देश में पागलपन चल रहा है , इस वीडियो को देख कर दिमाग़ ही घूम गया एक बार के लिए तो
यह वीडियो कल के एक कार्यक्रम का है , और मोदी जी जिनसे लाइव माइक पर बात कर रहे हैं , जैसा की आपको लगेगा
वह असल में स्वामी चिन्मयानंद जी हैं , जिनका स्वर्गवास 1993 में ही हो चुका है 😳
किंतु होलोग्राम व AI तकनीक से मोदी जी और इनकी लाइव बात चीत कराई गई और दिखाया गया की वे कितने ख़ुश हैं मोदी जी के कार्यों से 🤦🏻♂️
मतलब हद्द ही नहीं मचा दी है अब मोदी जी की PR टीम ने , वैसे वो भी समझ चुके हैं की मोदी जी के समर्थकों का IQ लेवल किस स्तर का है
वो सब कुछ सच समझ लेंगे।
ऐसा दिखाया गया की स्वामी जी ने मोदी जी को कहा की शिक्षा व्यवस्था , अर्थ व्यवस्था में देश को मोदी जी ने जिस तरह आगे बढ़ाया है वह अद्भुत है
जबकि असलियत यह है की जो शिक्षा का बजट 2013-14 तक कुल बजट का 4.6 % तक हुआ करता था , वह अब घट कर सिर्फ 2.5 % रह गया है , मतलब आधा।
नई सरकारी स्कूलें छोड़िये , पुरानी बनी 94 हज़ार से ज़्यादा स्कूलें सरकार ने बंद कर दी इन 12 सालों में।
क्यूँकि भाजपा को देश में अनपढ़ों की फ़ौज चाहिए , पढ़े लिखे युवा नहीं , क्यूँकि बुद्धिजीवी पढ़े लिखे व्यक्ति प्रश्न करने लगते हैं , लॉजिक ढूँडने लगते हैं।
और रही बात अर्थ व्यवस्था की तो हालात ये हैं की लाखों करोड़ रुपये निवेशक भारत से लगातार निकाल रहे हैं ,
महंगाई चरम पर है , सारे उद्योग, सरकारी संपत्तियां , कंपनियाँ प्राइवेट कंपनियों को बेची जा रही है।
लेकिन देखिए ताक़त , होलोग्राम से लाइव बात चीत करवा ली और अपनी तारीफ़ों के इतने भयंकर पुल बँधवा लिए।
मतलब हद्द ही मचा दी गई है , चल क्या रहा है देश में ये सब।
@elonmusk@TheCaptainEli Condemning a far past genocide and feeling for there suffering while complying in the current ongoing genocide with resources as well.
See a mirror man!
मौलाना मदनी ने कहा:
• उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य द्वारा मदरसों पर दिए गए बयान की कड़ी निंदा करते हुए इसे गैर-जिम्मेदाराना, असंवैधानिक और सामाजिक सौहार्द के लिए घातक बताया।
• दारुल उलूम देवबंद और देश के मदरसों के स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उलेमाओं ने देश की आज़ादी के लिए जेलें काटीं, कुर्बानियाँ दीं और कभी अंग्रेज़ी हुकूमत के सामने घुटने नहीं टेके।
• इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने की प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए कहा कि जब उलेमा आज़ादी की लड़ाई लड़ रहे थे, तब कुछ लोग अंग्रेज़ी हुकूमत से दया याचिकाएँ भेज रहे थे।
• मदरसों और मुसलमानों को लगातार निशाना बनाए जाने को चुनावी और सांप्रदायिक राजनीति का हिस्सा बताया, जिसका उद्देश्य समाज में नफरत और विभाजन पैदा करना है।
• उपमुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से संविधान की मर्यादा, सामाजिक सौहार्द और सभी नागरिकों के सम्मान की रक्षा करने की अपेक्षा व्यक्त की।
• स्पष्ट किया कि नफरत का जवाब नफरत से नहीं, बल्कि तथ्यों, तर्क, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के दायरे में रहकर दिया जाएगा।
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