87-13 फॉर्मूला कोर्ट ने नहीं बनाया, यह @BJP4MP@ChouhanShivraj की बनाई हुई व्यवस्था है।
जब यह फॉर्मूला भर्ती नियमों में ही नहीं है, तो Madhya Pradesh Public Service Commission अभ्यर्थियों से शपथपत्र क्यों ले रहा है?
सवाल सीधा है —
क्या @DrMohanYadav51 अपनी प्रशासनिक गलती छुपाने के लिए ओबीसी युवाओं से अधिकार छोड़ने का हलफनामा लिखवा रही है?
87-13 फॉर्मूला असंवैधानिक जुगाड़ है, समाधान नहीं। 🚨
@OfficeofSSC ji अपने यही बात पता नहीं कितनी बार कह दी है 7 साल होंगे आपके दिल्ली से वकील नहीं आ सके शर्म आनी चाहिए आपको हर बार झूठ बोलते रहते हो ओबीसी वर्ग को गुमराह करना बंद करो 13% होल्ड स्टूडेंट्स को तत्काल नियुक्ति दो 18105 के तहत @DrMohanYadav51@DhruvRathenx@RahulGandhi
सही बात हे लगभग लाखों बच्चों को रोजगार मिलेगा इस 13% होल्ड हटाने से सरकार इतनी निकम्मी हे के 7 साल तक बच्चों को न्याय ही नहीं दिल पति धिक्कार है ऐसे corrupt नेताओं पर @DrJaihind@DrMohanYadav51@BhimArmyChief@DhruvRathenx
#ओबीसी_13_अनहोल्ड_हटाओ
जब ओबीसी के वोट लेते समय बीजेपी ये नहीं कहती कि हमे वोट कोर्ट देगी !
जब तो ओबीसी युवा की बात आती हे तब सरकार बोलती हे हमारे युवा आकांक्षी युवा बन जाते ओबीसी की बहने लाडली बहने बन जाती हे
ओर तो ओर ओबीसी के युवा के लिए सरकार विदेश में नौकरी देगी अपने ही प्रदेश के लाखों युवा को 13 प्रतिशत होल्ड के नाम पर लटका रखा हे ये कौनसा रोजगार
#केवल_जुमला_बाजी_करती_रहेगी_क्या_सरकार
#जब_13_प्रतिशत_होल्ड_की_बात_आत_ये_हे_तो_बार_बार_ये_बोलती_हे_कि_हम_सुप्रीम_कोर्ट_से_करा_रहे
कब हटेगा होल्ड जब विद्यार्थी की उम्र पूरी होने के बाद क्या ?
पिछड़ा को कब मिलेगा न्याय
आज साल साल से 13 प्रतिशत होल्ड विद्यार्थी न्याय की भीख मांग रहे सरकार से पर सरकार से मिल रही झूठी दिलासा पर क्यों ?
13 प्रतिशत होल्ड विद्यार्थी को इंसाफ चाहिए?
ये नहीं को इस कोर्ट से उस कोर्ट में
प्रधानमंत्री @narendramodi जी हर मंच से पिछड़े वर्ग की बात करते हैं। खुद को ओबीसी समाज का प्रतिनिधि बताते हैं।
Ex CM @ChouhanShivraj जी ने सार्वजनिक मंचों से कहा था कि ओबीसी को 27% आरक्षण मिलना चाहिए।
आज सवाल है — जब सत्ता आपके पास थी तब लागू क्यों नहीं किया गया?
वर्तमान मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51 जी, आप जवाब दीजिए।
क्या कारण है कि 7 वर्षों से OBC सिर्फ आश्वासन सुन रहा है?
Supreme Court of India की ओर से भी कोई रोक नहीं है, तो नियुक्तियाँ जारी करने में देरी क्यों?
क्या सरकार स्पष्ट आदेश जारी करेगी?
या फिर पिछड़े वर्ग के युवाओं को “कानूनी प्रक्रिया” के नाम पर फिर गोल-गोल घुमाया जाएगा?
