भाई और स्थानीय भीड़ एकत्रित करके 2 ट्राली 3 ट्राली मिट्टी रोज गिरवा रहा है और भद्दी भद्दी गालियां देते हुए जान से मारने की धमकी भी देता है, स्थानीय देहात कोतवाली बलरामपुर जा कर शिकायत करने पर SHO Sir बोले हल्का के सिपाही को बोल दे रहे वो मना करवा देगा और हल्का सिपाही बोल रहे उसको हम नहीं रोकवा सकते हैं।
👉इसमें हल्का के ग्राम प्रधान, लेखपाल, तहसीलदार और पूरा कोतवाली देहात बलरामपुर के विपक्षी भू माफिया नौशाद अली पुत्र शौकत अली के मिले हुए हैं जिससे प्रार्थी को कोई भी मदद नहीं मिल पा रही है प्रार्थी दर दर की ठोकरें खा रहा है।
👉प्रार्थी को पैरालाइस, शुगर और बीपी का मरीज हैं इसलिए प्रार्थी को मानसिक प्रताड़ित भी कर रहा हैं कि किसी भी तरह से डरा धमका के अपना 20 फिट का रास्ता बना लें।
👉इस विपक्षी भू माफिया नौशाद अली पुत्र शौकत अली को 5 फिट का रास्ता भी नहीं मिलना चाहिए😡 👉प्रार्थी हिन्दू मित्र को सपोर्ट के लिए और भू माफिया पर सख्त कार्रवाई के लिए कमेंट कीजिए और शेयर करे कीजिए ताकि ये संदेश माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी तक पंहुचे और इस हिन्दू मित्र को न्याय मिल सके। @myogioffice@myogiadityanath@Pushpendraamu@AmitShah@AmitShahOffice@112UttarPradesh @TV9UtarPradesh @WeUttarPradesh@Uppolice@balrampurpolice @BalrampurDm @dheerusinghh@PaltuRam@b_bhushansharan@BrijBhushanMP
#सनातन_का_अपमान_विपक्ष_की_पहचान
क्या कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन का असली विरोध भाजपा से है या सनातन धर्म से?
अगर आप गौर करें, तो आपको एक दिलचस्प पैटर्न नज़र आएगा—वही लोग जो कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन (I.N.D.I.A) का समर्थन करते हैं, वे लगातार सनातन धर्म, वैदिक परंपराओं, कुंभ, और भारतीय आध्यात्मिक गुरुओं के खिलाफ लिखते रहते हैं।
कुछ महत्वपूर्ण सवाल जो उठते हैं:
1. धर्मगुरुओं के खिलाफ इतनी नफरत क्यों?
सोशल मीडिया पर देखें तो कांग्रेस समर्थक और विपक्षी गठबंधन के लोग लगातार धर्मगुरुओं के खिलाफ झूठ फैलाते रहते हैं। क्या यह सिर्फ एक व्यक्ति का विरोध है या इसके पीछे सनातन धर्म से गहरी नफरत छिपी हुई है?
2. कुंभ के खिलाफ प्रोपेगेंडा क्यों?
कुंभ मेला दुनिया का सबसे बड़ा आध्यात्मिक आयोजन है, जो लाखों साधु-संतों और श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। लेकिन यही लोग इसे अंधविश्वास और पिछड़ापन कहकर बदनाम करने में लगे रहते हैं।
3. वैदिक परंपराओं पर हमले क्यों?
चाहे हिन्दू त्यौहार हों, परंपराएं हों, गो पूजा हो या फिर भारतीय योग और ध्यान पद्धति—हर चीज़ को या तो ब्राह्मणवादी षड्यंत्र बताया जाता है या फिर उसे पिछड़ा साबित करने की कोशिश की जाती है।
अगर ये लोग भाजपा से ही सिर्फ विरोध रखते तो मुद्दे राजनीतिक होते, लेकिन यहाँ तो हर वह चीज़ निशाने पर है जो सनातन धर्म से जुड़ी हो।
क्या कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन वामपंथी और अब्राहमिक एजेंडों के हाथों में खेल रहा है?
क्या इनका असली एजेंडा हिन्दू धर्म और भारतीय संस्कृति को कमजोर करना है?
