आज जैसे ही कोई कहता है भारत का इतिहास दोबारा लिखा जाना चाहिए- वैसे ही एक वर्ग की- जिसमें सेक्युलर, लेफ्ट, लिबरल शामिल हैं- भुजाएं फड़क उठती हैं… भृकुटि तन जाती है। वे उसे भाजपाई, संघी, हिंदुत्ववादी, भगवा और न जाने क्या क्या घोषित कर डालते हैं।
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एक बच्ची का बर्बर बलात्कार कोई धार्मिक मसला नही है। पीड़ित देश की बेटी है अतः हर नागरिक का दुःख है। परंतु कुछ लोग दिल्ली के हालिया बलात्कार पर इसीलिये नही बोल रहे क्योंकि ये मस्जिद का मामला है।अगर मंदिर होता तो ट्विटर भर दिया। इन लोगों का सामाजिक बहिष्कार करना चाहिये।