यह जलेबी की राजनीति अब बंद होनी चाहिए।
ओबीसी समाज कोई प्रयोगशाला नहीं है।
लाखों ओबीसी युवाओं की उम्र निकल रही है, सपने टूट रहे हैं, परिवार इंतजार कर रहे हैं।
यदि 27% आरक्षण का निर्णय सही था — तो उसे पूरी तरह लागू कीजिए।
यदि बाधा है — तो उसे सार्वजनिक कीजिए।
यदि इच्छाशक्ति नहीं है — तो सच बोलिए।
समाज सब देख रहा है।
अब जवाब चाहिए — तारीख नहीं।
किसी ओबीसी वर्ग के बीजेपी विधायक/ मंत्री में औकात है कि मप्र में 27% आरक्षण की माँग कर सके।
प्रदेश में सामान्य वर्ग की आबादी 13% है और आरक्षण 10% के साथ प्रतिनिधित्व 50% से अधिक।
जबकि ओबीसी की आबादी 50% से अधिक है और आरक्षण 14% के साथ प्रतिनिधित्व 13.8%.
ओबीसी को 27% मिलने के बाद भी इसके साथ अन्याय ही है लेकिन भाजपाई 2019 में बने 27% की जगह भी सिर्फ 14% आरक्षण दे रहे हैं।
इतने अन्याय के बाद भी ओबीसी वर्ग के नेताओं के मुंह में दही जमा है , दम होना चाहिए अन्याय के खिलाफ अपने वर्ग के संरक्षण की तभी वह वर्ग आपका साथ देगा।
@DrMohanYadav51@jitupatwari@UmangSinghar
किसी भी ओबीसी वर्ग के भाजपा विधायक या मंत्री में क्या इतनी भी हिम्मत है कि वे मध्यप्रदेश में 27% आरक्षण की स्पष्ट और खुलकर माँग कर सकें?
प्रदेश में सामान्य वर्ग की आबादी लगभग 9% बताई जाती है, लेकिन उन्हें 10% आरक्षण के साथ 50% से अधिक प्रतिनिधित्व प्राप्त है|
वहीं ओबीसी वर्ग की आबादी 50% से अधिक होने के बावजूद उन्हें केवल 14% आरक्षण और लगभग 13.8% प्रतिनिधित्व ही मिल रहा है|
वर्ष 2019 में 27% आरक्षण का प्रावधान किया गया था, फिर भी व्यवहार में केवल 14% ही दिया जा रहा है। यह स्थिति ओबीसी वर्ग के साथ निरंतर अन्याय को दर्शाती है। 27% आरक्षण मिलने के बाद भी वास्तविक प्रतिनिधित्व और अधिकारों की दृष्टि से अनेक प्रश्न शेष रहते हैं, परंतु वर्तमान में तो घोषित प्रावधान भी पूर्ण रूप से लागू नहीं किया जा रहा है|
इतने स्पष्ट असंतुलन और अन्याय के बाद भी यदि ओबीसी वर्ग के जनप्रतिनिधि मौन रहें, तो यह चिंता का विषय है। अन्याय के विरुद्ध अपने वर्ग के अधिकारों और संरक्षण की आवाज उठाने का साहस होना चाहिए। जब नेतृत्व दृढ़ता से खड़ा होता है, तभी समाज भी उसके साथ मजबूती से खड़ा होता है|
बीजेपी के लिए ओबीसी सिर्फ वोट बैंक है?
ओबीसी CM का मुखौटा देकर प्रदेश के 11 हजार ओबीसी स्टूडेंट्स के नियुक्ति पत्र 7 वर्षों से रोक कर रखें हैं।
जब SC से लेकर HC सभी कह चुके हैं कि कानून पर कोई रोक नहीं है तो कोर्ट का बहाना क्यों बना रही है बीजेपी।
#ओबीसी_बच्चों_को_न्याय_नहीं_मिले_ये_महाधिवक्ता_की_कोशिश
#महाधिवक्ता_कर_रहा_हे_पद_कर_दूर_उपयोग
इस लिए नहीं मिल पा रहा है ओबीसी बच्चों को न्याय
@narendramodi@DropatiMurmufan@DrMohanYadav51
सुप्रीम कोर्ट मे आरक्षित वर्ग यानि ओबीसी की तरफ से वकीलो को बोलने भी नही दिया जाता है। डायरेक्ट चुप करा दिया जाता है। ये और कहते है i will not hear you बार बार
आरक्षण के विरोध वालो को खूब बोलने दिया जाता है।
ये वीडियो का लिंक 👇 रहा देख लो। क्या हालात है
https://t.co/9zUmBnp1VQ
कभी Madhya Pradesh High Court, कभी Supreme Court of India — आखिर कब तक 27% ओबीसी आरक्षण को अदालतों के बीच घुमाया जाएगा?