अगर आपको भी ये पैटर्न दिख रहा है, तो अब वक्त आ गया है कि हम अपनी संस्कृति और परंपराओं के खिलाफ हो रहे इस सुनियोजित प्रोपेगेंडा को पहचानें और इसका डटकर विरोध करें। हिन्दू एकता ही इनका सबसे बड़ा डर है, और हमें इसी एकता को बनाए रखना होगा!
गंगा जमुना तहजीब का नारा बुलंद करने वाले सेकुलर लोग अब कहां हैं अब उनको सांप सूँघ गया है ?
कुछ बोलेंगे इस मुद्दे पर। बरेली की इस घटना का किसी लिब्रंडु ने विरोध नहीं किया।
होली मनाओगे तो बिछा देंगे लाशें...
हिंदू समुदाय के लोगों पर किया जानलेवा हमला, बरेली में तनाव कायम।
उत्तर प्रदेश के बरेली से हिंदू समुदाय के लोगों पर जानलेवा हमले का मामला सामने आया है।
यहां हिंदू समुदाय के कुछ लोग होली के कार्यक्रम की योजना बना रहे थे कि इसी दौरान मुस्लिम समाज के लोगों ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया।
इस दौरान उन्होंने जान से मारने की भी धमकी दी है।
होली हमारे धर्म का पावन पर्व है और अगर हम अपने ही देश में अपना
पर्व नहीं मना सकते कुछ कुछ जगह पर आज भी लोग गुलामों की
तरह जीवन जी रहे है सोचो बाबर और औरंगज़ेब के टाइम में
कितना बुरा हुआ होगा उस समय तो उनका राज था
कब आजाद होगा भारत का हिंदू...?
मुगलों,
अंग्रेजों,
राष्ट्र विरोधी अफजल,
आतंकवाद,
राष्ट्र द्रोही,
जातिवादी कीड़े,
लाल टोपी,कान साफ करने वाले,
रोहिंग्या,
विदेशी घुसपैठ,
राष्ट्र आस्तीन के सांप,
कन्हैयाओं से,
ममताओं से...?
सख्ती से निपटना होगा..!
जब सोमनाथ के मंदिर को वि ध्वंस करने के लिए मोहम्मद गजनवी सोमनाथ पहुंचा तो वहां के राजगुरु आचार्य ब्रह्मभट्ट ने राजा से कहा कि एक राजा विष्णु का अवतार होता है और मैं इस ज्योतिर्लिंग शिवलिंग की ज्योति आपके शरीर में प्रत्यारोपित करता हूँ...उसके पश्चात आचार्य ने राजा को वहां से प्रस्थान करने को कहा....तत्पश्चात जब गजनी ने मंदिर में प्रवेश किया तो आचार्य ने गजनी को कहा कि तुम अपने गुर्ज को मेरे मस्तक पर दे Maरो क्योंकि आचार्य ब्रह्मभट्ट को ज्ञात था कि मस्तिष्क के अंदर जो रक्त रहता है उसे ब्रह्मकपाली कहते हैं और ये रक्त बहुत ही पवित्र होता है, यदि गजनी ने मेरे शीश पर गुर्ज को मारा तो महादेव का रक्त स्नान के अभिषेक द्वारा विसर्जन हो जाएगा और एक बार विसर्जन होने के बाद कोई भी मुर्ती या पत्थर जिसमें प्राण प्रतिष्ठा कि गई हो वो मिट्टी के समान हो जाता है।ऐसे ही नहीं शेष रहा है हमारा पवित्र सनातन धर्म...इसकी रक्षा के लिए आचार्य ब्रह्मभट्ट जैसी लाखों विभूतियों ने अपनी आहुति दी है...हर-हर महादेव..🔱🚩
यदि गैरकानूनी धर्मांतरण जारी रहा तो इस देश की बहुसंख्यक ( Hindus ) आबादी एक दिन अल्पसंख्यक हो जाएगी।
🧑⚖️ भारत के संविधान का अनुच्छेद 25 'विवेक की स्वतंत्रता और धर्म के स्वतंत्र पेशे, अभ्यास और प्रचार' का प्रावधान करता है, लेकिन एक धर्म से दूसरे धर्म(विश्वास) में Conversion के लिए नहीं।
हिन्दू धर्मान्तरण करते हैं क्योंकि धर्मशिक्षा के अभाव के कारण हिन्दुओं में धर्माभिमान नहीं है ।
30A हिँदूओं को अपने धर्म की शिक्षा देने से रोकता है।
मिशनरी संस्था द्वारा बडे पैमाने मे धर्मांतरण होता है. धर्मांतरण याने राष्ट्रांतरण.ईसपे रोक लगाने हेतु धर्मांतरण कायदा आवश्यक है. और पिछडी जनजाती समाज बंधु में धर्मशिक्षा देना जरुरी है.गरीबी धर्मांतरण का कारण नहीं है
बल्की धर्मशिक्षा का अभाव है.