यह पिंग-पोंग नहीं, लाखों युवाओं के सपनों का सवाल है।
सरकार अगर सच में पिछड़ों के साथ है तो अदालत में मजबूती क्यों नहीं दिखी?
क्यों अधूरी तैयारी?
क्यों बार-बार देरी?
स्पष्ट सुन लीजिए — @narendramodi@AmitShah@DrMohanYadav51 ओबीसी समाज अब चुप नहीं बैठेगा।
हमें बहाने नहीं, 27% का जमीन पर लागू होना चाहिए।तारीख नहीं, ठोस फैसला चाहिए।अब संघर्ष भी होगा और जवाब भी लिया जाएगा।
मै उस प्रदेश का निवासी हूं...
*जहां कानून लागू है, पर कानून का पूरा लाभ हितग्राहियों को नहीं
*जहां महाधिवक्ता कानून का पक्ष रखने के स्थान पर कानून के विरोध में बहस करता है।
*जहां महाधिवक्ता कानून के विरोध में अभिमत देता है।
*जहां मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51 महाधिवक्ता के सामने विवश है।
@OfficeOfKNath@INCMP@INCIndia@BJP4MP@BJP4India@Kamleshwar_INC
मेरे मध्यप्रदेश में
*ओबीसी आरक्षण के प्रकरण @BJP4MP सरकार हाईकोर्ट से सुप्रीमकोर्ट ट्रांसफर करवाती है,जो पुनः हाईकोर्ट में सुने जायेगे।
*ओबीसी चयनित उम्मीदवार को न्याय के स्थान पर समय व्यतीत कर मामले को उलझाया जाता है।
*रोस्टर में ओबीसी 27% आरक्षण जिन भर्तियों में दिया है,नियुक्ति मात्र 14% पदों पर!!!!
@OfficeOfKNath@INCMP@INCIndia
🚨 OBC आरक्षण पर अपडेट 🚨
सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश में OBC आरक्षण से जुड़े सभी मामले वापस हाईकोर्ट को भेज दिए हैं। अब 3 माह के भीतर स्पेशल बेंच बनाकर सुनवाई और फैसला होगा।
⚖️ कोर्ट ने साफ कहा —
हर राज्य की सामाजिक व जनसांख्यिकीय परिस्थितियाँ अलग होती हैं,
@BJP4MP
मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने 27% ओबीसी आरक्षण को वर्षों से जानबूझकर उलझाकर रखा है। लाखों ओबीसी युवाओं की नौकरियां और भविष्य अनिश्चितता में डाल दिए गए, लेकिन सरकार ने न मजबूत पैरवी की और न समाधान निकाला। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि ओबीसी समाज के संवैधानिक अधिकारों के साथ अन्याय है। अब ओबीसी वर्ग अपने अधिकारों के लिए जवाब मांग रहा है।
#OBCआरक्षण #27PercentReservation #OBCAdhikar #SocialJustice #MPPolitics #OBCYouth #JusticeForOBC
#_MPTET_2020_OBC_पद_अनहोल्ड_करें
सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण पर स्पष्ट किया है कि 3 माह में स्पेशल बेंच बनाकर हाईकोर्ट अंतिम फैसला करेगा ।
अब सरकार जवाब दे,
◆ 27 फीसदी आरक्षण कानून पर रोक कहाँ लगी है ?
◆ आनन-फानन में मामला हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट क्यों ले जाया गया था ?
◆ 87-13 का फार्मूला किस आधार पर बनाया गया ?