"जब संकल्प अडिग हो और सेवा भाव सर्वोपरि, तो असंभव कुछ भी नहीं! 🚩 बागेश्वर धाम का कैंसर अस्पताल सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि हजारों जरूरतमंदों के लिए आशा की ज्योति है। यह पहल बताती है कि धर्म केवल उपदेश नहीं, बल्कि समाज कल्याण का आधार भी है।
मन्दिरों को दिया दान कभी व्यर्थ नही जाता। अभिनन्दन बाघेश्वर धाम धीरेन्द्र शास्त्री जी का ,जिन्होंने इतनी कम उम्र में ही धर्म पथ पर चलते हुए कैंसर हॉस्पिटल मेडिकल साइंस एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट खोल दिया!
"RSS ने मेरे जैसे लाखों लोगों को ,
देश के लिए जीने की प्रेरणा दी है..🚩
पिछले 100 वर्षों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत की महान परंपरा और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक संस्कार यज्ञ चला रहा है"
: पीएम नरेंद्र मोदी
बस यही तो सर्जरी थी, जो तुम्हें दिखाया व सुनाया, भ्रम था। दरअसल, सर्जरी चल रही थी।
हालांकि अभी ये तो छोटी हुई है अभी बहुत मेजर होनी है। आख़िर एक देश एक चुनाव जो है।
पीएम मोदी ने आरएसएस को अपना पथ बतलाया है। विज्ञान भवन में आयोजित 98वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने आरएसएस की प्रशंसा करते हुए कहा।
अंधे करके गजनी ले जाते पृथ्वीराज चौहान ।
आग में कूदकर जौहर करती रानी पद्मावती ।
जिंदा खौलते तेल में डाले जाते हरपाल देव यदुवंशी।
हेमू का सर काटकर काबुल भेज दिया गया और धड़ दिल्ली में लटका दिया गया।
गर्म तवे पर बैठाकर गुरू अर्जुनदेव शहीद किए गए।
गुरू गोबिंद सिंह के दो छोटे बच्चे जिंदा दीवार में चिनवाए गए।
40 दिन तक छत्रपति संभाजी को यातनाएं दी गईं।
गोकुल जाट का आगरा कोतवाली पर लटका कर अंग-अंग काटा गया।
पानीपत में घंटों हिन्दू नरसंहार चला, हजारों की तादाद में गुलाम काबुल ले जाए गए।
1857 की हार के बाद बीहड़ में भूखे- प्यासे तात्या टोपे भटकते रहे और अंत में फांसी पर लटका दिए गए।
काला पानी में अपने ही मल-मूत्र में छह-छह महीने Solitary confinement झेलते सावरकर
आजादी के शुभ अवसर तक पर 10 लाख लोगों का नरसंहार, विस्थापन, बलात्कार और एक तिहाई देश सदा के लिए कटकर अलग हो गया।
और जनवरी की एक रात कश्मीर हिन्दू विहीन हो गया।
फिल्म वालों को आपके टिकट के पैसे वसूल कराने हैं वो आपको हार में भी कुछ सकारात्मक अंत दिखाकर ही थिएटर से निकालेंगे लेकिन सच्चाई यह है कि इतिहास का हर पन्ना यातनाओं, चीखों, नरसंहारों और खून से सना है।
हम शायद पहली पीढ़ी होंगे जो तीर्थ जाने के लिए जजिया नहीं दे रहे, देशभक्ति के लिए फांसी पर नही लटकाए जा रहे। मास धर्मांतरण और विस्थापन नहीं झेल रहे। एक स्थिर सरकार में एक बढ़ती इकोनॉमी में कल के लिए बेहतर उम्मीद लिए जीवन जी रहे हैं।
इतिहास बताता है कि हमारा संगठित होकर एक लक्ष्य की तरफ बढ़ना कितना आवश्यक है ताकि जब 100 वर्ष बाद हमारे वर्तमान पर फिल्में बनें तो उनमें केवल बलिदान की कहानियां न हों जीत की भी कहानियां हों।
महाकुंभ का सटीक और सिलसिलेवार हर प्रकार के लोगों के मनोभावों को व्यक्त करता विश्लेषण । जितनी भी प्रशंसा की जाए, कम ही है ।
महाकुंभ में सबको अपने स्वभाव के अनुसार ही दिखाई दिया
🔹 गिद्धों को शव दिखे,
🔹 सूअरों को गंदगी दिखी,
🔹 नास्तिकों को अंधविश्वास दिखा,
🔹 पाखंडियों को मंच दिखा,
🔹 वामपंथियों को कट्टरता दिखी,
🔹 मिशनरियों को ‘भूखा हिंदू’ दिखा,
🔹 मीडिया को सिर्फ़ टीआरपी दिखी,
🔹 दोगलों को सिर्फ़ अव्यवस्था दिखी,
🔹 फेमिनिस्टों को ‘पितृसत्ता’ दिखी,
🔹 बिके हुए बुद्धिजीवियों को नफ़रत दिखी,
🔹 कांग्रेसीयों को ‘धर्मनिरपेक्षता’ ख़तरे में दिखी,
🔹 अर्बन नक्सलों को ‘भगवा आतंक’ दिखा,
🔹 जेहादियों को ‘लव जिjहाद के शिकार’ दिखे,
🔹 पोप के एjजेंटों को ‘बपjतिस्मा के ग्राहक’ दिखे,
🔹 दरबारी पत्रकारों को ‘भक्तों का उन्माद’ दिखा,
🔹 राजनीतिक दलालों को ‘राजनीति का मौक़ा’ दिखा,
🔹 हिंदू विरोधियों को ‘संविधान ख़तरे में’ दिखा,
🔹 टुकड़े-टुकड़े गैंग को ‘संघी साज़िश’ दिखी,
🔹 अल्पसंख्यक प्रेमियों को ‘मुसjलमान डरा हुआ’ दिखा,
🔹 वामपंथी इतिहासकारों को अपनी झूठी किताबें जलती दिखीं,
🔹 अयोध्या को बाबरी कहने वालों को सनातन का प्रतिशोध दिखा,
🔹 राम को मिथक कहने वालों को स्वयं राम का विजय ध्वज दिखा,
🔹 हिंदू विरोधी पार्टियों को उनकी राजनीति का अंत दिखा,
🔹 सनातन को मिटाने का सपना देखने वालों को अपनी क़jब्र खुjदती दिखी,
🔹 वो जो ‘हिंदू आतंjकवाद’ की कहानी लिख रहे थे, उन्हें हिंदू जागृति का महासंग्राम दिखा,
🔹 जो सनातन को जड़ मान बैठे थे, उन्हें उसकी अमर बेल बढ़ती दिखी,
🔹 जो गजवा-ए-हिंद का सपना देख रहे थे, उन्हें सनातन का शस्त्र उठता दिखा,
🔹 जो भारत तोड़ने की साज़िशें रच रहे थे, उन्हें अखंड भारत की गरज सुनाई दी,
🔹 जो राम के अस्तित्व पर प्रश्न उठा रहे थे, उन्हें रामराज्य का सूर्योदय दिखा,
🔹 जो हिंदू संतों का अपमान कर रहे थे, उन्हें संतों की हुंकार सुनाई दी,
🔹 जो सनातन को 1000 साल में मिटा नहीं सके, उन्हें अपनी औकात याद आई,
और
🔹 🚩🚩सनातनियों को आस्था, अध्यात्म, मोक्ष और भारत की आत्मा दिखी।🚩🚩
⚡ “जिनकी आत्मा काली हो, उन्हें गंगाजल भी कीचड़ लगेगा! जिनके पूर्वज ग़ुलाम थे, उन्हें सनातन का वैभव नागवार गुज़रेगा!” ⚡
🔥 “महाकुंभ में जिनके भीतर हिंदू रक्त बह रहा था, उन्हें दिव्यता का अनुभव हुआ… और जिनकी नसों में गुलामी का ज़हर था, उन्हें अपनी राजनीति डूबती दिखी!” 🔥