7 वर्षों से ओबीसी आरक्षण को उलझाकर भाजपा सरकार ने ओबीसी वर्ग के साथ छल किया है ।
#OBCReservation #ओबीसी_आरक्षण
@INCIndia@INCMP@kharge@RahulGandhi
मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर जो घटनाक्रम सामने आया है, वह केवल एक कानूनी विवाद नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा सवाल है। मुझे हैरानी है कि हमारी कांग्रेस सरकार ने ओबीसी वर्ग को 27% आरक्षण देने की प्रक्रिया पूरी कर दी थी, और 27% आरक्षण प्रदेश में लागू भी हो गया था, लेकिन कुछ लोगों ने छल करते हुए इसे रोकने का काम किया, नतीजतन आज तक हमारे ओबीसी समाज को उसका वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है। आखिर यह कैसी व्यवस्था है, जिसमें एक सरकार अधिकार देती है, तो दूसरे दल की सरकार इसे लागू नहीं करने को अपनी उपलब्धि मानती है।
हाईकोर्ट से मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा। प्रदेश के युवाओं को उम्मीद थी कि अब शीर्ष अदालत में ठोस तैयारी के साथ सरकार अपना पक्ष रखेगी और वर्षों से लटका विवाद सुलझेगा। लेकिन जो खबरें सामने आईं, वे चौंकाने वाली हैं। कभी सरकार के वकील अधूरी तैयारी के साथ पहुँचे, तो कभी समय पर उपस्थित ही नहीं हुए। क्या यह संवेदनशील मुद्दा इतनी लापरवाही से निपटाने लायक था? क्या सरकार को अंदाज़ा नहीं कि इस फैसले पर लाखों भर्तियाँ, हजारों परिवारों की उम्मीदें और पूरे समाज का विश्वास टिका हुआ है?
अब सुप्रीम कोर्ट ने मामला वापस हाईकोर्ट को भेज दिया है और विशेष पीठ बनाकर तीन महीने में निर्णय लेने को कहा है। सवाल यह है कि यदि शुरुआत से ही गंभीरता दिखाई जाती, तो क्या यह स्थिति बनती? क्या युवाओं को वर्षों तक असमंजस में रखा जाना चाहिए था? 2019 से शुरू हुआ यह विवाद आज 2026 तक खिंच चुका है। कितनी पीढ़ियाँ इस इंतज़ार में अपनी आयु सीमा पार कर चुकीं, कितनी भर्तियाँ अटक गईं, इसका हिसाब कौन देगा?
सरकार बार-बार दावा करती है कि वह पिछड़े वर्ग के साथ खड़ी है। लेकिन यदि 27% आरक्षण का लाभ वास्तविक रूप से लागू ही नहीं हो पा रहा, तो यह समर्थन केवल भाषणों तक सीमित क्यों दिखाई देता है? यदि नीति सही थी, तो उसकी कानूनी तैयारी पुख्ता क्यों नहीं थी? यदि सामाजिक न्याय का संकल्प था, तो अदालत में पक्ष मजबूती से क्यों नहीं रखा गया?
क्या हमारे देश में न्याय मिलना इतना कठिन हो गया है? या फिर न्याय की राह में राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी सबसे बड़ी बाधा बन रही है? प्रदेश का ओबीसी वर्ग जवाब चाहता है। युवा जानना चाहते हैं कि उनका अधिकार कब तक अदालतों की तारीखों में उलझा रहेगा। सरकार को स्पष्ट करना होगा कि वह केवल घोषणा करती है या वास्तव में उसे लागू कराने की क्षमता और गंभीरता भी रखती है।
अब समय आ गया है कि सरकार राजनीतिक बयानबाज़ी से आगे बढ़कर ठोस कार्रवाई दिखाए। सामाजिक न्याय केवल घोषणा से नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प, कानूनी तैयारी और जवाबदेही से स्थापित होता है। मध्यप्रदेश का ओबीसी समाज अब प्रतीक्षा नहीं, परिणाम चाहता है।
#ओबीसीMP_13अनहोल्ड_करे
ओबीसी युवा को न्याय दीजिए 7 साल से 13 प्रतिशत होल्ड बच्चे को न्याय दिजिए