💥 “जो लोग हिंदू धर्म के अस्तित्व पर प्रश्न उठा रहे थे, उन्हें महाकाल का तांडव दिखा! सनातन मरा नहीं था, बस जाग रहा था ...अब यह जागरण प्रलय लेकर आएगा!” 💥
🚩 “महाकुंभ में आस्था के महासागर में जो डूबा, वो पार हो गया… और जो इसकी दिव्यता से जल गया, वो ख़ाक हो गया!” 🚩
आगे केवल सनातन का उत्थान है और अधर्म का संपूर्ण विनाश!” 🚩🔥
हर हर महादेव 🚩
(संकलन/लेखक ~ भूमि)
सांसद में वक्फ बोर्ड पर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने वक्फ बोर्ड के समर्थन में आवाज उठाई
चलो इनका तो समझ में आता है क्योंकि यह दोनों पार्टियों अपने जन्म से ही कट्टर मुस्लिम परस्त और घोर हिंदू विरोधी पार्टियां हैं
लेकिन मुझे सबसे बड़ा आश्चर्य हुआ कि आम आदमी पार्टी और शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट भी वक्फ बोर्ड के समर्थन में राज्यसभा में बोल रहा है
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह कह रहे हैं कि वक्फ बोर्ड को पूरी आजादी मिलनी चाहिए उसके किसी भी अधिकार में कभी नहीं होनी चाहिए
ठीक यही बात शिवसेना उद्धव ठाकरे की पार्टी भी कह रही है
हिंदुओं इन सबको पहचान लो यह तुम्हारे आने वाली पीढियां को तुम्हारे बच्चों को बर्बाद करना चाहते हैं
ये चाहते है कि वक्फ बोर्ड हिंदुओं की जमीन मकान दुकान खेत खलिहान कब्जा करती रहे
12वर्ष पहले केजरीवाल एकाएक कहीं से आया और दिल्ली जीत ली. फिर दोबारा और तिबारा जीत लिया, वह भी भयंकर भारी बहुमत से.
साथ ही पंजाब जीता, गोवा और गुजरात में भी थोड़ी बहुत पैठ बनाई. किसी भी दृष्टि से एक राजनीतिक फ्रीलांसर के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि होती.
बस एक अंतर है... केजरीवाल राजनीति का फ्रीलांसर नहीं है... फ्रेंचाइजी है.
उसने भारत में वामपंथ की फ्रेंचाइजी ली है. जब खुल्लमखुल्ला कम्युनिज्म की दुकान बन्द हो गई तो दबे छुपे वैश्विक लिबरल वामपंथ को अपना काम पसारने के लिए एक लोकल पार्टनर चाहिए था. इसमें केजरीवाल ने टेंडर भरा और कांग्रेस को पछाड़ते हुए भारत में वामपंथ की दुकान चलाने का कॉन्ट्रैक्ट ले लिया. और इस तरह केजरीवाल का राजनीतिक स्टार्टअप एक एस्टेब्लिश्ड कम्पनी बन गया.
इधर राहुल गाँधी को यह मिस्ड बिजनेस ऑपर्च्युनिटी थोड़ी देर से समझ में आई.
तबतक सारा बिजनेस केजरीवाल लिए जा चुका था. फिर उन्होंने इसकी भरपाई करने में एड़ी चोटी का जोर लगा दिया. उनकी दिखावे की सेंट्रिस्ट पॉलिटिक्स का स्पेस राइट टू सेंटर खिसक कर भाजपा के पास चला गया था. लेफ्ट वाला स्पेस केजरीवाल खाए जा रहा था. इसको देखकर राहुल गाँधी की भाषा बदल कर बिल्कुल नक्सलियों वाली हो गई. वह संपत्ति के बंटवारे की बात करने लगा, भारत को "नेशन" की जगह "यूनियन ऑफ स्टेट्स" बुलाने लगा, जातिवाद और क्षेत्रीयता के नाम पर देश को तोड़ने वाली भाषा खुलकर बोलने लगा.
दिल्ली चुनावों में यह जो कॉन्ग्रेस ने 6% वोट निकाल कर केजरीवाल का पत्ता काट दिया है, यह उसी लॉस्ट स्पेस और मिस्ड बिजनेस ऑपर्च्युनिटी को वापस पाने की कोशिश है. आने वाले दिनों में कॉन्ग्रेस और आपदा के बीच अपने नक्सली क्रेडेंशियल स्थापित करने में और कड़ा मुकाबला होने की संभावना है... अगर उनके विदेशी आकाओं की ओर से कोई डील न आ जाए. यह भी संभव है कि उनकी टेरिटरी बांट दी जाए कि दोनों में कौन देश के किस हिस्से में पेट्रोल छिड़केगा और कौन कहाँ माचिस मारेगा. यह डील इस दिल्ली चुनाव के पहले भी आ सकती थी, लेकिन क्या है कि उनके मालिकों की अपनी ही हालत पस्त है और वे ट्रम्प और मस्क से अपना ही चेहरा बचाने में उलझे हुए हैं।
ना कोई ऊंचा ना कोई नीचा
सब सामान है !
विश्व चकित है !!*
होना भी चाहिये।
ना कोई मास्क हैं।
ना कोई दूरियां हैं।
ना कोई सैनिटाइजर्स हैं।
करोड़ों मानव एक ही नदी में एक सीमित जगह पर स्नान कर रहे हैं।
कैसी श्रद्धा है।
कैसी गंगा मां है।
कैसी आस्था है और कैसा कुंभ है।
कैसा धर्म है।
कैसा विज्ञान है।
कैसा सितारों का योग है।
जन सैलाब एक ही उद्देश्य को लेकर उमड़ रहा है।
पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति।
ना कोई जात-पात का भेद।
ना कोई वर्ण का भेद।
ना कोई ब्राह्मण।
ना क्षत्रिय।
ना वैश्य।
और
ना शूद्र।
ना कोई ऊंचा ना कोई नीचा।
सब समान।
हे आधुनिक विज्ञान!
एक बार फिर से बैठ कर गहन चिंतन करो।
क्या होता है मोक्ष, कोशिश करो जानने की।
क्या होते हैं पाप और पुण्य?
क्या होता है पुनर्जन्म?
जानो आधुनिक विज्ञान।
तुम्हें अभी बहुत कुछ जानना है।
झुको आस्था के आगे।
धर्म के आगे।
हो सकता है आस्था का विज्ञान, धर्म का विज्ञान तुमसे बड़ा हो?
#माघ_पूर्णिमा_महाकुंभ
*सनातन धर्म की जय*
🕉️🛕🚩
इस आदमी को बड़ी तकलीफ है सनातन धर्म और सनातन धर्म के लोगों से...
प्रयागराज में सबसे ज्यादा अफवाह सपाई फैला रहे हैं ।
अखिलेश यादव महाकुंभ में जो हिंदू सनातनी उमड़ रहे हैं उसे देखकर इतना डर गए क्योंकि इनको पता चल गया कि सनातन अपनी जड़ों की ओर वापस लौट रहा है और अगर सनातनी जागृत हो गए तो इनको वोट नहीं देंगे
इसीलिए अखिलेश यादव लगातार कुंभ पर एक के बाद एक झूठ और अफवाह फैला रहे हैं ।
India’s got latent जैसे शो को इस सनातन की धरती पर बैन कर देना चाहिए
लाखो लोगो की आस्था से खिलवाड़
लाखो युवाओ को अभद्रता सीखाने का नया तरीका
अनेको माताओ बहनों को नीचे गिराने का नजरिया बन गया है ये शो ।
दुनिया का सबसे घटिया और बेहूदा शो है समय रैना का India's GOT Letent 🤬🤬
आपको पता है अभी तक क्या क्या हुआ है यहां ?
पहले पिता के रिश्ते को अपमानित & शर्मसार किया गया ,फिर कश्मीरी पंडितों को अपमानित किया गया ,फिर महिलाओं के चरित्र का उपहास बनाया गया ।
अब एक यूट्यूबर रणबीर ने मां के बारे में जो बोला शर्मसार करने वाला है मुझे ये नहीं पता क्या ये इंसान ये सब बोलने के बाद अपने मां की नजर से नजर मिलाकर बात कर पाएगा ?
इसके साथ ही साथ संस्कृति सभ्यता की धज्जियां उड़ाई जाती हैं इस शो में 🤬
और वहां पर पैनल में बैठे लोग उसे पर तालियां मार जाते हैं और हंसते हैं खिलखिलाकर जब यह सब होता है ।
“ काफिर तो काफिर ही होता है ”
बुजदिल “सेकुलर हिंदूओं” में कुछ स्वाभिमान जगाने के लिए इतिहास की एक छोटी सी याद...
अपने बच्चों पर अगर उपकार करना है तो जरूर पढ़ना...
अकबर के दरबार में
एक कट्टर सुन्नी मुस्लिम “अब्द अल कादीर बदायूनी” था...
उसने “हल्दीघाटी” के युद्ध का आँखों देखा वर्णन जिसमें वह खुद उस युद्ध में शामिल था।
उसने अपनी किताब “मुंतखाब- उत- वारीख” में किया है...
मूल किताब अरबी में है, जिसका 18 वीं सदी में अंग्रेजी में अनुवाद किया गया...
दोनों तरफ की सेनाओं में 90% राजपूत लड़ रहे थे... अकबर की तरफ से सेनापति “मानसिंह” और राजा “लूणकरण” थे...
तो दूसरी तरफ स्वयं शूरवीर “महाराणा प्रताप” और दूसरे राजपूत राजा थे...
दोनों तरफ के राजपूतों ने अपने अपने सिर पर केसरिया साफा पहन रखा था...
दोनों सेनाओं के तरफ भगवा ध्वज रथों सुशोभित हो रहे थे। भेषभूषा भी एक जैसी।
इससे अकबर का एक सेनानायक “अबुल फजल इब्न मुबारक” कन्फ्यूज हो गया कि कौन राजपूत हमारी तरफ से लड़ रहे हैं और कौन राजपूत दुश्मन की तरफ से हैं...
फिर अबुल फजल इब्न मुबारक ने “अब्द अल कादिर” से पूछा, दोनों तरफ के राजपूत केसरिया साफा पहने हैं... मैं कैसे पहचानू कि कौन राजपूत अपनी तरफ से हैं और कौन राजपूत दुश्मन की तरफ से है...
तब मैंने यानी “अब्द अल कादिर बदायूनी” ने कहा, अबुल फजल तुम बस तीर और फरसा चलाते रहो, भाला फेंकते रहो, मरने वाले तो काफिर ही होंगे ना, चाहे हमारी तरफ के राजपूत मरे या दुश्मन की तरफ के राजपूत मरे... किधर भी तीर चलाओ, किसी को भी मारो... जीत तो इस्लाम की ही होगी... अगर हम युद्ध जीत सके तो ठीक... अगर नहीं भी जीते तो कम से कम खुदा को यह तो कह देंगे कि हमने काफिरों को मारा...
काश हिंदू इतिहास पढ़ते और इतिहास से सीख लेते... हिंदूओं की स्थिती आज भी वैसी ही है... न्यूज़ चैनलों पर देखो मुस्लिम प्रवक्ता एक जुट हैं, वहीं सपा, बसपा, कांग्रेस, टीएमसी, और भी तमाम राजनीतिक दलों के हिन्दू प्रवक्ता एक बार भी "सर तन से जुदा" गैंग की निन्दा भी नहीं करते। बल्कि मुस्लिम प्रवक्ताओं के साथ मिलकर इन जेहादियों का समर्थन करते हैं।
आज भी हिंदू आपस में लड़ रहा है
और जिहादियों के 2047 तक “गजवा ए हिन्द” के टारगेट को आसान करता जा रहा है...